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नौ दिन में एक हजार करोड़ का फटका
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Fri, 18 Nov 2016 02:37 AM IST
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पर कैश लेने के लिए लगी लाइन।
- फोटो : अमर उजाला
पुराने बड़े नोट बंद होने के नौ दिन बाद भी मुसीबत बढ़ती जा रही है। बैंकों में लाइन नहीं टूट रही तो व्यापार पूरी तरह ठप्प हो चुका है। शहर में ही अकेले इन नौ दिनों में करीब एक हजार करोड़ का व्यापार प्रभावित हो चुका है।
सराफा व्यापार सूना
नोटबंदी के बाद सबसे बड़ा झटका सराफा कारोबार को लगा है। शादियों के सीजन में लोग पैसे के अभाव में ज्वैलरी नहीं खरीद पा रहे हैं। ऊपर से सेंट्रल एक्साइज और आयकर विभाग की सराफा कारोबारियों पर अलग से नजर है। शादी सीजन में औसतन 50 लाख रुपये रोजाना का कारोबार इस बाजार में सिमटकर रह गया है। इन नौ दिन में यहां नौ नवंबर को तो कुछ बिक्री हुई, लेकिन उसके बाद से पूरी तरह सन्नाटा है। सराफा व्यापारी सिर्फ अपने विश्वास के जान पहचान वाले लोगों को ही उधार में ज्वैलरी दे रहे हैं।
कोट
बैंकों से पैसों की निकासी पूरी तरह सामान्य हो जाये तो सराफा कारोबार चल सकता है। लेकिन फिलहाल स्थिति वास्तव में बहुत ही चिंताजनक है।- दिनेश रस्तोगी, अध्यक्ष सराफा व्यापार संघ
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कपड़ा व्यापार ठंडा
शहर में कपड़े के पचास से ज्यादा बड़े शो रूम और 500 से ज्यादा दुकानें हैं। लेकिन इस समय सभी जगह सन्नाटा है। शादी सीजन में रेडीमेड गारमेंट्स के ब्रांडेड और नानब्रांडेड शोरूमों में भी जहां ग्राहकों की भीड़ लग जाती थी, वहां लगाया गया नया माल मुंह चिढ़ा रहा है। कपड़ा व्यापारियों की मानें तो बाजार ठंडा है। सर्दियां शुरू होने के साथ ही शादी सीजन में अच्छी सेल होती है, लेकिन इस बार पिछली बार की तुलना में दस प्रतिशत भी सेल नहीं रह गयी है।
लोगों के पास पैसे हों, तभी तो कपड़ा खरीदेंगे। पहले अपने खाने पीने की जरूरत को पूरा करें या कपड़ा खरीदें। शादी सीजन में भी कारोबार पूरी तरह ठप ही है।- नवनीत गर्ग, कपड़ा व्यापारी
ये दोनों बाजार ठप
शहर में इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम का बड़ा बाजार है। लेकिन तमाम दुकानदार इस समय खाली बैठे हुए हैं। शादियों के सीजन में फ्रिज, एलईडी, माइक्रोवेव, मोबाइल फोन, एसी, साउंड सिस्टम आदि तमाम आइटम की अच्छी बिक्री होती है। लेकिन इस बार कारोबार में करीब 50 प्रतिशत गिरावट आ चुकी है।
यह सही है कि व्यापार गिर रहा है, लेकिन पिछले दो दिन से कुछ सुधार हुआ है। फिर भी बैंक से पैसे की निकासी की लिमिट बढ़ानी होगी।- मुकुल सिंघल, अध्यक्ष मेरठ इलेक्ट्रॉनिक व्यापार संघ
किराना व्यापारी भी खाली
सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि किराना व्यापारी भी लगभग खाली बैठे हैं। लोग सिर्फ बेहद जरूरत का सामान ही खरीद रहे हैं। ऐसे में किराना व्यापार भी 50 प्रतिशत तक गिर चुका है। फुटकर विक्रेताओं के अलावा किराना के थोक व्यापारी भी हैं, उनका माल भी गोदामों में पड़ा हुआ है। हापुड़ रोड किराना व्यापार संघ के अध्यक्ष पवन गर्ग के अनुसार किराना व्यापारी खाली बैठे हैं।
ट्रांसपोर्टरों को भी झटका
बैंक के लेनदेन के नए नियम से ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। एक दिन में मात्र पांच हजार रुपये निकालने की बंदिश ने ट्रकों के चक्केे रोक दिए हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि माल लेकर दूसरे प्रदेशों में आने-जाने वाले ट्रक चालक को काफी कैश देना पड़ता है। लेकिन बैंक जब पैसा ही नहीं दे रहे हैं तो ट्रक कहां से भेजें।
