एनजीओ का बड़ा खेल, 328 विद्यालयों में मिड-डे मील पूरी तरह बंद
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बेसिक शिक्षा परिषद और माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध एडेड कालेज में आठवीं तक के छात्रों को मिड-डे-मील नहीं दिया जा रहा है। पहले एनजीओ की मनमानी और अब विद्यालयों के स्तर पर डीएम के आदेशों को धता बताया जा रहा है। ऐसे में नगर क्षेत्र के 328 विद्यालयों के बच्चों के लिए मिड-डे मील पूरी तरह से बंद है। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से निदेशक मिड-डे मील को विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई है। जिसमें कहा गया है कि छात्रों को भोजन नहीं मिल रहा है। वहीं, निदेशक ने यह कहकर किनारा कर लिया है कि यह काम स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन का है। यानी पूरा मामला अभी तक फाइलों के बीच में उलझा है।
दरअसल नगरीय क्षेत्र के विद्यालयों में मिड-डे मील बांटने का काम एनजीओ को दिया गया था। लेकिन एनजीओ द्वारा लगातार घटिया क्वालिटी का खाना परोसा जा रहा था। जिसको लेकर शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने चार एनजीओ पर रोक लगा दी थी। साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिए थे कि अनुबंध की शर्तों के हिसाब से भोजन सप्लाई न किए जाने पर एनजीओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए।
उधर, छात्रों को भोजन लगातार मिलता रहे, इसके लिए डीएम बी. चंद्रकला ने निर्देश दिए थे कि कन्वर्जन कॉस्ट (लागत खर्च) और खाद्यान की कीमत के हिसाब से प्रति छात्र को विद्यालय फल व बिस्किट देते रहें। लेकिन अब छात्रों को न तो फल मिल रहे हैं और न ही मिल-डे मील। विद्यालय जहां रोजाना ऐसी व्यवस्था न होने का सवाल उठा रहे हैं, तो शिक्षा विभाग एनजीओ की उपलब्धता न होने तक भोजन उपलब्ध कराने को कह रहा है।
26 जनवरी के बाद से व्यवस्था बिगड़ी
विद्यालयों में 26 जनवरी के बाद से भोजन नहीं मिल रहा है, क्योंकि जिला प्रशासन ने एनजीओ की धांधली को देखते हुए तत्काल उन पर रोक लगी दी थी। जिसके बाद से किसी भी विद्यालय ने फल व बिस्किट की व्यवस्था नहीं की। क्योंकि उसमें दिलचस्पी न तो विद्यालयों ने दिखाई है और न ही शिक्षा विभाग ने। विद्यालय यह कहकर किनारा कर गए कि रोजाना विद्यालय से एक आदमी को फल खरीदने के लिए बाजार में नहीं भेजा जा सकता है। उसके बाद फल बांटने का झंझट काफी बड़ा है।
एनजीओ का बड़ा खेल
अमर उजाला ने बीते साल 14 दिसंबर को खुलासा किया था कि एनजीओ किस तरह से रात को डासना की फैक्ट्री में बनाई गई रोटियां विद्यालयों में सप्लाई कर रहे हैं। ‘भविष्य की थाली में बासी रोटी’ शीर्षक से अमर उजाला ने पूरे मामले का खुलासा किया था। जिसके बाद जिला प्रशासन ने जांच बैठाई थी। उसके साथ ही माध्यमिक विद्यालयों की तरफ से तमाम प्रधानाचार्यों ने घटिया क्वालिटी का भोजन सप्लाई करने की सीधे शिकायत की थी। जांच की गई तो भारी खेल सामने आया। उसके बाद जिले में संचालित एनजीओ में से चार पर कार्रवाई की गई।