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Mau News: स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों का आय नया स्रोत

Tue, 21 Nov 2023 09:41 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 21 Nov 2023 09:41 PM IST
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Strawberry cultivation new source of income for farmers
मऊ। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की ओर से संचालित कृषि विज्ञान केंद्र पिल्खी के वैज्ञानिकों ने मंगलवार को जनपद में स्ट्रॉबेरी की खेती को प्रोत्साहित करने का अभियान चलाया। इसके तहत, कृषि वैज्ञानिकों ने स्ट्रॉबेरी का प्रदर्शन इकाई स्थापित किया है।
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केंद्र के प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर विनय सिंह ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती कर किसान अपनी खेती में आय का एक नया स्रोत जोड़ सकते हैं। केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉक्टर जितेंद्र कुमार कुशवाहा ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए रोपाई का समय अक्टूबर से लेकर नवंबर तक है। इसके लिए स्ट्रॉबेरी के रनर से तैयार किए गए पौधे की रोपाई 90 सेंटीमीटर चौड़ी और 6 इंच ऊंचाई वाले बेड पर करते हैं, जिसमें पौधे से पौधे की दूरी 30 सेंटीमीटर तथा लाइन से लाइन की दूरी 40 से 45 सेंटीमीटर रखते हैं। दो बेड के बीच में 30 से 40 सेमी चौड़ी नाली बनाते हैं। जनपद में स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए इसकी प्रजाति विंटर डाॅन उपयुक्त है।
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केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. लाल पंकज सिंह ने बताया कि फसल को खरपतवार से बचाने के लिए 100 गेज की पॉलिथीन से बेड की मल्चिंग कर देते हैं। पॉलिथीन के स्थान पर पुआल की मल्चिंग से भी अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। डॉक्टर अंगद प्रसाद ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की फसल में ज्यादा उर्वरकों की आवश्यकता नहीं होती है। रोपाई से पूर्व मृदा में 10 टन गोबर की अच्छे तरीके से सड़ी हुई खाद मिला देते हैं।
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डॉक्टर हिमांशु राय ने बताया कि प्रति एकड़ फसल उत्पादन में लगभग एक लाख 25 हजार रुपये का व्यय आता है तथा लगभग तीन लाख रुपये की आय प्राप्त हो सकती है। इस फसल में जनवरी से मार्च तक उत्पादन प्राप्त होता रहता है। डॉक्टर चंदन सिंह ने बताया की फसल में ह्युमिक एसिड का छिड़काव 2 मिलीलीटर प्रति लीटर की दर से रोपाई के 10 दिन बाद एवं दूसरा 35 से 40 दिन बाद करने से पौधे की वृद्धि अच्छी और उत्पादन ज्यादा होता है।
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