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Mau News: स्थायी रैन बसेरे में लगा ताला, अस्थायी की जानकारी ही नहीं
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मऊ। जिले में नगरपालिका की ओर से शहर के बीचोबीच तीन रैन बसेरा बनाया गया है, लेकिन इसका प्रचार प्रसार करना जिम्मेदार भूल गए। हालत यह है कि नगरपालिका की ओर से बेहतर सुविधा देने के बाद भी रैनबसेरे में जरूरतमंद नहीं जा रहे हैं। वहीं, कोपागंज नगर पंचायत में बना स्थायी रैन बसेरे से अब तक ताला लगा हुआ है। इसको लेकर शिकायत के बाद भी जिम्मेदारों पर कोई फक्र नहीं पड़ा।
नगरपालिका की ओर से हर वर्ष रेलवे, बस स्टेशन के अलावा अस्पताल सहित जिले में आने वाले बाहर से जरूरतमंद के साथ नगर के जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचाव को लेकर नगर में हर साल अस्थाई रैन बसेरा बनाया जाता है। इस बार भी बीते वर्ष की भांति जिला अस्पताल परिसर के अंदर इमरजेंसी के पास एक भवन को रैन बसेरा बनाया गया है। यहां पांच महिला और दस पुरुष के अलावा विकल्प के तौर पर पांच अन्य लोगों के रुकने की व्यवस्था है।
बीते 29 नवंबर से यहां रैन बसेरा संचालित हो रहा है। जहां बीते बुधवार तक 150 लोग पहुंचे हैं। इसमें बाहर से 80 फीसदी लोग तो जिला अस्पताल में मरीज के साथ आने वाले लोग हैं। रैन बसेरे के बारे में सूचना सीमित होने के चलते बाहर के लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं हो पाती है। यहीं हाल नगर के ब्रम्हस्थान स्थित रैन बसेरा की है। यहां भी बेहद कम लोग पहुंच पा रहे हैं। वहीं, नगर के बीचोबीच मऊ डिपो के परिसर में बने अस्थाई रैन बसेरा जिसकी क्षमता 16 है। यहां जरूरतमंद के पहुंचने वाले लोगों की संख्या दोनों रैन बसेरा से बेहतर है।
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यहां बीते 28 नवंबर से बुधवार तक 227 लोग ठहर चुके है। यहां रोजाना दस से ज्यादा जरूरतमंद लोगों द्वारा आश्रय लिया जा रहा है। इसकी मुख्य वजह है इसका परिसर के अगले हिस्से में संचालित होने के साथ यहां रैन बसेरा बने होने की जानकारी स्थानीय लोगों द्वारा प्रचारित करने की।
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नगरपालिका की ओर से हर वर्ष रेलवे, बस स्टेशन के अलावा अस्पताल सहित जिले में आने वाले बाहर से जरूरतमंद के साथ नगर के जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचाव को लेकर नगर में हर साल अस्थाई रैन बसेरा बनाया जाता है। इस बार भी बीते वर्ष की भांति जिला अस्पताल परिसर के अंदर इमरजेंसी के पास एक भवन को रैन बसेरा बनाया गया है। यहां पांच महिला और दस पुरुष के अलावा विकल्प के तौर पर पांच अन्य लोगों के रुकने की व्यवस्था है।
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बीते 29 नवंबर से यहां रैन बसेरा संचालित हो रहा है। जहां बीते बुधवार तक 150 लोग पहुंचे हैं। इसमें बाहर से 80 फीसदी लोग तो जिला अस्पताल में मरीज के साथ आने वाले लोग हैं। रैन बसेरे के बारे में सूचना सीमित होने के चलते बाहर के लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं हो पाती है। यहीं हाल नगर के ब्रम्हस्थान स्थित रैन बसेरा की है। यहां भी बेहद कम लोग पहुंच पा रहे हैं। वहीं, नगर के बीचोबीच मऊ डिपो के परिसर में बने अस्थाई रैन बसेरा जिसकी क्षमता 16 है। यहां जरूरतमंद के पहुंचने वाले लोगों की संख्या दोनों रैन बसेरा से बेहतर है।
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यहां बीते 28 नवंबर से बुधवार तक 227 लोग ठहर चुके है। यहां रोजाना दस से ज्यादा जरूरतमंद लोगों द्वारा आश्रय लिया जा रहा है। इसकी मुख्य वजह है इसका परिसर के अगले हिस्से में संचालित होने के साथ यहां रैन बसेरा बने होने की जानकारी स्थानीय लोगों द्वारा प्रचारित करने की।