घोसी। नगर के बड़ागांव स्थित अलमदार हुसैन के अजाखाने से बृहस्पतिवार की रात ताबूत और अलम का जुलूस निकाला गया। रास्तेभर अजादार या हुसैन की दर्द भरी सदाएं बुलंद कर रहे थे। इससे पूर्व हुई मजलिस में उलेमा ने कर्बला के मसाएल बयान किए। अंजुमनों ने नौहा मातम किया। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मुन्तजिर अब्बास ने कहा कि ये जुलूस औन और मोहम्मद की याद में निकाला जाता है जो कि हजरत मोहम्मद साहब की नवासी जैनब के साहबजादे थे। कर्बला में जब एक एक कर सब असहाबो अंसार शहीद हो रहे थे तब जैनब अपने बच्चों को बुलाती है और कहती हैं कि ऐ औनो मोहम्मद जाओ मामू इमाम हुसैन से जंग की इजाजत लो और अपनी जान नाना के दीन पे क़ुर्बान कर दो। जैनब ने भी इमाम हुसैन से बच्चों को जंग की इजाजत मांगती हैं जिसस पर उन्हें इजाजत मिल जाती है। औनो मोहम्मद की जंग से यजीदी फ़ौज में भगदड़ मच जाती है और फ़ौज भागने लगती है। उधर, फ़ौज की बिगड़ती हालत उमरे साद ने देखी तो फ़ौज से इन दोनों को अलग करने को कहा और उन्हें धोखे से अलग कर हमला कर दिया। दोनों भाई जख़्मी होकर घोड़े से जमीन पर गिर जाते है और उनकी रूप परवाज कर जाती है। जुलूस में मोहम्मद शरीफ, इश्तेयाक हुसैन, शहादत अली, जफर मेहदी, नजमुल हसन,अली रजा, तनवीर, बाकर रजा, फ़ैयाज शब्बर, जौन मोहम्मद,मोहम्मद अली, मजहर हुसैन,गुलाम अब्बास, मोहम्मद अब्बास, जावेद अख्तर, आदि उपस्थित रहे। उधर, मऊ के मलिक टोला के सैय्यद तौकीर हसन के सहन से अली असगर के झूले का जुलूस निकाला गया जिसमें अंजुमन बाबुल इल्म जाफरिया ने नौहाख्वानी व सीनाजनी पेश की जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होते हुए इमामबाड़ा मालिक टोला पहुँचा। मौलाना नसीमुल हसन साहब ने तकरीर पेश की। कार्यक्रम में ताजियेदार सैय्यद अली अंसर, इरफान अली, मंसूर खान, मकसूद अली, हैदर , तामीर, अली, मासूम, रजा, रिजवी, जावेद, आसिफ, शोएब आदि लोग मौजूद रहे।