मऊ। सरकार ध्यान दे तो खुरहट पंप कैनाल की हालत सुधर सकती है। यह नहर हजारों एकड़ खेती को हराभरा कर सकती है। लेकिन उपेक्षा के चलते यह खस्ताहाल है। नहर की साफ सफाई न होने से साढे सात किलोमीटर नहर अब महज डेढ़ किलोमीटर में सिमट कर रह गई है। नहर की सिंचाई क्षमता साढ़े सात सौ वर्ग हेक्टेएयर क्षेत्रफल थी लेकिन अब यह काफी कम हो गई है। इस नहर से पहले साढ़े सात किलोमीटर की लंबाई में पानी जाता था। लेकिन सरकार, जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की उपेक्षा के चलते अब इसका पानी महज एक किलोमीटर के दायरे में ही रह जाता है। नहर में तीन मोटर पंप लगे हैं। एक मोटर नदी के पानी की सतह के पास लगा है जो पानी को चैनल में पहुंचाता है। इसके ऊपर चैनल से नहर में पहुंचाने के लिए के लिए दो मोटरपंप लगे हैं जो बारी बारी से चलाए जाते हैं। लेकिन यह पंप प्राय: खराब रहते हैं। नहर का मुख्यालय जौनपुर होने से इसका संचालन वहीं से किया जाता है। किसान सूर्यभान यादव, रामप्रताप, राम लखन, जयप्रकाश, राम देव, उदयभान, देवनाथ ने बताया कि क्षेत्र से एक कैबिनेट मंत्री, दो विधान परिषद सदस्य और एक विधायक हैं, अगर ये जनप्रतिनिधि चाहें तो नहर का कायाकल्प हो सकता है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र कुमार सरोज ने बताया कि खुरहट पंप कैनाल में पानी तमसा नदी से पंपों से लिफ्ट करके भेजा जाता है। यह नहर मैकेनिकल इंजीनियर जौनपुर के कार्य क्षेत्र में है। लिहाजा यहां से कुछ नहीं किया जा सकता।