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बिजली उपभोक्ताओं को झुलसाएगी निजीकरण की आंच
Updated Tue, 27 Mar 2018 02:43 AM IST
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मेरठ। प्रदेश कैबिनेट द्वारा दी गई पांच शहरों की बिजली के निजीकरण को हरी झंडी के बाद मामला गरमाता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से प्रदेश भर में चल रहे बिजली कर्मियों के दो घंटे का कार्य बहिष्कार मंगलवार को पूरे दिन का रहेगा। इस दौरान प्रदेश के सभी अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। हड़ताल के चलते फाल्ट भी अटैंड नहीं होंगे। इसके चलते लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है। हालांकि पीवीवीएनएल एमडी आशुतोष निरंजन ने परेशानी से बचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कराने की बात कही है।
प्रदेश सरकार ने आगरा के बाद मेरठ, गोरखपुर, बनारस, मुरादाबाद और लखनऊ आदि शहरों की बिजली को निजी हाथों में देने का निर्णय लिया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति इसका कड़ा विरोध कर रही है। पिछले एक सप्ताह से प्रदेश के बिजली कर्मी शाम तीन बजे से पांच बजे तक दो घंटे कार्य बहिष्कार कर अपना विरोध जता रहे हैं। मंगलवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रदेशभर में टूल डाउन हड़ताल की जाएगी। सघंर्ष समिति के नेता आईपी सिंह और अनिल कुमार सिंह ने बताया कि पीवीवीएनएल के सभी कर्मी सुबह साढ़े दस बजे ऊर्जा भवन के गेट पर इकट्ठा होकर धरना देंगे। धरना शाम पांच बजे तक दिया जाएगा।
रूटीन फाल्ट नहीं होंगे ठीक
हड़ताल के चलते रूटीन फाल्ट ठीक नहीं हो सकेंगे। इसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि पीवीवीएनएल एमडी आशुतोष निरंजन का कहना है कि उन्होंने इसके लिए इंतजाम कर लिया है। ठेकेदारों के जरिये रूटीन फाल्ट ठीक कराए जाएंगे। संघर्ष समिति ने भी इमरजेंसी फाल्ट को अटैंड करने का आश्वासन दिया है। बिजलीघरों पर भूतपूर्व सैनिक कल्याण निगम कर्मी पहले से ही तैनात हैं।
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दो घंटे दिया धरना
रोजाना की तरह सोमवार को भी बिजली कर्मचारियों ने शाम तीन से पांच बजे तक कार्य बहिष्कार कर ऊर्जा भवन गेट पर धरना दिया। अधीक्षण अभियंता आईपी सिंह व अनिल कुमार सिंह ने कहा कि जब तक सरकार अपने फैसले को वापस नहीं लेगी तब तक विद्युत कर्मी चैन से नहीं बैठेंगे।
गांधीगिरी के जरिये होगा आंदोलन
अनिल कुमार सिंह ने बताया कि आंदोलन गांधीगिरी के जरिये किया जाएगा। कर्मचारी शांत तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाएंगे। भारी राजस्व देेने वाले शहरों की बिजली का निजीकरण सही नहीं है। कर्मचारियों ने विभाग को अपनी मेहनत के बल पर खड़ा किया है। इसे निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा।
प्रदेश सरकार ने आगरा के बाद मेरठ, गोरखपुर, बनारस, मुरादाबाद और लखनऊ आदि शहरों की बिजली को निजी हाथों में देने का निर्णय लिया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति इसका कड़ा विरोध कर रही है। पिछले एक सप्ताह से प्रदेश के बिजली कर्मी शाम तीन बजे से पांच बजे तक दो घंटे कार्य बहिष्कार कर अपना विरोध जता रहे हैं। मंगलवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रदेशभर में टूल डाउन हड़ताल की जाएगी। सघंर्ष समिति के नेता आईपी सिंह और अनिल कुमार सिंह ने बताया कि पीवीवीएनएल के सभी कर्मी सुबह साढ़े दस बजे ऊर्जा भवन के गेट पर इकट्ठा होकर धरना देंगे। धरना शाम पांच बजे तक दिया जाएगा।
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रूटीन फाल्ट नहीं होंगे ठीक
हड़ताल के चलते रूटीन फाल्ट ठीक नहीं हो सकेंगे। इसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि पीवीवीएनएल एमडी आशुतोष निरंजन का कहना है कि उन्होंने इसके लिए इंतजाम कर लिया है। ठेकेदारों के जरिये रूटीन फाल्ट ठीक कराए जाएंगे। संघर्ष समिति ने भी इमरजेंसी फाल्ट को अटैंड करने का आश्वासन दिया है। बिजलीघरों पर भूतपूर्व सैनिक कल्याण निगम कर्मी पहले से ही तैनात हैं।
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दो घंटे दिया धरना
रोजाना की तरह सोमवार को भी बिजली कर्मचारियों ने शाम तीन से पांच बजे तक कार्य बहिष्कार कर ऊर्जा भवन गेट पर धरना दिया। अधीक्षण अभियंता आईपी सिंह व अनिल कुमार सिंह ने कहा कि जब तक सरकार अपने फैसले को वापस नहीं लेगी तब तक विद्युत कर्मी चैन से नहीं बैठेंगे।
गांधीगिरी के जरिये होगा आंदोलन
अनिल कुमार सिंह ने बताया कि आंदोलन गांधीगिरी के जरिये किया जाएगा। कर्मचारी शांत तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाएंगे। भारी राजस्व देेने वाले शहरों की बिजली का निजीकरण सही नहीं है। कर्मचारियों ने विभाग को अपनी मेहनत के बल पर खड़ा किया है। इसे निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा।