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पानी की कमी, धान पर आफत
mau news
Updated Mon, 09 Oct 2017 11:12 PM IST
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मऊ। कम बारिश होने से खेती किसानी पर संकट गहराने लगा है। तेज धूप से खेतों से नमी तेजी से गायब होती जा रही है। इससे धान की फसल पर विपरीत असर पड़ रहा है। अगेती फसल फूट रही है। लेट वेराइटी की फसल रेड़ा पर है। ऐसे में फसलों को ज्यादा पानी की आवश्यकता है। लेकिन न तो माइनरों में भरपूर पानी आ रहा है और न ही बारिश हो रही है। सिंचाई के अभाव मेें फसलों में झुलसा सहित कई रोगों का भी प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है।
जिले में 2477 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। धान की खेती व्यापक पैमाने पर की जाती है। मौसम प्रतिकूल होने से किसानों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। कड़ी धूप से खेतों की नमी तेजी से गायब हो रही है। अघोषित बिजली कटौती से जहां नलकूप शो पीस साबित हो रहे हैं। वहीं अधिकांश माइनरों में टेल तक पानी ही नहीं पहुंच रहा है।दूसरे प्रकृति ने भी किसानों से मुंह मोड़ लिया है। सूखे की वजह से धान की फसलों में झुलसा रोग लगने लगा हैं। अगेती धान की फसल फूट गई है तो लेट वेेराइटी की धान की रेड़ा पर है। ऐसे में फसलों को ज्यादा पानी की आवश्यकता है। सिंचाई के अभाव में फसल पर असर पड़ने की चिंता किसानों का सताने लगी है।
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो फसलों में झुलसा रोग, सीट प्लाइट का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है इस रोग पर किसी दवा के छिड़काव का भी कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। पानी के अभाव तथा झुलसा रोग के बढ़ते प्रभाव से किसानों की जान सांसत में है। इस संबंध में रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के किसान श्रीकांत यादव, सत्यराम सिंह का कहना है कि किसी तरह से धान की फसल में रेड़ा आया तो अब रोग लगने लगा है। समझ में नहीं आ रहा है। गुड्डू सिंह, महेंद्र यादव का कहना है कि लाख जतन के बाद धान की फसल फूटने की स्थिति में आई तो अब तरह-तरह के रोग लगने लगा है। धान की पत्ती सूख रही है। पत्ती काली पड़ जा रही है। इस बाबत जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि किसान धान के खेतों में नमी बनाए रखें। रोग लगने की स्थिति में कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर रासायनिक दवाओं का छिड़काव कराएं।
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इनसेट
15 से 20 प्रतिशत उत्पादन प्रभावित होने की आशंका
मऊ। धान की खेती 88 हजार हेक्टेयर में खेती की गई है। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार मौसम अनुकूल होने की स्थिति में प्रति हेक्टेयर लगभग 30 से40 कुंतल उत्पादन होता है। मौसम ऐसे ही बरकरार रहा तो 15 से 20 प्रतिशत की कमी हो सकती है। 08 अक्तूबर तक 315 मिमी बारिश हुई है। जबकि गत वर्ष 500 मिमी बारिश हुई थी। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि किसानों की तरफ से सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग संज्ञान में है। प्रक्रिया चल रही है। प्रक्रिया पूरी होने पर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
इनसेट
बारिश न होने से फसलें रोगग्रस्त
पिपरीडीह। बारिश न होने से क्षेत्र के खरगजेपुर,भार,पिपरीडीह, रैकवारेडीह सहित विभिन्न इलाकों में इस समय धान की फसल में तरह-तरह के रोग लगने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही है। भार गांव के किसान रामविलास मौर्य ने बताया कि धान की फसल को झुलसा,खैरा तथा पत्ती लपेटक रोग ने जकड़ लिया है। रैकवारेडीह के सुधाकर पांडेय ने बताया कि सफेद रोग पत्तियों का सूखा धब्बा आदि रोग धान की फसल में लग गया है। इसी क्रम में पिपरीडीह के हीरा राम, खरगजेपुर के सुनील सिंह का कहना है कि धान की फसल मे खैरा रोग बालियो में सफेद रोग लग गया है। दवा का छिड़काव करने पर भी असर नहीं दिख रहा है।
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जिले में 2477 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। धान की खेती व्यापक पैमाने पर की जाती है। मौसम प्रतिकूल होने से किसानों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। कड़ी धूप से खेतों की नमी तेजी से गायब हो रही है। अघोषित बिजली कटौती से जहां नलकूप शो पीस साबित हो रहे हैं। वहीं अधिकांश माइनरों में टेल तक पानी ही नहीं पहुंच रहा है।दूसरे प्रकृति ने भी किसानों से मुंह मोड़ लिया है। सूखे की वजह से धान की फसलों में झुलसा रोग लगने लगा हैं। अगेती धान की फसल फूट गई है तो लेट वेेराइटी की धान की रेड़ा पर है। ऐसे में फसलों को ज्यादा पानी की आवश्यकता है। सिंचाई के अभाव में फसल पर असर पड़ने की चिंता किसानों का सताने लगी है।
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कृषि विशेषज्ञों की मानें तो फसलों में झुलसा रोग, सीट प्लाइट का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है इस रोग पर किसी दवा के छिड़काव का भी कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। पानी के अभाव तथा झुलसा रोग के बढ़ते प्रभाव से किसानों की जान सांसत में है। इस संबंध में रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के किसान श्रीकांत यादव, सत्यराम सिंह का कहना है कि किसी तरह से धान की फसल में रेड़ा आया तो अब रोग लगने लगा है। समझ में नहीं आ रहा है। गुड्डू सिंह, महेंद्र यादव का कहना है कि लाख जतन के बाद धान की फसल फूटने की स्थिति में आई तो अब तरह-तरह के रोग लगने लगा है। धान की पत्ती सूख रही है। पत्ती काली पड़ जा रही है। इस बाबत जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि किसान धान के खेतों में नमी बनाए रखें। रोग लगने की स्थिति में कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर रासायनिक दवाओं का छिड़काव कराएं।
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15 से 20 प्रतिशत उत्पादन प्रभावित होने की आशंका
मऊ। धान की खेती 88 हजार हेक्टेयर में खेती की गई है। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार मौसम अनुकूल होने की स्थिति में प्रति हेक्टेयर लगभग 30 से40 कुंतल उत्पादन होता है। मौसम ऐसे ही बरकरार रहा तो 15 से 20 प्रतिशत की कमी हो सकती है। 08 अक्तूबर तक 315 मिमी बारिश हुई है। जबकि गत वर्ष 500 मिमी बारिश हुई थी। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि किसानों की तरफ से सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग संज्ञान में है। प्रक्रिया चल रही है। प्रक्रिया पूरी होने पर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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बारिश न होने से फसलें रोगग्रस्त
पिपरीडीह। बारिश न होने से क्षेत्र के खरगजेपुर,भार,पिपरीडीह, रैकवारेडीह सहित विभिन्न इलाकों में इस समय धान की फसल में तरह-तरह के रोग लगने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही है। भार गांव के किसान रामविलास मौर्य ने बताया कि धान की फसल को झुलसा,खैरा तथा पत्ती लपेटक रोग ने जकड़ लिया है। रैकवारेडीह के सुधाकर पांडेय ने बताया कि सफेद रोग पत्तियों का सूखा धब्बा आदि रोग धान की फसल में लग गया है। इसी क्रम में पिपरीडीह के हीरा राम, खरगजेपुर के सुनील सिंह का कहना है कि धान की फसल मे खैरा रोग बालियो में सफेद रोग लग गया है। दवा का छिड़काव करने पर भी असर नहीं दिख रहा है।