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Mau News: सीता विवाह पर गाए मंगल गीत

Fri, 26 Sep 2025 02:59 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 26 Sep 2025 02:59 AM IST
सार

दोहरीघाट, मधुबन, घोसी और मऊ में रामलीला के मंचन में सीता स्वयंवर, राम-वनगमन और राम-भरत मिलन जैसे प्रसंगों का जीवंत प्रस्तुतीकरण किया गया। राम-सीता विवाह, वनवास और भरत-राम के मिलन ने दर्शकों को भावुक कर दिया। दर्शकों की आंखें कई बार नम हो गईं।

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Mangal Geet sung on Sita's marriage
मधुबन के जजौली में रामलीला का मंचन करते कलाकार ।संवाद

विस्तार

दोहरीघाट। नगर पंचायत दोहरीघाट में चल रही रामलीला में सीता विवाह, परशुराम-लक्ष्मण संवाद सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। सीता विवाह पर महिलाओं ने मंगल गीत गाए।
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सीता स्वयंवर में राजा जनक के निमंत्रण पर विश्वामित्र राम, लक्ष्मण के साथ जनकपुर पहुंचे। जनकपुर में एक से बढ़कर एक राजा पहुंचे लेकिन शिव धनुष को तोड़ना तो दूर कोई हिला तक न पाया। विश्वामित्र के आदेश पर राम ने शिव धनुष जैसे ही उठाया, वह टूटकर दो हिस्सों में बंट गया। धनुष टूटते ही दर्शकों ने जयश्रीराम का उद्घोष किया। सीता ने राम के गले में वरमाला डाल दी। सीता विवाह पर महिलाओं ने मंगल गीत गाए शिव धनुष टूटने पर महेंद्र पर्वत पर तपस्या कर रहे परशुराम क्रोधित होकर जनकपुर पहुंचे। वहां परशुराम और लक्ष्मण का संवाद हुआ। अंत में राम के समझाने पर परशुराम चले गए। इस अवसर पर विनोद वर्मा राहुल जायसवाल गुलाब सोनकर उपस्थित रहे।
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शिव धनुष टूटते ही लगे जयकारे
अमिला। श्री ठाकुरद्वारा रामलीला समिति अमिला के तत्वावधान में बुधवार की रात रामलीला मंचन के तीसरे दिन सीता स्वयंवर सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। भगवान राम के धनुष तोड़ते ही दर्शकों के जयश्रीराम के उद्घोष से पूरा पंडाल गूंज उठा।
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मंचन की शुरुआत जनक दरबार से हुई, जहां राजा जनक ने अपनी प्रतिज्ञा दोहराई कि जो वीर भगवान शिव के धनुष को तोड़ेगा, वही सीता का वरण करेगा। एक-एक कर अनेक राजकुमारों ने प्रयास किया, पर कोई भी शिव धनुष को हिला तक नहीं सका। अंततः मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से सहज भाव से धनुष को उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही उसका मध्य भाग टूट गया। इस दृश्य पर पूरा पंडाल जयश्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। राम-सीता विवाह की प्रस्तुति देख दर्शक भाव विभोर हो गए। इसके बाद परशुराम और लक्ष्मण संवाद का मंचन हुआ। परशुराम की संवाद अदायगी और लक्ष्मण की प्रतिक्रियाओं को लोगों की सराहना मिली।
राम वन गमन का दृश्य देख दर्शकों की नम हुईं आंखें



मधुबन। प्राचीन रामलीला जजौली पशुरामपुर में बुधवार को तीसरे दिन की लीला का मंचन कैकेयी-मंथरा संवाद और राम वन गमन सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। राम वन गमन का दृश्य देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं। राम की बरात के जनकपुर से अयोध्या लौटने के साथ ही मंचन की शुरुआत हुई। कुछ दिनों बाद कैकेयी की दासी मंथरा ने उसे भरत के पक्ष में उकसाया और अयोध्या का राजपाट दिलाने का सुझाव दिया। कैकेयी और राजा दशरथ के बीच लंबे संवाद के बाद कैकेयी ने भरत के लिए अयोध्या का राजपाट और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। राजा दशरथ के आदेश पर राम वनवास के लिए तैयार होते हैं। राम के साथ लक्ष्मण और सीता भी वन जाने की जिद करते हैं। इस समाचार से अयोध्या वासी महल के बाहर इकट्ठा हो जाते हैं और राम के साथ चलने का निर्णय लेते हैं। तमसा नदी के तट पर रात्रि विश्राम के बाद राम-लक्ष्मण-सीता अयोध्या वासियों को छोड़ आगे बढ़ जाते हैं।
राम भरत संवाद सुन दर्शकों के सजल हो गए नेत्र



घोसी। आदर्श नगर पंचायत घोसी की पारंपरिक रामलीला के तीसरे दिन भरत मनावन सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। भरत अपने बड़े भाई श्रीराम को मना कर वापस अयोध्या लाने के लिए गुरु वशिष्ठ के साथ वन गए। श्रीराम से बहुत अनुनय विनय किया लेकिन श्रीराम ने पिता के बचन की मर्यादा को ध्यान में रख कर अयोध्या वापस जाने से मना कर दिया।
राम-भरत का प्रेम देखकर भाव विभोर
मऊ। श्रीरामलीला मेला समिति के तत्वावधान में नगर में रामलीला चल रही है। बृहस्पतिवार को बाबा बिहारी दास के मंदिर से चित्रकूट तक माता पोखरा पर दशरथ मरण, भरत का रामचंद्र जी से मिलने के लिए जुलूस प्रस्थान, लक्ष्मण रोष, राम-लक्ष्मण संवाद, भरत मनावन का मंचन किया गया। राम-भरत प्रेम देखकर दर्शक भाव विह्वल हो गए।



अयोध्यावासियों के साथ भरत, शत्रुघ्न जुलूस के रूप में गुरु वशिष्ठ के नेतृत्व मेंं चित्रकूट के लिए प्रस्थान करते हैं। जुलूस जब शृंगेश्वरपुर के समीप पहुंचता है। भरत के आने की खबर जब निषादराज को मिलती है तो उन्हें लगता है कि भरत के मन में कपट भाव है। इसलिए अपने लोगों से जुलूस को नदी तट पार न करने देने के लिए कहते हैं। साथ ही भरत से लड़ाई करने के निर्देश देते हैं। बुजुर्ग व्यक्तियों की सलाह पर भरत से मिलने के लिए जाते हैं। वहां भरत का प्रेम देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। इसके बाद भरत प्रयागराज पहुंचते हैं। यहीं उनकी भरद्वाज मुनि से मुलाकात होती है। उधर, भरत के आने की खबर पाकर लक्ष्मण नाराज हो जाते हैं। राम ने लक्ष्मण से कहा कि भरत सरीखा पुरुष सृष्टि में न तो देखा गया है और न ही सुना गया है। राम और भरत प्रेम देखकर दर्शक भाव विह्वल हो गए।
नगर की रामलीला में आज



श्री रामलीला मेला समिति मऊ की ओर से जयंत नेत्र वेधन, अत्रि अनुसूइया से भेंट, विराध राक्षस वध, सरभंग दाह, अगस्त्य मुनि मिलन, पंचवटी निवास का मंचन।
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