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उम्मीद गोल्ड की, सुविधाएं धेला भर नहीं
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मऊ जिला मुख्यालय स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में आधुनिक संसाधनों की भारी कमी है। यहां आठ खेल प्रशिक्षकों का पद है, लेकिन सिर्फ दो कोच की ही नियुक्ति हो सकी है। ऐसे में बिना कोच के ही खिलाड़ी प्रैक्टिस करने को विवश हैं। यहां हाकी खिलाड़ियों के लिए एस्टोटर्फ की सुविधा तक नहीं है। जिम्नेजियम हाल न होने से जिम्नास्टिक खिलाड़ियों की प्रतिभा दम तोड़ रही है। बरसात मेें ग्राउंड की साफ सफाई तथा जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से खिलाड़ियों को अभ्यास में असुविधा होती है।
खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए शासन की तरफ से जिला मुख्यालय स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम की स्थापना की गई। लेकिन खिलाड़ियों की अपेक्षा के अनुरूप स्टेडियम में सुविधाएं नहीं उपलब्ध कराई गईं। स्टेडियम मेें हाकी, कबड्डी, जिम्नास्टिक, एथलेटिक्स, क्रिकेट, फुटबाल, बैडमिंटन सहित आठ खेल प्रशिक्षकों का पद है। वित्तीय वर्ष का पांचवां माह चल रहा है, लेकिन अभी तक कुश्ती तथा जिम्नास्टिक कोच की ही तैनाती हो पाई है। स्टेडियम में एथलेटिक्स के लिए सिंथेटिक ट्रैक तथा हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान तक नहीं है। जबकि वर्तमान में होने वाली अंतरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं एस्ट्रोटर्फ मैदान पर ही हो रही हैं। ऐसे में यहां के खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पिछड़ जा रहे हैं।
यही नहीं जिम्नेजियम हाल न होने से जिम्नास्टिक खिलाड़ियों की प्रतिभा में निखार नहीं आ पा रहा है। यही हाल कबड्डी, वालीबाल, क्रिकेट सहित अन्य खेलों का है। बरसात में ग्राउंड की साफ-सफाई तथा जलनिकासी की व्यवस्था न होने से खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के दौरान असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्टेडियम के अंदर पवेलियन की व्यवस्था नहीं है। प्रशिक्षकों की तैनाती के बाबत जिला क्रीड़ा अधिकारी मुकेश सब्बरवाल ने कहा कि खेल प्रशिक्षकों की तैनाती की प्रक्रिया चल रही है। स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ, जिम्नेजियम हाल सहित अन्य खेल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेेजा गया है।
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सुविधाएं नहीं होने से खिलाड़ियों में रोष
मऊ। जिला मुख्यालय स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में आधुनिक खेल सुविधाएं नहीं मिलने से खिलाड़ियों में रोष है। उनका कहना है कि जरूरी सुविधाएं देकर देखिए, हममें से तमाम खिलाड़ी देश का परचम दुनिया में फहराने का दम रखते हैं।
हाकी कोच ओमेंद्र सिंह कहते हैं कि स्टेडियम से तमाम हॉकी खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचे हैं। जिले मेें प्रतिभाओं की कमी नहीं है। खिलाड़ियों को स्टेडियम में आधुनिक खेल सुविधाएं दी जाए तो खिलाड़ी उम्मीद के अनुरुप प्रदर्शन कर सकेंगे। खिलाड़ी संदीप का कहना है कि स्टेडियम में सुविधाओं का अभाव है। हॉकी में एस्टोटर्फ सहित बुनियादी सुविधाएं तक नहीं है। इससे प्रदर्शन प्रभावित होता है। खिलाड़ी राना का कहना है कि कोच के नहीं होने से सही ढंग से प्रैक्टिस नहीं हो पा रही है।
खिलाड़ी शशिकला कहती हैं कि स्टेडियम में ग्राउंड की सफाई तथा जल निकासी की बेहतर व्यवस्था न होने से प्रैक्टिस में असुविधा होती है। खिलाड़ी निक्की का कहना है कि हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान, जिम्नेजियम हाल न होने से राष्ट्रीय स्तर की तैयारी नहीं हो पाती है।
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खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए शासन की तरफ से जिला मुख्यालय स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम की स्थापना की गई। लेकिन खिलाड़ियों की अपेक्षा के अनुरूप स्टेडियम में सुविधाएं नहीं उपलब्ध कराई गईं। स्टेडियम मेें हाकी, कबड्डी, जिम्नास्टिक, एथलेटिक्स, क्रिकेट, फुटबाल, बैडमिंटन सहित आठ खेल प्रशिक्षकों का पद है। वित्तीय वर्ष का पांचवां माह चल रहा है, लेकिन अभी तक कुश्ती तथा जिम्नास्टिक कोच की ही तैनाती हो पाई है। स्टेडियम में एथलेटिक्स के लिए सिंथेटिक ट्रैक तथा हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान तक नहीं है। जबकि वर्तमान में होने वाली अंतरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं एस्ट्रोटर्फ मैदान पर ही हो रही हैं। ऐसे में यहां के खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पिछड़ जा रहे हैं।
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यही नहीं जिम्नेजियम हाल न होने से जिम्नास्टिक खिलाड़ियों की प्रतिभा में निखार नहीं आ पा रहा है। यही हाल कबड्डी, वालीबाल, क्रिकेट सहित अन्य खेलों का है। बरसात में ग्राउंड की साफ-सफाई तथा जलनिकासी की व्यवस्था न होने से खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के दौरान असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्टेडियम के अंदर पवेलियन की व्यवस्था नहीं है। प्रशिक्षकों की तैनाती के बाबत जिला क्रीड़ा अधिकारी मुकेश सब्बरवाल ने कहा कि खेल प्रशिक्षकों की तैनाती की प्रक्रिया चल रही है। स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ, जिम्नेजियम हाल सहित अन्य खेल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेेजा गया है।
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सुविधाएं नहीं होने से खिलाड़ियों में रोष
मऊ। जिला मुख्यालय स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में आधुनिक खेल सुविधाएं नहीं मिलने से खिलाड़ियों में रोष है। उनका कहना है कि जरूरी सुविधाएं देकर देखिए, हममें से तमाम खिलाड़ी देश का परचम दुनिया में फहराने का दम रखते हैं।
हाकी कोच ओमेंद्र सिंह कहते हैं कि स्टेडियम से तमाम हॉकी खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचे हैं। जिले मेें प्रतिभाओं की कमी नहीं है। खिलाड़ियों को स्टेडियम में आधुनिक खेल सुविधाएं दी जाए तो खिलाड़ी उम्मीद के अनुरुप प्रदर्शन कर सकेंगे। खिलाड़ी संदीप का कहना है कि स्टेडियम में सुविधाओं का अभाव है। हॉकी में एस्टोटर्फ सहित बुनियादी सुविधाएं तक नहीं है। इससे प्रदर्शन प्रभावित होता है। खिलाड़ी राना का कहना है कि कोच के नहीं होने से सही ढंग से प्रैक्टिस नहीं हो पा रही है।
खिलाड़ी शशिकला कहती हैं कि स्टेडियम में ग्राउंड की सफाई तथा जल निकासी की बेहतर व्यवस्था न होने से प्रैक्टिस में असुविधा होती है। खिलाड़ी निक्की का कहना है कि हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान, जिम्नेजियम हाल न होने से राष्ट्रीय स्तर की तैयारी नहीं हो पाती है।