{"_id":"57893d314f1c1b0f2013d798","slug":"50-gao-me-handpump","type":"story","status":"publish","title_hn":"50 गांवों का हैंडपंप बांट रहा बीमारी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
50 गांवों का हैंडपंप बांट रहा बीमारी
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sat, 16 Jul 2016 01:57 AM IST
विज्ञापन
पानी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मेरठ और बागपत जिलों के करीब 50 गांवों में हैंडपंप का पानी बीमारियां बांट रहा है। इन गांवों से लिए गए नमूनों की जांच में आयरन के साथ जिंक की मात्रा मानक से कहीं अधिक पाई गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद से विभाग में हड़कंप है। अब सेंट्रल लैब में नमूनों की जांच कराए जाने की बात कही जा रही है।
एनजीटी ने दिखायी सख्ती
बागपत और मेरठ जिले में दूषित पानी का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में प्रमुखता से उठा था। एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ऐसे गांवों के हैंडपंपों के पानी की जांच के आदेश दिए थे। जिस पर यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दोनों जिलों के अलग-अलग गांवों से पानी के नमूने लिए। इनकी जांच लखनऊ स्थित भारतीय विश्व विज्ञान अनुसंधान संस्थान से कराई गई।
यह आयी जांच रिपोर्ट
पानी में आर्सेनिक, आयरन, जिंक के अलावा केरोमियम, लेड, कैडियम और निकिल की जांच करायी गई थी। रिपोर्ट में आयरन और जिंक की मात्रा सामान्य से कई गुना अधिक पायी गई। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अनुसार सामान्य रूप से पानी में आयरन की मात्रा 0.3 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। जबकि कई स्थानों पर यह मात्रा 4.352 तक पायी गई।
विज्ञापन
पुराने हैंडपंपों से बढ़ा आयरन
अधिकारी कह रहे हैं कि हैंडपंप के पुराने पड़ चुके लोहे के पाइप अधिक आयरन की वजह बन रहे हैं। हालांकि इसके हर संभावित कारणों की गहनता से जांच करायी जा रही है।
हिडंन के आसपास खराब स्थिति
जिले में हिंडन और काली नदी के आसपास के इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब है। यहां पानी में लेड की मात्रा भी पायी गई हैं। हालांकि इस रिपोर्ट में काली नदी के आसपास वाले इलाके शामिल नहीं हैं। काली नदी के आसपास वाले गांवों में दूषित पानी की वजह से कई लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है।
मजबूरी है, क्या करें
इन गांवों के लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। उनका कहना है कि काफी शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। जबकि अधिकारियों का कहना है कि जहां शिकायत अधिक हैं, जहां हैंडपंप का रिबोर कम गहरायी में है और उसे लगे वर्षों हो चुके हैं।
घरों के अंदर से लिए नमूने
अफसरों के अनुसार पानी के अधिकांश नमूने घर के अंदर लगे हैंडपंपों से लिए गए। उस हैंडपंप को एक कोड दिया गया। इनमें कई हैंडपंप ऐसे मिले हैं, जहां मानक से कई गुना अधिक आयरन की मात्रा मिली है।
ये होती है बीमारी
अधिक आयरन से पेट संबंधी रोग और आंत में संक्रमण शुरू होता है। सिर में भारीपन रहता है। पाचन क्रिया बिगड़ने से दूसरे रोग भी शुरू हो जाते हैं।
इन गांवों के नमूने, निष्कर्ष
मेरठ हर्रा गांव, इकबाल (1.000), दाहा बागपत, जयप्रकाश (2.838), बामनौली, राजू (2.879), नफे सिंह, नांगल (3.876) मुनसन, ब्रह्मप्रकाश (1.664), झुंडपुर, ज्ञानदीप (0.638), तविला गौरी, देवेंद्र (2.838), बरनावा, निजामुद्दीन (0.010), चंदावन, ब्रह्मपाल (1.039), गढ़ी कुनरूप, बेबी (3.107), भूपुरा, तोफा (3.226), पांचली जानी, अजित (3.042), कैलीना, राजाराम (0.598), खिवई, गुलजारी (3.307), बेगमाबाद, रामवीर (1.299), बामनौली, राजू (0.452), रानाहर, देवेंद्र (2.879), जीवाना, कमल (2.623), इदरीशपुर, पप्पू (3.682), प्राइमरी पाठशाला, दादरी (2.817), किनौनी, जाहरवीर (3.682), रथाना, हरक लाल(1.062) दोघट, शाहिद (1.854), सुजाती, श्रीपाल (0.907)
(नोट: कोष्ठक में आयरन की मात्रा है)
एनजीटी ने दिखायी सख्ती
बागपत और मेरठ जिले में दूषित पानी का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में प्रमुखता से उठा था। एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ऐसे गांवों के हैंडपंपों के पानी की जांच के आदेश दिए थे। जिस पर यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दोनों जिलों के अलग-अलग गांवों से पानी के नमूने लिए। इनकी जांच लखनऊ स्थित भारतीय विश्व विज्ञान अनुसंधान संस्थान से कराई गई।
विज्ञापन
यह आयी जांच रिपोर्ट
पानी में आर्सेनिक, आयरन, जिंक के अलावा केरोमियम, लेड, कैडियम और निकिल की जांच करायी गई थी। रिपोर्ट में आयरन और जिंक की मात्रा सामान्य से कई गुना अधिक पायी गई। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अनुसार सामान्य रूप से पानी में आयरन की मात्रा 0.3 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। जबकि कई स्थानों पर यह मात्रा 4.352 तक पायी गई।
विज्ञापन
पुराने हैंडपंपों से बढ़ा आयरन
अधिकारी कह रहे हैं कि हैंडपंप के पुराने पड़ चुके लोहे के पाइप अधिक आयरन की वजह बन रहे हैं। हालांकि इसके हर संभावित कारणों की गहनता से जांच करायी जा रही है।
हिडंन के आसपास खराब स्थिति
जिले में हिंडन और काली नदी के आसपास के इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब है। यहां पानी में लेड की मात्रा भी पायी गई हैं। हालांकि इस रिपोर्ट में काली नदी के आसपास वाले इलाके शामिल नहीं हैं। काली नदी के आसपास वाले गांवों में दूषित पानी की वजह से कई लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है।
मजबूरी है, क्या करें
इन गांवों के लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। उनका कहना है कि काफी शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। जबकि अधिकारियों का कहना है कि जहां शिकायत अधिक हैं, जहां हैंडपंप का रिबोर कम गहरायी में है और उसे लगे वर्षों हो चुके हैं।
घरों के अंदर से लिए नमूने
अफसरों के अनुसार पानी के अधिकांश नमूने घर के अंदर लगे हैंडपंपों से लिए गए। उस हैंडपंप को एक कोड दिया गया। इनमें कई हैंडपंप ऐसे मिले हैं, जहां मानक से कई गुना अधिक आयरन की मात्रा मिली है।
ये होती है बीमारी
अधिक आयरन से पेट संबंधी रोग और आंत में संक्रमण शुरू होता है। सिर में भारीपन रहता है। पाचन क्रिया बिगड़ने से दूसरे रोग भी शुरू हो जाते हैं।
इन गांवों के नमूने, निष्कर्ष
मेरठ हर्रा गांव, इकबाल (1.000), दाहा बागपत, जयप्रकाश (2.838), बामनौली, राजू (2.879), नफे सिंह, नांगल (3.876) मुनसन, ब्रह्मप्रकाश (1.664), झुंडपुर, ज्ञानदीप (0.638), तविला गौरी, देवेंद्र (2.838), बरनावा, निजामुद्दीन (0.010), चंदावन, ब्रह्मपाल (1.039), गढ़ी कुनरूप, बेबी (3.107), भूपुरा, तोफा (3.226), पांचली जानी, अजित (3.042), कैलीना, राजाराम (0.598), खिवई, गुलजारी (3.307), बेगमाबाद, रामवीर (1.299), बामनौली, राजू (0.452), रानाहर, देवेंद्र (2.879), जीवाना, कमल (2.623), इदरीशपुर, पप्पू (3.682), प्राइमरी पाठशाला, दादरी (2.817), किनौनी, जाहरवीर (3.682), रथाना, हरक लाल(1.062) दोघट, शाहिद (1.854), सुजाती, श्रीपाल (0.907)
(नोट: कोष्ठक में आयरन की मात्रा है)