हमने तो इस संबंध में डीएम से लेकर वित्त मंत्री को भी ज्ञापन भेजा है कि ट्रांसपोर्टरों को अलग से पैसे निकालने की सुविधा दी जाये। लेकिन कुछ नहीं हुआ और ट्रकों के पहिये लगभग जाम हैं।- गौरव शर्मा, अध्यक्ष मेरठ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
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सराफा व्यापार सूना
नोटबंदी के बाद सबसे बड़ा झटका सराफा कारोबार को लगा है। शादियों के सीजन में लोग पैसे के अभाव में ज्वैलरी नहीं खरीद पा रहे हैं। ऊपर से सेंट्रल एक्साइज और आयकर विभाग की सराफा कारोबारियों पर अलग से नजर है। शादी सीजन में औसतन 50 लाख रुपये रोजाना का कारोबार इस बाजार में सिमटकर रह गया है। इन नौ दिन में यहां नौ नवंबर को तो कुछ बिक्री हुई, लेकिन उसके बाद से पूरी तरह सन्नाटा है। सराफा व्यापारी सिर्फ अपने विश्वास के जान पहचान वाले लोगों को ही उधार में ज्वैलरी दे रहे हैं।
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कोट
बैंकों से पैसों की निकासी पूरी तरह सामान्य हो जाये तो सराफा कारोबार चल सकता है। लेकिन फिलहाल स्थिति वास्तव में बहुत ही चिंताजनक है।- दिनेश रस्तोगी, अध्यक्ष सराफा व्यापार संघ
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कपड़ा व्यापार ठंडा
शहर में कपड़े के पचास से ज्यादा बड़े शो रूम और 500 से ज्यादा दुकानें हैं। लेकिन इस समय सभी जगह सन्नाटा है। शादी सीजन में रेडीमेड गारमेंट्स के ब्रांडेड और नानब्रांडेड शोरूमों में भी जहां ग्राहकों की भीड़ लग जाती थी, वहां लगाया गया नया माल मुंह चिढ़ा रहा है। कपड़ा व्यापारियों की मानें तो बाजार ठंडा है। सर्दियां शुरू होने के साथ ही शादी सीजन में अच्छी सेल होती है, लेकिन इस बार पिछली बार की तुलना में दस प्रतिशत भी सेल नहीं रह गयी है।
लोगों के पास पैसे हों, तभी तो कपड़ा खरीदेंगे। पहले अपने खाने पीने की जरूरत को पूरा करें या कपड़ा खरीदें। शादी सीजन में भी कारोबार पूरी तरह ठप ही है।- नवनीत गर्ग, कपड़ा व्यापारी
ये दोनों बाजार ठप
शहर में इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम का बड़ा बाजार है। लेकिन तमाम दुकानदार इस समय खाली बैठे हुए हैं। शादियों के सीजन में फ्रिज, एलईडी, माइक्रोवेव, मोबाइल फोन, एसी, साउंड सिस्टम आदि तमाम आइटम की अच्छी बिक्री होती है। लेकिन इस बार कारोबार में करीब 50 प्रतिशत गिरावट आ चुकी है।
यह सही है कि व्यापार गिर रहा है, लेकिन पिछले दो दिन से कुछ सुधार हुआ है। फिर भी बैंक से पैसे की निकासी की लिमिट बढ़ानी होगी।- मुकुल सिंघल, अध्यक्ष मेरठ इलेक्ट्रॉनिक व्यापार संघ
किराना व्यापारी भी खाली
सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि किराना व्यापारी भी लगभग खाली बैठे हैं। लोग सिर्फ बेहद जरूरत का सामान ही खरीद रहे हैं। ऐसे में किराना व्यापार भी 50 प्रतिशत तक गिर चुका है। फुटकर विक्रेताओं के अलावा किराना के थोक व्यापारी भी हैं, उनका माल भी गोदामों में पड़ा हुआ है। हापुड़ रोड किराना व्यापार संघ के अध्यक्ष पवन गर्ग के अनुसार किराना व्यापारी खाली बैठे हैं।
ट्रांसपोर्टरों को भी झटका
बैंक के लेनदेन के नए नियम से ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। एक दिन में मात्र पांच हजार रुपये निकालने की बंदिश ने ट्रकों के चक्केे रोक दिए हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि माल लेकर दूसरे प्रदेशों में आने-जाने वाले ट्रक चालक को काफी कैश देना पड़ता है। लेकिन बैंक जब पैसा ही नहीं दे रहे हैं तो ट्रक कहां से भेजें।
हमने तो इस संबंध में डीएम से लेकर वित्त मंत्री को भी ज्ञापन भेजा है कि ट्रांसपोर्टरों को अलग से पैसे निकालने की सुविधा दी जाये। लेकिन कुछ नहीं हुआ और ट्रकों के पहिये लगभग जाम हैं।- गौरव शर्मा, अध्यक्ष मेरठ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन