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शिव के जलाभिषेक लिए सजकर तैयार हो गए मंदिर
mau news
Updated Fri, 07 Jul 2017 11:21 PM IST
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गौरीशंकर मंदिर स्थित शिवलिंग की सफाई करते पुजारी।
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मऊ। सावन माह शिव की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस वर्ष संयोग से सावन माह की शुरुआत ही सोमवार से हो रही है। यह एक दुर्लभ संयोग माना जा रहा है। इसलिए शिवभक्त पहले ही दिन के शिव जलाभिषेक के लिए संकल्पित दिख रहे हैं। जिले के सभी शिवमंदिरों की साफ सफाई से लेकर ,श्रद्धालुओं के जलाभिषेक करने,भीड़ को नियंत्रित करने , कांवरियों की सेवा के लिए सेवाकारों की नियुक्तियां करने की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। कई सेवासमितियों ने कावंरियों की सुविधा के लिए 24 घंटे भंडारे ,चाय नाश्ता की व्यवस्था कर रखी है। पुलिस प्रशासन ने भी हाइवे से आने वाले कांवरियों की सुरक्षा के लिए दिशा निर्देश जारी कर दिया है।
सच्चे मन से की प्रार्थना होती है फलदाई
कोपागंज स्थित प्राचीन गौरीशंकर मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि यहां पर मंदिर के गर्भ गृह में स्थित शिवलिंग की स्थापना किसी ने नहीं कराई है अपितु यह स्वयं प्रकट हुआ है। कहा जाता है कि लगभग 700 वर्ष पूर्व पिथौरागढ़ नरेश इधर से अपनी सेना के साथ गुजर हरे थे। कुछ देर विश्राम करने के लिए इसी गौरीशंकर मंदिर के प्रांगण में रुके। उस समय यह मंदिर परिसर जंगलों और झाड़ से ढका हुआ था।
उसी समय राजा को स्वप्न में मंदिर के अंदर शिवलिंग ढके होने की जानकारी हुई। राजा से स्थानीय लोगों से मंदिर की साफ सफाई कराने के लिए सहयोग मांगा। लेकिन कोई आगे नहीं आया। तब कुपित होकर उन्होंने श्राप दिया कि वे कभी आगे नही बढ़ेंगे जैसेहै वैसे ही रहोगे। इसी का परिणाम है आज भी स्थानीय लोगो की अपेक्षा बाहरी लोगो नेयहां आकर ज्यादा विकास किया। राजा ने अपने राज्य पिथौरागढ़ से धन मगाकर इस मन्दिर की साफ सफाई कराया और सफाई के दौरान गर्भगृह में नीचे दबे शिवलिंग का पता चला। राजा ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। इस मंदिर की विशेषता यह है कि इसका गर्भ गृह हर मौसम में वातानुकूलित रहता है। सावन माह भर लोग बनारस और गाजीपुर मारकंडेय जी के धाम के पास से गंगाजल लाकर भगवान भोले का जलाभिषेक करतेे हैं।
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ऐसी मान्यता है कि मंदिर में आकर सच्चे मन से की प्रार्थना फलदाई होती है और लोगों के मनेेरथ पूर्ण होते हैं। इसी प्रकार नौसेमर के पास तमसा तट के किनारे स्थित बारहदुअरिया शिव मंदिर की काफी महत्ता है। यूं तो यहां पूरे वर्ष भर श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहता है लेकिन सावन महीने पर यहां गंगाजल से जलाभिषेक करने वाले शिवभक्तों की भारी भीड़ रहती है। कावंरिये बाबा को गंगाजल चढ़ाते हैं। प्रत्येक सोमवार को यहां तिल रखने की भी जगह नहीं रहती है। सावन के प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालु यहां पर सत्यनारायण कथा श्रवण करके पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। इसी प्रकार लैरो दोनवार में स्थित प्राचीन शिवमंदिर पर भी पूरे सावन माह में शिवभक्त पूरी आस्था से जलाभिषेक करते हैं। मधुबन के पांती दोहरीघाट और गोंठा के शिवमंदिरों की काफी महत्ता है।
