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खेल भावना की हुई पराजय
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Fri, 12 Dec 2014 11:19 PM IST
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का समापन आखिरकार राजनीति की भेंट चढ़ गया।
नगरपालिका की राजनीति कहें या फिर विरोधीतत्वों से खुन्नस, आखिरी मोड़ पर खेल भावना की ही पराजय हुई। मैच के दौरान आयोजक मंडल में शामिल कुछ लोग दर्शकों को आगे बैठने के लिए प्रोत्साहित करते देखे गए हैं।
बार-बार पुलिस के मना करने पर भी वह नहीं माने। नतीजा रहा कि हंगामे और विवाद के बीच समापन हुआ।
शुक्रवार को आरके स्टील मुंबई एवं जार्ज टेलीग्राफ कोलकाता की टीम के बीच हो रहे
फाइनल मैच को देखने के लिए हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी। स्टेडियम क्षमता से कई गुना अधिकर लगभग 60 हजारदर्शक मैच देखने पहुंच गए।
हाल यह रहा कि पीछे हो गए लोग मैदान की गतिविधियों से वंचित हो गए। मैदान में दर्शकों को घुसने से रोकने के लिए भी मुकम्मल व्यवस्था नहीं थी।
न ही बैरिकेडिंग सही से की गई न ही अन्य इंतजात दिखे। नाममात्र की बल्लियों के सहारे एक रस्सी का भ्रम खड़ा करके भीड़ को रोका गया।
ऊपर से आयोजक मंडल में शामिल कुछ लोग अपने खास लोगों को मैच देखने के लिए बैरिकेडिंग के अंदर की गैलरी के बाद बनी मार्किंग लाइन पर बैठने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे।
यही कारण था कि अन्य का भी मनोबल बढ़ गया। वे बार बार बैरिकेडिंग तोड़कर मार्किंग लाइन पर आकर बैठ जा रहे थे। इस बीच पुलिसकर्मियों के मना करने पर आयोजक मंडल का एक सदस्य पुलिस से ही उलझ गया।
यह देखकर भीड़ का उत्साह बढ़ गया और धीरे-धीरे पूरी भीड़ मार्किंग लाइन पर आकर खड़ी हो गई, इससे मैच कुछ देर के लिए रोक देना पड़ा।
हाफ टाइम के बाद आयोजक मंडल ने भीड़ से अनुरोध भी किया लेकिन सुनवाई नहीं हुई, लोग मार्किंग लाइन पर ही जमे रहे। माना जा रहा है खेल में राजनीति के के चलते आखिरी दिन फाइनल मैच में इस कदर बवाल हुआ।
इस संबंध में आयोजक मंडल के संयोजक अरशद जमाल का कहना है कि जो कुछ भी फाइनल मुकाबले में हुआ, अफसोस की बात है। उन्होंने मांग की कि जिला प्रशासन ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई करे।
नगरपालिका की राजनीति कहें या फिर विरोधीतत्वों से खुन्नस, आखिरी मोड़ पर खेल भावना की ही पराजय हुई। मैच के दौरान आयोजक मंडल में शामिल कुछ लोग दर्शकों को आगे बैठने के लिए प्रोत्साहित करते देखे गए हैं।
बार-बार पुलिस के मना करने पर भी वह नहीं माने। नतीजा रहा कि हंगामे और विवाद के बीच समापन हुआ।
शुक्रवार को आरके स्टील मुंबई एवं जार्ज टेलीग्राफ कोलकाता की टीम के बीच हो रहे
फाइनल मैच को देखने के लिए हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी। स्टेडियम क्षमता से कई गुना अधिकर लगभग 60 हजारदर्शक मैच देखने पहुंच गए।
हाल यह रहा कि पीछे हो गए लोग मैदान की गतिविधियों से वंचित हो गए। मैदान में दर्शकों को घुसने से रोकने के लिए भी मुकम्मल व्यवस्था नहीं थी।
न ही बैरिकेडिंग सही से की गई न ही अन्य इंतजात दिखे। नाममात्र की बल्लियों के सहारे एक रस्सी का भ्रम खड़ा करके भीड़ को रोका गया।
ऊपर से आयोजक मंडल में शामिल कुछ लोग अपने खास लोगों को मैच देखने के लिए बैरिकेडिंग के अंदर की गैलरी के बाद बनी मार्किंग लाइन पर बैठने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे।
यही कारण था कि अन्य का भी मनोबल बढ़ गया। वे बार बार बैरिकेडिंग तोड़कर मार्किंग लाइन पर आकर बैठ जा रहे थे। इस बीच पुलिसकर्मियों के मना करने पर आयोजक मंडल का एक सदस्य पुलिस से ही उलझ गया।
यह देखकर भीड़ का उत्साह बढ़ गया और धीरे-धीरे पूरी भीड़ मार्किंग लाइन पर आकर खड़ी हो गई, इससे मैच कुछ देर के लिए रोक देना पड़ा।
हाफ टाइम के बाद आयोजक मंडल ने भीड़ से अनुरोध भी किया लेकिन सुनवाई नहीं हुई, लोग मार्किंग लाइन पर ही जमे रहे। माना जा रहा है खेल में राजनीति के के चलते आखिरी दिन फाइनल मैच में इस कदर बवाल हुआ।
इस संबंध में आयोजक मंडल के संयोजक अरशद जमाल का कहना है कि जो कुछ भी फाइनल मुकाबले में हुआ, अफसोस की बात है। उन्होंने मांग की कि जिला प्रशासन ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई करे।