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वसुधैव कुटुम्बकम को पूरी दुनिया कर रही स्वीकार
Updated Wed, 29 Aug 2018 02:08 AM IST
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वसुधैव कुटुंबकम को पूरी दुनिया कर रही स्वीकार
मेरठ। चौ. चरण सिंह विवि के इतिहास विभाग और भारतीय इतिहास संकलन समिति मेरठ प्रांत द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति के विविध पक्ष विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ।
संगोष्ठी में प्रो. आराधना इतिहास विभाग एवं प्रांत अध्यक्ष, भारतीय इतिहास संकलन समिति ने विषय स्थापना में कहा कि भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही अतिथियाें का स्वागत तिलक किया जाता है। हमारी संस्कृति के सूत्र वाक्यों अतिथि देवो भव:, कृण्वंतो विश्वमार्यम्, वसुधैव कुटुंबकम् आदि को पूरी दुनिया आज स्वीकार कर रही है।
मुख्य वक्ता डॉ. बाल मुकुंद पांडे राष्ट्रीय संगठन मंत्री अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना ने भारतीय संस्कृति पर बोलते हुए कहा कि हम एक से अनेक हुए है। विशिष्ट अतिथि प्रो. वाचस्पति मिश्र अध्यक्ष, उ.प्र. संस्कृत संस्थान, लखनऊ ने कहा कि प्राचीन काल में भारतीय लोग इतने सज्जन थे कि लोग घरों के ताले नही लगाते थे।
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मुख्य अतिथि प्रो. आरएस अग्रवाल, सदस्य, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने कहा कि हमारी संस्कृति पर साम्राज्यवादियों तथा मार्क्सवादियों ने बहुत प्रभाव डाला है। अध्यक्षीय वक्तव्य में कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर विभिन्नता होते हुए भी भारत में एकता है। हमारी संस्कृति में संयुक्त परिवार का विशिष्ट स्थान है।
दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता प्रो. एके सिन्हा, पूर्व विभागाध्यक्ष, प्राचीन इतिहास व संस्कृति विभाग, महात्मा ज्योतिबा फुले, रूहेलखंड विवि बरेली और मुख्य अतिथि राकेश आर्या, राष्ट्रीयवादी लेखक ने विचार रखे। संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में 35 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। संगोष्ठी में प्रो. अजय विजय कौर, प्रो. विघ्नेश त्यागी, आर्या, प्रो. जेके शर्मा, प्रो. सीएम अग्रवाल, डॉ. अशोक त्रिपाठी, डॉ. अजय पाल, डॉ. सुशील भाटी, डॉ हरेंद्र सिंह, डॉ. वासुदेव, डॉ सुरेश आदि मौजूद रहे।
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मेरठ। चौ. चरण सिंह विवि के इतिहास विभाग और भारतीय इतिहास संकलन समिति मेरठ प्रांत द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति के विविध पक्ष विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ।
संगोष्ठी में प्रो. आराधना इतिहास विभाग एवं प्रांत अध्यक्ष, भारतीय इतिहास संकलन समिति ने विषय स्थापना में कहा कि भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही अतिथियाें का स्वागत तिलक किया जाता है। हमारी संस्कृति के सूत्र वाक्यों अतिथि देवो भव:, कृण्वंतो विश्वमार्यम्, वसुधैव कुटुंबकम् आदि को पूरी दुनिया आज स्वीकार कर रही है।
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मुख्य वक्ता डॉ. बाल मुकुंद पांडे राष्ट्रीय संगठन मंत्री अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना ने भारतीय संस्कृति पर बोलते हुए कहा कि हम एक से अनेक हुए है। विशिष्ट अतिथि प्रो. वाचस्पति मिश्र अध्यक्ष, उ.प्र. संस्कृत संस्थान, लखनऊ ने कहा कि प्राचीन काल में भारतीय लोग इतने सज्जन थे कि लोग घरों के ताले नही लगाते थे।
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मुख्य अतिथि प्रो. आरएस अग्रवाल, सदस्य, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने कहा कि हमारी संस्कृति पर साम्राज्यवादियों तथा मार्क्सवादियों ने बहुत प्रभाव डाला है। अध्यक्षीय वक्तव्य में कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर विभिन्नता होते हुए भी भारत में एकता है। हमारी संस्कृति में संयुक्त परिवार का विशिष्ट स्थान है।
दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता प्रो. एके सिन्हा, पूर्व विभागाध्यक्ष, प्राचीन इतिहास व संस्कृति विभाग, महात्मा ज्योतिबा फुले, रूहेलखंड विवि बरेली और मुख्य अतिथि राकेश आर्या, राष्ट्रीयवादी लेखक ने विचार रखे। संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में 35 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। संगोष्ठी में प्रो. अजय विजय कौर, प्रो. विघ्नेश त्यागी, आर्या, प्रो. जेके शर्मा, प्रो. सीएम अग्रवाल, डॉ. अशोक त्रिपाठी, डॉ. अजय पाल, डॉ. सुशील भाटी, डॉ हरेंद्र सिंह, डॉ. वासुदेव, डॉ सुरेश आदि मौजूद रहे।