फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   328 school MDM totally closed

एनजीओ का बड़ा खेल, 328 विद्यालयों में मिड-डे मील पूरी तरह बंद

Sat, 18 Mar 2017 11:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Sat, 18 Mar 2017 11:27 AM IST
विज्ञापन
328 school MDM totally closed
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

बेसिक शिक्षा परिषद और माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध एडेड कालेज में आठवीं तक के छात्रों को मिड-डे-मील नहीं दिया जा रहा है। पहले एनजीओ की मनमानी और अब विद्यालयों के स्तर पर डीएम के आदेशों को धता बताया जा रहा है। ऐसे में नगर क्षेत्र के 328 विद्यालयों के बच्चों के लिए मिड-डे मील पूरी तरह से बंद है।  बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से निदेशक मिड-डे मील को विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई है। जिसमें कहा गया है कि छात्रों को भोजन नहीं मिल रहा है। वहीं, निदेशक ने यह कहकर किनारा कर लिया है कि यह काम स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन का है। यानी पूरा मामला अभी तक फाइलों के बीच में उलझा है।

विज्ञापन


दरअसल नगरीय क्षेत्र के विद्यालयों में मिड-डे मील बांटने का काम एनजीओ को दिया गया था। लेकिन एनजीओ द्वारा लगातार घटिया क्वालिटी का खाना परोसा जा रहा था। जिसको लेकर शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने चार एनजीओ पर रोक लगा दी थी। साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिए थे कि अनुबंध की शर्तों के हिसाब से भोजन सप्लाई न किए जाने पर एनजीओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए।
विज्ञापन


उधर, छात्रों को भोजन लगातार मिलता रहे, इसके लिए डीएम बी. चंद्रकला ने निर्देश दिए थे कि कन्वर्जन कॉस्ट (लागत खर्च) और खाद्यान की कीमत के हिसाब से प्रति छात्र को विद्यालय फल व बिस्किट देते रहें। लेकिन अब छात्रों को न तो फल मिल रहे हैं और न ही मिल-डे मील। विद्यालय जहां रोजाना ऐसी व्यवस्था न होने का सवाल उठा रहे हैं, तो शिक्षा विभाग एनजीओ की उपलब्धता न होने तक भोजन उपलब्ध कराने को कह रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


26 जनवरी के बाद से व्यवस्था बिगड़ी
विद्यालयों में 26 जनवरी के बाद से भोजन नहीं मिल रहा है, क्योंकि जिला प्रशासन ने एनजीओ की धांधली को देखते हुए तत्काल उन पर रोक लगी दी थी। जिसके बाद से किसी भी विद्यालय ने फल व बिस्किट की व्यवस्था नहीं की। क्योंकि उसमें दिलचस्पी न तो विद्यालयों ने दिखाई है और न ही शिक्षा विभाग ने। विद्यालय यह कहकर किनारा कर गए कि रोजाना विद्यालय से एक आदमी को फल खरीदने के लिए बाजार में नहीं भेजा जा सकता है। उसके बाद फल बांटने का झंझट काफी बड़ा है।


एनजीओ का बड़ा खेल
अमर उजाला ने बीते साल 14 दिसंबर को खुलासा किया था कि एनजीओ किस तरह से रात को डासना की फैक्ट्री में बनाई गई रोटियां विद्यालयों में सप्लाई कर रहे हैं। ‘भविष्य की थाली में बासी रोटी’ शीर्षक से अमर उजाला ने पूरे मामले का खुलासा किया था। जिसके बाद जिला प्रशासन ने जांच बैठाई थी। उसके साथ ही माध्यमिक विद्यालयों की तरफ से तमाम प्रधानाचार्यों ने घटिया क्वालिटी का भोजन सप्लाई करने की सीधे शिकायत की थी। जांच की गई तो भारी खेल सामने आया। उसके बाद जिले में संचालित एनजीओ में से चार पर कार्रवाई की गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed