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सहालग के मौसम में बढ़ी जाम की समस्या
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मऊ। इन दिनों शादी विवाह का मौसम चल रहा है। शादियों में बारातियों के तरफ से वाहनों के लंबे काफिले ले जाने का प्रचलन बढ़ा है। जिनके पास चार पहिया वाहन है वह भी अपने चार पहिया कार से शादियों में पहुंचना चाहता हैं यूं कहें कि शादियों में वाहनों की काफी संख्या स्टेटस सिंबल बन गया है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। लोगों का यह शौक जाम की समस्या को जन्म दे रहा है।
शादियों में वर और कन्या दोनों ही पक्षों के लोग अधिक से अधिक वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं। इनके आलावा कन्या पक्ष से निमंत्रण में शामिल होने वाले भी कारों से ही पहुंचते हैं। चूंकि इन दिनों ग्राम पंचायत चुनाव चल रहे हैं इसलिए भावी प्रत्याशी भी अपनी कारों से निमंत्रण में पहुंचते हैं।
वैसे इन दिनों कारोना संक्रमण काल भले ही चल रहा हो लेकिन बारातों में वाहनों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है। इसलिए कस्बों और बाजारों में इन काफिलों के पहुुंचते ही सड़कों पर जाम लग जा रहा है। लोग बारातों में जरूरत से अधिक संख्या में कारों के काफिले ले जा रहे हैं। यदि शादी शहर अथवा कस्बे में होती है तो वाहनों की संख्या और अधिक हो जा रही है। क्यों कि शहरों में होने वाली शादियों में वर पक्ष और कन्या पक्ष के लोग अधिकांश वाहनों से पहुंचते हैं। ये शादियां मैरेज हालों में होती हैं जो सड़कों के ही किनारे बने होते हैं। इन शादी घरों के अंदर वाहनों के पार्क करने की जगह नहीं होती लिहाजा वाहन सड़क की पटरियों पर ही खड़े होते हैं। स्थिति यह होती है कि शादी घरों के आस पास घंटों जाम लग जाता है। कभी कभी जाम हटवाने के लिए कोई ट्रैफिक पुलिस भी नहीं होती।
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समाजसेवियों की प्रतिक्रिया: इस संबंध में समाज सेवी ताजापुर निवासी बागीश पांडेय कहते हैं कि शादियों में बारातों में जरूरत भर ही वाहन ले जाने चाहिए। अधिक वाहन बारात में ले जाने के दिखावे से बचना चाहिए। बकवल निवासी लालबहादुर सिंह का कहना है कि यूं तो वर पक्ष अथवा कन्या पक्ष से बारातों में काफी संख्या में लोगों का जाना फिजूलखर्ची के अलावा कुछ भी नहीं है। लोगों को इस प्रवृत्ति पर स्वयं ही अंकुश लगाना चाहिए।
अछार निवासी रमतेश यादव कहते हैं कि लोगों को अपनी सोच में बदलाव लाना चाहिए। िफजूलखर्ची से बचना चाहिए। इसके अलावा शादियों में जरूरत से अधिक वाहनों को बुलाकर जाम जैसी समस्या को जन्म देने से बचना चाहिए।
मिश्रपुरा निवासी सुजीत कुमार का कहना है कि शादियों में जरूरत के हिसाब से वाहनों का प्रयोग करना चाहिए। इससे जहां एक तरफ फिजूलखर्ची बढ़ेगी, वहीं दूसरी तरफ जाम जैसी समस्याओं से निजात मिलेगी।
इस बाबत यातायात प्रभारी संतोष यादव का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों और कर्मचारियों की सहायता से यथा संभव जाम की समस्या पैदा न होने देने का प्रयास किया जाता है। लोगों को भी अपनी सोच में बदलाव लाते हुए शादियों में दिखावे के लिए वाहनों को ले जाने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए।
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शादियों में वर और कन्या दोनों ही पक्षों के लोग अधिक से अधिक वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं। इनके आलावा कन्या पक्ष से निमंत्रण में शामिल होने वाले भी कारों से ही पहुंचते हैं। चूंकि इन दिनों ग्राम पंचायत चुनाव चल रहे हैं इसलिए भावी प्रत्याशी भी अपनी कारों से निमंत्रण में पहुंचते हैं।
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वैसे इन दिनों कारोना संक्रमण काल भले ही चल रहा हो लेकिन बारातों में वाहनों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है। इसलिए कस्बों और बाजारों में इन काफिलों के पहुुंचते ही सड़कों पर जाम लग जा रहा है। लोग बारातों में जरूरत से अधिक संख्या में कारों के काफिले ले जा रहे हैं। यदि शादी शहर अथवा कस्बे में होती है तो वाहनों की संख्या और अधिक हो जा रही है। क्यों कि शहरों में होने वाली शादियों में वर पक्ष और कन्या पक्ष के लोग अधिकांश वाहनों से पहुंचते हैं। ये शादियां मैरेज हालों में होती हैं जो सड़कों के ही किनारे बने होते हैं। इन शादी घरों के अंदर वाहनों के पार्क करने की जगह नहीं होती लिहाजा वाहन सड़क की पटरियों पर ही खड़े होते हैं। स्थिति यह होती है कि शादी घरों के आस पास घंटों जाम लग जाता है। कभी कभी जाम हटवाने के लिए कोई ट्रैफिक पुलिस भी नहीं होती।
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समाजसेवियों की प्रतिक्रिया: इस संबंध में समाज सेवी ताजापुर निवासी बागीश पांडेय कहते हैं कि शादियों में बारातों में जरूरत भर ही वाहन ले जाने चाहिए। अधिक वाहन बारात में ले जाने के दिखावे से बचना चाहिए। बकवल निवासी लालबहादुर सिंह का कहना है कि यूं तो वर पक्ष अथवा कन्या पक्ष से बारातों में काफी संख्या में लोगों का जाना फिजूलखर्ची के अलावा कुछ भी नहीं है। लोगों को इस प्रवृत्ति पर स्वयं ही अंकुश लगाना चाहिए।
अछार निवासी रमतेश यादव कहते हैं कि लोगों को अपनी सोच में बदलाव लाना चाहिए। िफजूलखर्ची से बचना चाहिए। इसके अलावा शादियों में जरूरत से अधिक वाहनों को बुलाकर जाम जैसी समस्या को जन्म देने से बचना चाहिए।
मिश्रपुरा निवासी सुजीत कुमार का कहना है कि शादियों में जरूरत के हिसाब से वाहनों का प्रयोग करना चाहिए। इससे जहां एक तरफ फिजूलखर्ची बढ़ेगी, वहीं दूसरी तरफ जाम जैसी समस्याओं से निजात मिलेगी।
इस बाबत यातायात प्रभारी संतोष यादव का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों और कर्मचारियों की सहायता से यथा संभव जाम की समस्या पैदा न होने देने का प्रयास किया जाता है। लोगों को भी अपनी सोच में बदलाव लाते हुए शादियों में दिखावे के लिए वाहनों को ले जाने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए।