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चार डाक्टर ही देख रहे थे मरीज, बाकी गायब
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बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में सुबह 9.37 बजे बंद कई चिकित्सकों के कक्ष।
- फोटो : MAU
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जब कारोना चरम पर था तो उस समय जिला अस्पताल की ओपीडी में सन्नाटा पसरा था। लेकिन धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुुई और अस्पताल खुलने लगा। लेकिन मरीजों को अभी भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। डॉक्टरों का अभी भी ओपीडी में न आना मरीजों को खल रहा। इंतजार करना उनकी मजबूरी है। कुछ ऐसा ही नजारा अमर उजाला टीम को बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में देखने को मिला। चार डॉक्टरों को छोड़ कर अन्य डाक्टर लापता रहे और मरीज उनका इंतजार करते रहे। थक हार कर कुछ तो वापस चले गए और कुछ निजी अस्पतालों की ओर रवाना हुए।
अमर उजाला की टीम नौ बजे जिला अस्पताल पहुंच गई। तब तक एक भी चिकित्सक ओपीडी में नहीं आए थे। सफाई कर्मी साफ सफाई कर रहे थे। मुख्य गेट पर आगंतुुकों की थर्मल स्क्रीनिंग की जो व्यवस्था की गई वह नहीं दिखी। 9:44 बजे बगल में स्थित हेल्पडेस्क सेंटर और आयुष्मान मित्र कक्ष में ताला बंद था। 9:45 बजे पंजीकरण काउंटर खुला था। उसमें कर्मचारी राम बचन यादव बैठा था लेकिन मरीज ही नहीं आए थे। 9:46 बजे दवा वितरण कक्ष में ताला बंद रहा। 9:48 बजे अस्थि रोग विभाग में संविदा चिकित्सक डा. भीम सिंह बैठे थे। लेकिन प्लास्टर कक्ष गंदगी से भरा पडा था। 9:50 बजे ईसीजी कक्ष बंद था। एआरबी कक्ष सूना पड़ा था। सामने सर्जन डा. चौधरी राकेश का कक्ष खुला था लेकिन उनकी कुर्सी खाली थी। फिजियोथिरेपी और ईसीजी सेंटर में ताला बंद था। 9:35 बजे डा. अनवर अब्बास अपने कक्ष में बैठे। नेत्र विभाग में 9:40 बजे अशोक कुमार एक सहकर्मी के साथ बैठे थे और अपने कक्ष में डा. एमके पांडेय भी बैठे थे। पैथालाजी खुली थी, दो कर्मचारी भी आए थे। एक्सरे विभाग भी खुला था, दो कर्मचारी आए थे। डा. आरआर चौहान अपने कक्ष में बैठे थे। लेकिन डा. आरके गुप्त, डा. एमपी सिंह, डा. शैलेश कुशवाहा, डा एपी गुप्त अपने कक्ष में नहीं थे। डा. सीएस साहनी अपने कक्ष में मौजूद रहे। दस बजे तक कार्यालय नहीं खुला था। डा. बीबी सिंह इमरजेंसी ड्युटी कर रहे थे। प्रथम तल पर दंत विभाग में डा. सीपी आर्य बैठे थे। सामने पार्क में भर गया था पानी:
मऊ। सदर अस्पताल के ठीक सामने स्थित पार्क में फूल पौधे तो लगे थे लेकिन रात में हुई वारिस का पानी आधा फीट तक लगा हुआ था।
आयुष अस्पताल में बंद रहा ताला:
मऊ। परिसर में आयुष अस्पताल है। उसमें 10 बजे तक ताला बंद रहा। कोई डाक्टर अथवा फार्मासिस्ट नहीं आए थे। दो तीन मरीज आयुष अस्पताल खुलने का इंतजार कर रहे थे।
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इनसेट:
नहीं हो रहा था एंटीजन टेस्ट:
मऊ। एंटीजन टेस्ट कराने के लिए कई लोग भटक रहे थे। लेकिन अभी तक एंटीजेन टेस्ट करने वाले कर्मचारी आए ही नहीं थे।
खुला था होम्योपैथिक अस्पताल
मऊ। सदर अस्पताल परिसर स्थित जिला होम्योपैथिक अस्पताल खुला था। अस्पताल में आने वाले मरीजों को डा. नम्रता श्रीवास्तव देख रही थीं।
सीटी स्केन सेंटर के सामने स्ट्रेचर पर पड़ा था मरीज, नहीं हो रही थी जांच:
मऊ। सीटी स्केन सेंटर खुला था लेकिन कर्मचारी एक महिला कर्मी अंदर बैठी हुई थी। दो अन्य पुरुष कर्मचारी अभी नहीं आए थे। सामने एक स्ट्रेचर पर गंभीर हालत में एक महिला मरीज लेटी थी। उसके परिजन परेशान थे। एक दलाल मरीज के परिजनों को समझाने की जुगत करता नजर आया।
