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घ्राघरा का जलस्तर खतरा बिंदु के समीप पहुंचने को आतुर
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दोहरीघाट (मऊ)। घाघरा के जलस्तर में अचानक वृद्धि हो जाने से तटवर्ती इलाकों में लोगों में चिंता व्याप्त हो गई है। गौरीशंकर घाट पर 24 घण्टा पहले घाघरा का जलस्तर 68.80 मीटर था। शनिवार को सायंकाल नदी का जलस्तर 69 मीटर 20 सेंटीमीटर पहुंच गया। 24 घंटा में 40 सेंटीमीटर घाघरा का जलस्तर बढ़ना भीषण खतरे का संकेत दे रहा है। जलस्तर के बढ़ने की यही गति रही तो 48 घंटों के भीतर खतरा बिंदु को पार सकती है।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार नेपाल ने डेढ़ लाख क्यूसक पानी नदी में छोड़ा है। इधर एक हफ्ते से लगातार बारिश होने से नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी होने लगी है। नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में लोगों में दहशत का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि यदि घाघरा का जलस्तर स्थिर नहीं हुआ तो नदी भारी तबाही मचा सकती है।
गौरीशंकर घाट पर नदी का खतरा बिंदु 69.90 मीटर है। घाघरा खतरा बिंदु से 70 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। फिर भी नदी का दबाव बढ़ता जा रहा है। इससे लोगों में चिंता बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि नदी इसी रफ्तार से बढ़ती रही ताक अधिकतम दो दिनों में खतरा बिंदु पार कर जाएगी। नदी के किनारे मुक्तिधाम, श्मशान घाट, भारत माता मंदिर, डोमराज का मकान, वृद्ध आश्रम, गौरी शंकर घाट, जानकी घाट, आदि जगह अति संवेदनशील हैं। जानकी घाट के समीप नदी बैक रोलिंग कर रही है, जिससे सुरक्षा में लगाया गये बोल्डरों पर दबाव बढ़ने लगा है।
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भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार नेपाल ने डेढ़ लाख क्यूसक पानी नदी में छोड़ा है। इधर एक हफ्ते से लगातार बारिश होने से नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी होने लगी है। नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में लोगों में दहशत का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि यदि घाघरा का जलस्तर स्थिर नहीं हुआ तो नदी भारी तबाही मचा सकती है।
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गौरीशंकर घाट पर नदी का खतरा बिंदु 69.90 मीटर है। घाघरा खतरा बिंदु से 70 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। फिर भी नदी का दबाव बढ़ता जा रहा है। इससे लोगों में चिंता बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि नदी इसी रफ्तार से बढ़ती रही ताक अधिकतम दो दिनों में खतरा बिंदु पार कर जाएगी। नदी के किनारे मुक्तिधाम, श्मशान घाट, भारत माता मंदिर, डोमराज का मकान, वृद्ध आश्रम, गौरी शंकर घाट, जानकी घाट, आदि जगह अति संवेदनशील हैं। जानकी घाट के समीप नदी बैक रोलिंग कर रही है, जिससे सुरक्षा में लगाया गये बोल्डरों पर दबाव बढ़ने लगा है।
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