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शाही इमाम महफूजुर्रहमान सुपुर्द ए खाक
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Mon, 15 Jun 2015 12:03 AM IST
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शाही इमाम मौलाना महफूजुर्रहमान मिफताही के जनाजे की नमाज रविवार को चंडीसागर मोहल्ले की सहन में अदा की गई। जनाजे की नमाज में हजारों लोगों के साथ जनपद के विभिन्न हिस्सों के साथ ही कई जनपदों के साथ ही बाहर से मौलानाओं ने शिरकत की।
जनाजे में हिंदू-मुस्लिम की दीवार खत्म हो गई और दोनों वर्ग के लोगों ने पूरी शिद्दत से उन्हें शाही कटरा मस्जिद मस्जिद के बगल में मदरसा मिफताहुल ओलूम में दफन किया। जनाजे की नमाज उनके चाचा जफर अली ने पढ़ाई।
शाही मस्जिद कटरा के इमाम मौलाना महफूजुर्रहमान मिफताही का शनिवार को लंबी बीमारी के बाद लखनऊ के एक निजी हास्पिटल में इंतकाल हो गया था। वह 56 वर्ष के थे।
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उनका एक बेटा मौलवी मुहम्मद और दो अविवाहित बेटियां शाहेदा खातून एवं उम्मे हबीबा हैं। मौलाना काफी दिनों से सांस की बीमारी से जूझ रहे थे। पिछले दो माह से उन्हें नगर के शारदा नरायन हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार न होने पर लखनऊ के केजीएमसी हास्पिटल में भर्ती कराया गया था,
जहां शनिवार को उनका इंतकाल हो गया। उनका शव शनिवार की देर रात पैतृक स्थल पर लाया गया। उनके घर पर रात में ही हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। रविवार को उनके जनाजे की नमाज दो बजकर 15 मिनट पर अदा की गई। यहां से उनका शव लाखों लोगों की भीड़ के साथ मदरसा मिफताहुल ओलूम के लिए रवाना हुआ तो जन सैलाब उमड़ पड़ा। भीड़ उनकी एक आखिरी झलक पाने के लिए बेकाबू दिखी।
इसमें प्रशासन के लोगों को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। जनाजे के लिए नगरपालिका ने भी लाइट से लेकर, पेयजल सहित सफाई की व्यवस्था मुहैया कराई थी। मौलाना खुर्शीद अहमद ने कहा कि हम लोग मौलाना से धार्मिक व सामाजिक क्षेत्र के छोटे-बड़े सभी बिंदुओं पर समाधान करते थे।
उन्होंने नगर की शांति व्यवस्था एवं आपसी भाईचारे को बनाए रखने में सदैव शासन एवं प्रशासन का पूर्ण सहयोग किया। इसके लिए वह हमेशा याद किए जाएंगे।
उनके जनाजे के वक्त छोटे भाई मौलाना महमुदुल हसन, कारी जफर अली, मौलाना मसीहुर्रहमान, हाफिज अहमद जकी नक्शबंदी, हाजी फरीद, जुल्फेकार अहमद, सांसद सालिम अंसारी, पूर्व पालिकाध्यक्ष तैयब पालकी सहित लाखों लोग मौजूद रहे।
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जनाजे में हिंदू-मुस्लिम की दीवार खत्म हो गई और दोनों वर्ग के लोगों ने पूरी शिद्दत से उन्हें शाही कटरा मस्जिद मस्जिद के बगल में मदरसा मिफताहुल ओलूम में दफन किया। जनाजे की नमाज उनके चाचा जफर अली ने पढ़ाई।
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शाही मस्जिद कटरा के इमाम मौलाना महफूजुर्रहमान मिफताही का शनिवार को लंबी बीमारी के बाद लखनऊ के एक निजी हास्पिटल में इंतकाल हो गया था। वह 56 वर्ष के थे।
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उनका एक बेटा मौलवी मुहम्मद और दो अविवाहित बेटियां शाहेदा खातून एवं उम्मे हबीबा हैं। मौलाना काफी दिनों से सांस की बीमारी से जूझ रहे थे। पिछले दो माह से उन्हें नगर के शारदा नरायन हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार न होने पर लखनऊ के केजीएमसी हास्पिटल में भर्ती कराया गया था,
जहां शनिवार को उनका इंतकाल हो गया। उनका शव शनिवार की देर रात पैतृक स्थल पर लाया गया। उनके घर पर रात में ही हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। रविवार को उनके जनाजे की नमाज दो बजकर 15 मिनट पर अदा की गई। यहां से उनका शव लाखों लोगों की भीड़ के साथ मदरसा मिफताहुल ओलूम के लिए रवाना हुआ तो जन सैलाब उमड़ पड़ा। भीड़ उनकी एक आखिरी झलक पाने के लिए बेकाबू दिखी।
इसमें प्रशासन के लोगों को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। जनाजे के लिए नगरपालिका ने भी लाइट से लेकर, पेयजल सहित सफाई की व्यवस्था मुहैया कराई थी। मौलाना खुर्शीद अहमद ने कहा कि हम लोग मौलाना से धार्मिक व सामाजिक क्षेत्र के छोटे-बड़े सभी बिंदुओं पर समाधान करते थे।
उन्होंने नगर की शांति व्यवस्था एवं आपसी भाईचारे को बनाए रखने में सदैव शासन एवं प्रशासन का पूर्ण सहयोग किया। इसके लिए वह हमेशा याद किए जाएंगे।
उनके जनाजे के वक्त छोटे भाई मौलाना महमुदुल हसन, कारी जफर अली, मौलाना मसीहुर्रहमान, हाफिज अहमद जकी नक्शबंदी, हाजी फरीद, जुल्फेकार अहमद, सांसद सालिम अंसारी, पूर्व पालिकाध्यक्ष तैयब पालकी सहित लाखों लोग मौजूद रहे।