कांवरिये जलाभिषेक के लिए रवाना
जिले भर से कांवरियों के जत्थे बाबा धाम के लिए जाने की तैयारियां कर लिए हैं। इसके लिए श्रद्धालुओं ने बसों, चार पहिया छोटे वाहनों से बाबाधाम जाने के लिए बुक कर लिया है। कावंरियों के कई जत्थे सावन के पहले ही दिन बाबा के जलाभिषेक के उद्देश्य से रवाना हो चुके हैं।
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सच्चे मन से की प्रार्थना होती है फलदाई
कोपागंज स्थित प्राचीन गौरीशंकर मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि यहां पर मंदिर के गर्भ गृह में स्थित शिवलिंग की स्थापना किसी ने नहीं कराई है अपितु यह स्वयं प्रकट हुआ है। कहा जाता है कि लगभग 700 वर्ष पूर्व पिथौरागढ़ नरेश इधर से अपनी सेना के साथ गुजर हरे थे। कुछ देर विश्राम करने के लिए इसी गौरीशंकर मंदिर के प्रांगण में रुके। उस समय यह मंदिर परिसर जंगलों और झाड़ से ढका हुआ था।
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उसी समय राजा को स्वप्न में मंदिर के अंदर शिवलिंग ढके होने की जानकारी हुई। राजा से स्थानीय लोगों से मंदिर की साफ सफाई कराने के लिए सहयोग मांगा। लेकिन कोई आगे नहीं आया। तब कुपित होकर उन्होंने श्राप दिया कि वे कभी आगे नही बढ़ेंगे जैसेहै वैसे ही रहोगे। इसी का परिणाम है आज भी स्थानीय लोगो की अपेक्षा बाहरी लोगो नेयहां आकर ज्यादा विकास किया। राजा ने अपने राज्य पिथौरागढ़ से धन मगाकर इस मन्दिर की साफ सफाई कराया और सफाई के दौरान गर्भगृह में नीचे दबे शिवलिंग का पता चला। राजा ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। इस मंदिर की विशेषता यह है कि इसका गर्भ गृह हर मौसम में वातानुकूलित रहता है। सावन माह भर लोग बनारस और गाजीपुर मारकंडेय जी के धाम के पास से गंगाजल लाकर भगवान भोले का जलाभिषेक करतेे हैं।
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ऐसी मान्यता है कि मंदिर में आकर सच्चे मन से की प्रार्थना फलदाई होती है और लोगों के मनेेरथ पूर्ण होते हैं। इसी प्रकार नौसेमर के पास तमसा तट के किनारे स्थित बारहदुअरिया शिव मंदिर की काफी महत्ता है। यूं तो यहां पूरे वर्ष भर श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहता है लेकिन सावन महीने पर यहां गंगाजल से जलाभिषेक करने वाले शिवभक्तों की भारी भीड़ रहती है। कावंरिये बाबा को गंगाजल चढ़ाते हैं। प्रत्येक सोमवार को यहां तिल रखने की भी जगह नहीं रहती है। सावन के प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालु यहां पर सत्यनारायण कथा श्रवण करके पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। इसी प्रकार लैरो दोनवार में स्थित प्राचीन शिवमंदिर पर भी पूरे सावन माह में शिवभक्त पूरी आस्था से जलाभिषेक करते हैं। मधुबन के पांती दोहरीघाट और गोंठा के शिवमंदिरों की काफी महत्ता है।
कांवरिये जलाभिषेक के लिए रवाना
जिले भर से कांवरियों के जत्थे बाबा धाम के लिए जाने की तैयारियां कर लिए हैं। इसके लिए श्रद्धालुओं ने बसों, चार पहिया छोटे वाहनों से बाबाधाम जाने के लिए बुक कर लिया है। कावंरियों के कई जत्थे सावन के पहले ही दिन बाबा के जलाभिषेक के उद्देश्य से रवाना हो चुके हैं।