इंदारा। मौलाना हामिद अंसारी ने कहा कि रोजा सब्र का नाम है। हमें रमजान के पाक महीने में एक-दूसरे के साथ मुहब्बत का पैगाम देकर इंसानियत मजबूत करनी चाहिए। रोजा रखें, नमाज पढ़ें, इससे ईमान मजबूत होता है। गरीबों को खाना खिलाकर हम दुआएं हासिल करें। कहा कि रमजान का यही मकसद और पैगाम है कि सब मुहब्बत और भाईचारे के साथ रहें। सिर्फ खाने-पीने का ही परहेज नहीं है, बल्कि गलत बोलने और सुनने पर भी पाबंदी है। अल्लाह और उसके प्यारे नबी हजरत मुहम्मद पर यकीन रखते हुए हमें रोजे रखने चाहिए। मौलाना ने कहा कि रोजे रखने का असल मकसद महज भूख-प्यास बर्दाश्त करना नहीं है। बल्कि नफ्स पर काबू, अल्लाह के तरीके पर अकीदत और सही राह पर चलना है। कहा कि रोजे के दौरान झूठ बोलने, चुगली करने, किसी पर बुरी निगाह डालने एवं हर छोटी से छोटी बुराई से दूर रहना जरूरी है। उन्होंने बताया कि रमजान के मायने संपन्न लोगों को भूख-प्यास का अहसास कराकर पूरी कौम को अल्लाह ताआला के करीब लाकर नेक राह पर डालना है। इस पाक माह में ही कुरान शरीफ उतारी गई। माहे रमजान को तीन हिस्सों (अशरों) में बांटा गया है। पहले दस दिनों में अल्लाह अपने रोजेदार बंदों पर रहमतों की बारिश करता हैं। दूसरे अशरे में गुनाह माफ करता है और तीसरे अशरे में दोजख की आग से निजात देता है। रमजान न सिर्फ रहमतों और बरकतों की बारिश करता है। बल्कि समूची इंसानी कौम को प्यार, भाईचारे और इंसानियत का भी पैगाम देता है।