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Mau News: नौ महीने पहले सील अस्पताल में इलाज के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत
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रतनपुरा ब्लॉक क्षेत्र में पंजीकरण के बगैर संचालित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान जच्चा-बच्चा की बीते मंगलवार को मौत हो गई। अस्पताल को नवंबर 2025 में सील किया गया था। इसके बावजूद वहां मरीजों को भर्ती कर इलाज चल रहा था। मामला सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग दुबारा अस्पताल को सील कर अब उसके संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। सील अस्पताल को चोरी छिपे संचालित किए जाने का दो महीने के अंदर यह तीसरा मामला है।
सीएमओ को दी गई शिकायत में बलिया जिले के नगरा थाना क्षेत्र के तरगौली गांव निवासी अजीत राजभर ने बताया है कि उनकी गर्भवती पत्नी सरिता को डॉक्टर को दिखाने के लिए गांव की आशा कार्यकर्ता ने उनसे संपर्क कर रतनपुरा स्थित इंद्रजीत अस्पताल में ले जाने की बात कही।
गांव की आशा कार्यकर्ता होने के चलते वे उस पर विश्वास कर पत्नी को लेकर बीते आठ अगस्त को सुबह 7 बजे इंद्रजीत अस्पताल पहुंचे। यहां मौजूद डॉक्टर हिमांशू यादव ने पत्नी की हालत गंभीर बताते हुए भर्ती कर ऑपरेशन करने की बात कही।
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शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के बाद जीवित बच्चा पैदा हुआ, लेकिन पत्नी को ब्लीडिंग लगातार होती रही। इस बीच बच्चे ने दम तोड़ दिया, जबकि पत्नी की हालत गंभीर होने पर अस्पताल के डॉक्टर इलाज से पीछे हट गए। इसके बाद वे मजबूरी में पत्नी को लेकर जिला मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचे। वहां उनकी पत्नी की हालत गंभीर बताते हुए डॉक्टरों ने वाराणसी रेफर कर दिया। इसके बाद जब वह पत्नी को लेकर वाराणसी के एक निजी अस्पताल पहुंचे तो वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
उधर, इस घटना के बाद अजीत ने संबंधित आशा कार्यकर्ता के साथ अस्पताल के डॉक्टर हिमांशू यादव को लेकर सीएमओ के यहां शिकायत की। इस संबंध में सीएमओ डॉ. पंकज राय का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। इंद्रजीत अस्पताल को पहले सील किया गया था। उसे फिर से संचालित करने पर अस्पताल को दुबारा सील कर अब प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
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सीएमओ को दी गई शिकायत में बलिया जिले के नगरा थाना क्षेत्र के तरगौली गांव निवासी अजीत राजभर ने बताया है कि उनकी गर्भवती पत्नी सरिता को डॉक्टर को दिखाने के लिए गांव की आशा कार्यकर्ता ने उनसे संपर्क कर रतनपुरा स्थित इंद्रजीत अस्पताल में ले जाने की बात कही।
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गांव की आशा कार्यकर्ता होने के चलते वे उस पर विश्वास कर पत्नी को लेकर बीते आठ अगस्त को सुबह 7 बजे इंद्रजीत अस्पताल पहुंचे। यहां मौजूद डॉक्टर हिमांशू यादव ने पत्नी की हालत गंभीर बताते हुए भर्ती कर ऑपरेशन करने की बात कही।
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शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के बाद जीवित बच्चा पैदा हुआ, लेकिन पत्नी को ब्लीडिंग लगातार होती रही। इस बीच बच्चे ने दम तोड़ दिया, जबकि पत्नी की हालत गंभीर होने पर अस्पताल के डॉक्टर इलाज से पीछे हट गए। इसके बाद वे मजबूरी में पत्नी को लेकर जिला मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचे। वहां उनकी पत्नी की हालत गंभीर बताते हुए डॉक्टरों ने वाराणसी रेफर कर दिया। इसके बाद जब वह पत्नी को लेकर वाराणसी के एक निजी अस्पताल पहुंचे तो वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
उधर, इस घटना के बाद अजीत ने संबंधित आशा कार्यकर्ता के साथ अस्पताल के डॉक्टर हिमांशू यादव को लेकर सीएमओ के यहां शिकायत की। इस संबंध में सीएमओ डॉ. पंकज राय का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। इंद्रजीत अस्पताल को पहले सील किया गया था। उसे फिर से संचालित करने पर अस्पताल को दुबारा सील कर अब प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।