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मेडिकल अपशिष्ट के निस्तारण के बिना ही संचालित हो रहे अस्पताल
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मऊ। जिले में कुछ को छोड़कर अधिकांश नर्सिंग होम व पैथोलाजी बिना मेडिकल अपशिष्ट के निस्तारण के ही संचालित हो रहे हैं। अस्पतालों से निकलने वाले कचरे को खुले में ही फेंका जा रहा है। इसके कारण वातावरण प्रदुषित होने के साथ ही बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। नियम यह है कि बिना बायो मेडिकल वेस्टेज सिस्टम के अस्पताल का पंजीकरण नहीं होगा। बावजूद इसके जिले में काफी संख्या में अस्पताल व लैब का संचालन हो रहा है।
जिले संचालित अस्पताल दावा करती है कि अस्पताल में बायो मेडिकल वेस्ट (जैव चिकित्सकीय कचरा) सिस्टम लगा है लेकिन आलम यह है कि अस्पतालों से निकलने वाले वेस्ट के खुलेआम अस्पताल के बाहर ही फेंका जा रहा है। शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी संचालित अस्पतालों के बाहर मेडिकल कचरे देखे जा सकते हैं। इस अव्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग से लेकर नगर पालिका प्रशासन भी बेपरवाह दिखाई दे रही है। जिले में एक या दो मेडिकल सेंटर ऐसे हैं, जिनके पास मरीजों के इलाज के दौरान निकलने वाले मेडिकल वेस्ट के लिये सिस्टम लगा है। अधिकांश मेडिकल सेंटर ऐसे हैं जिनके पास मेडिकल कचरे के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अस्पतालों ने निकलने वाले कचरे के कारण खतरा बढ़ रहा है।
जिले में इतने हैं मेडिकल सेंटर
मऊ। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले नर्सिंग होम, क्लीनिक तथा पैथालॉजी मिलाकर कुल 444 पंजीकरण है। इनमें से 72 क्लीनिक, 36 नर्सिंग होम, 18 पैथालोजी, 178 आयुर्वेदिक पद्धति के नर्सिंग होम, यूनानी पद्धति के 140 नर्सिंग होम शामिल हैं।
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अस्पतालों के आसपास ही फेंका जा रहा कचरा
मऊ। शहर के ब्रह्मस्थान, गाजीपुर तिराहा, मुंशीपुरा, निजामुद्दीनपुरा, बहादुरगंज रोड, भीटी सहित ग्रामीण इलाकों में बने अस्पतालों में मरीजों के इलाज के बाद निकलने वाली प्लास्टर, बैंडेज व निडिल इत्यादि खुले में फेंका जा रहा है। मेडिकल कचरे के लिए बने नियमों का सही ढंग से पालन नहीं हो रहा है।
तैय्यब पालकी नगर पालिका अध्यक्ष ने बताया कि इस संबंध में कई बार अस्पतालों को नोटिस दी गई है। इसके बाद भी बायो मेडिकल कचरे को सामान्य कचरे के साथ फेंका जाता है। ऐसे लोगों को चिह्नित कर स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराकर कार्रवाई कराई जाएगी।
प्रभारी सीएमओ डा. एसपी अग्रवाल ने बताया कि यह सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है, ऐसा करने वाले अस्पतालों व लैब संचालकों के खिलाफ सबूत मिलने पर कार्रवाई की जायेगी।
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जिले संचालित अस्पताल दावा करती है कि अस्पताल में बायो मेडिकल वेस्ट (जैव चिकित्सकीय कचरा) सिस्टम लगा है लेकिन आलम यह है कि अस्पतालों से निकलने वाले वेस्ट के खुलेआम अस्पताल के बाहर ही फेंका जा रहा है। शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी संचालित अस्पतालों के बाहर मेडिकल कचरे देखे जा सकते हैं। इस अव्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग से लेकर नगर पालिका प्रशासन भी बेपरवाह दिखाई दे रही है। जिले में एक या दो मेडिकल सेंटर ऐसे हैं, जिनके पास मरीजों के इलाज के दौरान निकलने वाले मेडिकल वेस्ट के लिये सिस्टम लगा है। अधिकांश मेडिकल सेंटर ऐसे हैं जिनके पास मेडिकल कचरे के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अस्पतालों ने निकलने वाले कचरे के कारण खतरा बढ़ रहा है।
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जिले में इतने हैं मेडिकल सेंटर
मऊ। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले नर्सिंग होम, क्लीनिक तथा पैथालॉजी मिलाकर कुल 444 पंजीकरण है। इनमें से 72 क्लीनिक, 36 नर्सिंग होम, 18 पैथालोजी, 178 आयुर्वेदिक पद्धति के नर्सिंग होम, यूनानी पद्धति के 140 नर्सिंग होम शामिल हैं।
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अस्पतालों के आसपास ही फेंका जा रहा कचरा
मऊ। शहर के ब्रह्मस्थान, गाजीपुर तिराहा, मुंशीपुरा, निजामुद्दीनपुरा, बहादुरगंज रोड, भीटी सहित ग्रामीण इलाकों में बने अस्पतालों में मरीजों के इलाज के बाद निकलने वाली प्लास्टर, बैंडेज व निडिल इत्यादि खुले में फेंका जा रहा है। मेडिकल कचरे के लिए बने नियमों का सही ढंग से पालन नहीं हो रहा है।
तैय्यब पालकी नगर पालिका अध्यक्ष ने बताया कि इस संबंध में कई बार अस्पतालों को नोटिस दी गई है। इसके बाद भी बायो मेडिकल कचरे को सामान्य कचरे के साथ फेंका जाता है। ऐसे लोगों को चिह्नित कर स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराकर कार्रवाई कराई जाएगी।
प्रभारी सीएमओ डा. एसपी अग्रवाल ने बताया कि यह सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है, ऐसा करने वाले अस्पतालों व लैब संचालकों के खिलाफ सबूत मिलने पर कार्रवाई की जायेगी।