मैं आठ बजे ही अस्पताल आ गया था, इनडोर में साफ सफाई और वार्डों में भर्ती मरीजों का हाल चाल ले रहा था। अस्पताल के छह डाक्टर कोरोना संक्रमित हो गए हैं। कुछ देरी से आए हैं। उनको समय से आने के लिए चेतावनी दी गई है। कुुछ डाक्टर वार्डों में भर्ती मरीजों को देखने के लिए राउंड कर रहे थे। अस्पताल में सभी तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं।
- डॉ. बृज कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
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अमर उजाला की टीम नौ बजे जिला अस्पताल पहुंच गई। तब तक एक भी चिकित्सक ओपीडी में नहीं आए थे। सफाई कर्मी साफ सफाई कर रहे थे। मुख्य गेट पर आगंतुुकों की थर्मल स्क्रीनिंग की जो व्यवस्था की गई वह नहीं दिखी। 9:44 बजे बगल में स्थित हेल्पडेस्क सेंटर और आयुष्मान मित्र कक्ष में ताला बंद था। 9:45 बजे पंजीकरण काउंटर खुला था। उसमें कर्मचारी राम बचन यादव बैठा था लेकिन मरीज ही नहीं आए थे। 9:46 बजे दवा वितरण कक्ष में ताला बंद रहा। 9:48 बजे अस्थि रोग विभाग में संविदा चिकित्सक डा. भीम सिंह बैठे थे। लेकिन प्लास्टर कक्ष गंदगी से भरा पडा था। 9:50 बजे ईसीजी कक्ष बंद था। एआरबी कक्ष सूना पड़ा था। सामने सर्जन डा. चौधरी राकेश का कक्ष खुला था लेकिन उनकी कुर्सी खाली थी। फिजियोथिरेपी और ईसीजी सेंटर में ताला बंद था। 9:35 बजे डा. अनवर अब्बास अपने कक्ष में बैठे। नेत्र विभाग में 9:40 बजे अशोक कुमार एक सहकर्मी के साथ बैठे थे और अपने कक्ष में डा. एमके पांडेय भी बैठे थे। पैथालाजी खुली थी, दो कर्मचारी भी आए थे। एक्सरे विभाग भी खुला था, दो कर्मचारी आए थे। डा. आरआर चौहान अपने कक्ष में बैठे थे। लेकिन डा. आरके गुप्त, डा. एमपी सिंह, डा. शैलेश कुशवाहा, डा एपी गुप्त अपने कक्ष में नहीं थे। डा. सीएस साहनी अपने कक्ष में मौजूद रहे। दस बजे तक कार्यालय नहीं खुला था। डा. बीबी सिंह इमरजेंसी ड्युटी कर रहे थे। प्रथम तल पर दंत विभाग में डा. सीपी आर्य बैठे थे। सामने पार्क में भर गया था पानी:
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मऊ। सदर अस्पताल के ठीक सामने स्थित पार्क में फूल पौधे तो लगे थे लेकिन रात में हुई वारिस का पानी आधा फीट तक लगा हुआ था।
आयुष अस्पताल में बंद रहा ताला:
मऊ। परिसर में आयुष अस्पताल है। उसमें 10 बजे तक ताला बंद रहा। कोई डाक्टर अथवा फार्मासिस्ट नहीं आए थे। दो तीन मरीज आयुष अस्पताल खुलने का इंतजार कर रहे थे।
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नहीं हो रहा था एंटीजन टेस्ट:
मऊ। एंटीजन टेस्ट कराने के लिए कई लोग भटक रहे थे। लेकिन अभी तक एंटीजेन टेस्ट करने वाले कर्मचारी आए ही नहीं थे।
खुला था होम्योपैथिक अस्पताल
मऊ। सदर अस्पताल परिसर स्थित जिला होम्योपैथिक अस्पताल खुला था। अस्पताल में आने वाले मरीजों को डा. नम्रता श्रीवास्तव देख रही थीं।
सीटी स्केन सेंटर के सामने स्ट्रेचर पर पड़ा था मरीज, नहीं हो रही थी जांच:
मऊ। सीटी स्केन सेंटर खुला था लेकिन कर्मचारी एक महिला कर्मी अंदर बैठी हुई थी। दो अन्य पुरुष कर्मचारी अभी नहीं आए थे। सामने एक स्ट्रेचर पर गंभीर हालत में एक महिला मरीज लेटी थी। उसके परिजन परेशान थे। एक दलाल मरीज के परिजनों को समझाने की जुगत करता नजर आया।
मैं आठ बजे ही अस्पताल आ गया था, इनडोर में साफ सफाई और वार्डों में भर्ती मरीजों का हाल चाल ले रहा था। अस्पताल के छह डाक्टर कोरोना संक्रमित हो गए हैं। कुछ देरी से आए हैं। उनको समय से आने के लिए चेतावनी दी गई है। कुुछ डाक्टर वार्डों में भर्ती मरीजों को देखने के लिए राउंड कर रहे थे। अस्पताल में सभी तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं।
- डॉ. बृज कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल