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सिंचाई के अभाव में मुरझाने लगे ज्यादातर पौधे

Wed, 13 Jul 2016 11:50 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ Updated Wed, 13 Jul 2016 11:50 PM IST
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in lack of irrigation the plants fade
पौधरोपण - फोटो : अमर उजाला
 एक दिन में पांच करोड़ पौधों का रोपण करके विश्व  रिकार्ड स्थापित करने के क्रम में फतहपुर मंडाव ब्लॉक क्षेत्र में वन विभाग द्वारा सोमवार को 397050 पौधों का रोपण कर तो दिया गया, लेकिन पौधों की सुरक्षा की केवल खानापूरी की जा रही है। हालांकि विभाग ढाई साल तक निगरानी करने का दावा कर रहा है।  हकीकत यह है कि पौधे सड़क  के किनारे जैसे तैसे गढ्ढे खोदकर केवल गाड़ दिए गए। अभियान के तीसरे दिन बुधवार को पौधों में पानी तक डालने  की जहमत नही उठायीं गयी।
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  फतहपुर मंडाव ब्लाक क्षेत्र में 12 अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न प्रजातियों के 39750 पौधों का रोपण किया गया है। पौधरोपण पर नजर डाला जाए तो फतेहपुर अलीपुर मार्ग,मधवापुर से कुंडा तक,मधवापुर से  अकोल्ही तक,कुशहां से हृदयपट्टी तक, शहीद मार्ग से गुरूम्हा तक,चन्दापार  नेमडांड़,सूरजपुर से हाहा नाला लिंक बंधे पर दल्लीपुर से गोबरही तक,तिघरा  हाहानाला बंधे तक समेत 12 अलग-अलग क्षेत्रों में कुल  पौधे शीशम सागौन,  पाकड़, अर्जुन गुटेल, पीपल सहित लगभग एक दर्जन पौधे लगाये गए हैं।
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जिसमें कुल  397 मजदूर लगाये गए थे जिन्हें 174 रूपये के हिसाब 69078 रूपये मजदूरी दी  गयी है। मधुबन कस्बे से होकर बेल्थरा रोड जाने वाली प्रमुख सड़क पर वन विभाग  द्वारा सोमवार को पौधरोपण किया गया।जिसमें फलदार पौधों की संख्या नाम मात्र तथा जंगली पेंड़ो की संख्या अधिक दिखाई दे रही थी।कटघरा शंकर से लेकर फतहपुर  ताल रतोय तक लगभग दो दर्जन मजदूरों ने आनन फानन में केवल फावड़े से गढ्ढे  खोदकर उसमें पौधे लगा दिए।
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लोगों की मानें तो ताल में अभी पानी नहीं है तो सूख रहे हैं और बारिश  हुई तो पानी लगने की बजह से पौधे सूख जायेंगे।वन विभाग थाला बनाने की भी  जहमत नही उठाया है। सड़क के किनारे न तो गढ्ढे खोदे गए थे और न ही थाले बनाने का काम  कराया गया। जैसे तैसे गढ्ढा खोदकर पेड़ लगाकर उसे पाट दिया गया। पशुओं से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किया  गया। पानी के अभाव में अभी से तमम पौधे दम  तोड़ते नजर आ रहे थे।इस बाबत घोसी वन क्षेत्र अधिकारी परिक्षेत्र मधुबन अजय शंकर शुक्ला का कहना था कि पौधों का रखरखाव किया जा रहा है। जहां पानी की व्यवस्था नहीं थी वहां टैंकर से पानी दिया जा रहा है।बाकी जहां पानी नहरो में था उससे दिया गया है।
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