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कायाकल्प योजना में शामिल होने से वंचित हो सकता है महिला जिला अस्तपताल
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मऊ। कायाकल्प योजना के अंतर्गत मंडल की तीन सदस्यीय टीम सोमवार को जिला अस्पताल तथा जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण कर सकती है। टीम अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर उसका रेटिंग तय करेगी। इसी के आधार पर तय होगा कि दोनों अस्पताल कायाकल्प योजना में शामिल हो सकते हैं अथवा नहीं।
जांच टीम योजना के तहत अस्पताल में साफ-सफाई, बायोमेडिकल वेस्ट, ओटी, वार्ड में बेहतर चिकित्सकीय सुविधाओं सहित आठ बिंदुओं पर भौतिक सत्यापन कर रेटिंग निर्धारित करेगी। अगर टीम द्वारा यहां अस्पताल की ग्रेडिंग 70 प्रतिशत से ज्यादा की जाती है तो अस्पताल योजना में शामिल हो जाता है। इसके बाद लखनऊ से आने वाली क्वालिटी टीम द्वारा असेसमेंट किया जाता है, जिसमें 75 प्रतिशत रेटिंग होने पर अस्पताल को कायाकल्प योजना में चिह्नित कर उसे पुरस्कृत किया जाता है। योजना के तहत मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल के चारों ओर बाउंड्रीवॉल भी बनी होनी चाहिए, बांउड्रीवॉल न बने होने पर अस्पताल योजना में चिह्नित नहीं हो सकता है। हालांकि यह टीम पर तय करेगा। पिछले साल 64 प्रतिशत रेटिंग पाने वाले महिला जिला अस्पताल के इस बार कायाकल्प योजना में शामिल होने की प्रबल उम्मीद है। इस बाबत सीएमएस डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि बाउंड्रीवॉल न होने से कायाकल्प योजना में रेटिंग पर असर पड़ सकता है। बांउड्रीवॉल बनाने को लेकर सदर एसडीएम को अवगत कराकर उनसे सीमाकंन की मांग की जा चुकी है, जिससे बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया जा सके।
इंसेट:
आठ बिंदुओं पर मूल्यांकन के बाद मिलती है रेटिंग
मऊ। केंद्र सरकार ने देश के जिला अस्पतालों की हालत सुधारने के लिए कायाकल्प योजना शुरू की थी। योजना के तहत अस्पतालों में मरीजों से जुड़ी सुविधाएं बढ़ाने और उनकी गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड बनाया है। इसमें आठ बिंदुओं पर अस्पताल का मूल्यांकन किया जाता है। इसके तहत अस्पताल में इलाज सुविधाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ, मरीज की संख्या के आधार पर रेटिंग तय की जाती है। इसके अलावा वेंटीलेटर, प्रति बेड डॉक्टर और नर्स की संख्या, ओटी इक्यूपमेंट, एयर फिल्टर, संक्रमण से बचाव, ऑपरेशन में प्रोटोकाल का पालन, मरीज को कितने समय में इलाज मिला यह भी देखा जाता है।
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जांच टीम योजना के तहत अस्पताल में साफ-सफाई, बायोमेडिकल वेस्ट, ओटी, वार्ड में बेहतर चिकित्सकीय सुविधाओं सहित आठ बिंदुओं पर भौतिक सत्यापन कर रेटिंग निर्धारित करेगी। अगर टीम द्वारा यहां अस्पताल की ग्रेडिंग 70 प्रतिशत से ज्यादा की जाती है तो अस्पताल योजना में शामिल हो जाता है। इसके बाद लखनऊ से आने वाली क्वालिटी टीम द्वारा असेसमेंट किया जाता है, जिसमें 75 प्रतिशत रेटिंग होने पर अस्पताल को कायाकल्प योजना में चिह्नित कर उसे पुरस्कृत किया जाता है। योजना के तहत मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल के चारों ओर बाउंड्रीवॉल भी बनी होनी चाहिए, बांउड्रीवॉल न बने होने पर अस्पताल योजना में चिह्नित नहीं हो सकता है। हालांकि यह टीम पर तय करेगा। पिछले साल 64 प्रतिशत रेटिंग पाने वाले महिला जिला अस्पताल के इस बार कायाकल्प योजना में शामिल होने की प्रबल उम्मीद है। इस बाबत सीएमएस डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि बाउंड्रीवॉल न होने से कायाकल्प योजना में रेटिंग पर असर पड़ सकता है। बांउड्रीवॉल बनाने को लेकर सदर एसडीएम को अवगत कराकर उनसे सीमाकंन की मांग की जा चुकी है, जिससे बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया जा सके।
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आठ बिंदुओं पर मूल्यांकन के बाद मिलती है रेटिंग
मऊ। केंद्र सरकार ने देश के जिला अस्पतालों की हालत सुधारने के लिए कायाकल्प योजना शुरू की थी। योजना के तहत अस्पतालों में मरीजों से जुड़ी सुविधाएं बढ़ाने और उनकी गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड बनाया है। इसमें आठ बिंदुओं पर अस्पताल का मूल्यांकन किया जाता है। इसके तहत अस्पताल में इलाज सुविधाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ, मरीज की संख्या के आधार पर रेटिंग तय की जाती है। इसके अलावा वेंटीलेटर, प्रति बेड डॉक्टर और नर्स की संख्या, ओटी इक्यूपमेंट, एयर फिल्टर, संक्रमण से बचाव, ऑपरेशन में प्रोटोकाल का पालन, मरीज को कितने समय में इलाज मिला यह भी देखा जाता है।
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