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साधनामय जीवन बार-बार नहीं मिलता : भाव भूषण महाराज
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
- प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का छठा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के छठे दिन श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान का अभिषेक कर विश्व शांति और परिवारों की सुख-समृद्धि की कामना की।
विधान की शुरुआत त्रिमूर्ति जिनालय में प्राचीन अतिशयकारी जिन प्रतिमा के समक्ष मांगलिक क्रियाओं से हुई। पांडुक शिला पर भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा विराजमान कर शांतिधारा कराई गई। शांतिधारा का सौभाग्य सुशील जैन, राजरानी जैन, गुंजन जैन, आगम जैन, अनुभूति जैन, गरिमा जैन, विपिन जैन और ऋषभ जैन परिवार को प्राप्त हुआ। बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने प्रार्थना कराई।
मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि साधनामय जीवन बार-बार नहीं मिलता। धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए व्यक्ति को मंदिर में सांसारिक विषयों और घरेलू चर्चाओं से दूर रहकर केवल धर्म चिंतन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति साधना के महत्व को समझता है, वह सभी बाधाओं को स्वीकार कर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
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विधान में 140 परिवारों ने अर्घ्य और श्रीफल अर्पित किए। पंडित आशीष जैन शास्त्री और दिलीप जैन शास्त्री विधान संपन्न करा रहे हैं।
इस मौके पर तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, राजेंद्र कुमार जैन, प्रवीण जैन, अतुल जैन, दीपक जैन और अन्य पदाधिकारियों का सहयोग रहा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के छठे दिन श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान का अभिषेक कर विश्व शांति और परिवारों की सुख-समृद्धि की कामना की।
विधान की शुरुआत त्रिमूर्ति जिनालय में प्राचीन अतिशयकारी जिन प्रतिमा के समक्ष मांगलिक क्रियाओं से हुई। पांडुक शिला पर भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा विराजमान कर शांतिधारा कराई गई। शांतिधारा का सौभाग्य सुशील जैन, राजरानी जैन, गुंजन जैन, आगम जैन, अनुभूति जैन, गरिमा जैन, विपिन जैन और ऋषभ जैन परिवार को प्राप्त हुआ। बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने प्रार्थना कराई।
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मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि साधनामय जीवन बार-बार नहीं मिलता। धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए व्यक्ति को मंदिर में सांसारिक विषयों और घरेलू चर्चाओं से दूर रहकर केवल धर्म चिंतन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति साधना के महत्व को समझता है, वह सभी बाधाओं को स्वीकार कर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
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विधान में 140 परिवारों ने अर्घ्य और श्रीफल अर्पित किए। पंडित आशीष जैन शास्त्री और दिलीप जैन शास्त्री विधान संपन्न करा रहे हैं।
इस मौके पर तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, राजेंद्र कुमार जैन, प्रवीण जैन, अतुल जैन, दीपक जैन और अन्य पदाधिकारियों का सहयोग रहा।

प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद