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ठंड और गलन से थम सी गई जिंदगी
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Sat, 27 Dec 2014 11:09 PM IST
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पहाड़ों पर पड़ी बर्फ के कारण मैदानी इलकों में जनजीवन प्रभावित हो गया है। शनिवार को बर्फीली हवा के कारण शीतलहरी ने लोगों को घरों में कैद कर दिया। दोपहर बाद धूप निकली, लेकिन ठंड का असर बना रहा।
भीषण ठंड के चलते बाजारों में भी चहल पहल कम रही। शीतलहर को देखते हुए शासन ने 29 दिसंबर से 12वीं तक जिले के सभी सरकारी, सहायता, मान्यता प्राप्त तथा कान्वेंट स्कूलों को पूर्वाह्न 10 बजे से अपराह्न दो बजे तक खोले जाने का फरमान जारी किया है।
भीषण ठंड के बाद भी जिले के सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं है। मौसम में प्रतिदिन बदलाव होने से लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है।
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शनिवार की सुबह कोहरा से राहत तो मिली, लेकिन शीतलहर का दौर शुरू हो गया। उत्तराखंड में हुई बर्फबारी से पारा लुढ़क गया। सर्द हवाओं के चलने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
इसकेचलते कोचिंग जाने वाले छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर तक धूप न निकलने से लोग कांपते देखे गए। अपराह्न भगवान भाष्कर का दर्शन हुआ, लेकिन लेकिन ठंड और गलन के चलते धूप बेअसर हो रही थी।
सुबह लगभग छह बजे तक प्रमुख मार्गो पर इक्के दुक्के वाहन ही चलते देखे गए। भीषण ठंड के बाद भी जिले के विभिन्न इलाके के सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाए ही नहीं जा सके हैं।
रिक्शे, टैंपो, जीप तथा बसों का इंतजार करने वाले लोग कांपते देखे गए। रेलवे तथा बस स्टेशन पर प्रतीक्षा करने वाले यात्रियों का बुरा हाल रहा। जबकि शासन की ओर से सभी तहसीलों को 50-50 हजार रुपये जारी कर दिए गए हैं।
शीतलहर को देखते हुए शासन की ओर से 12वीं के सभी सरकारी, मान्यता प्राप्त तथा कांवेंट स्कूलों को 29 दिसंबर से पूर्वाह्न 10 बजे से अपराह्न दो बजे तक स्कूलों के संचालन का समय निर्धारित कर दिया गया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक वृजेश कुमार का कहना है कि शीतलहर को देखते हुए स्कूलों का समय पूर्वाह्न 10 बजे से अपराह्न दो बजे तक निर्धारित किया गया है।
उधर दिन रात का शेड्यूल लागू होने से किसानाें का सिरदर्द बढ़ता ही जा रही है। गेहूं की सिंचाई जोरों पर चल रही है। ऐसे में दिन में कम बिजली मिल रही है।
किसानों को शीतलहर में रात के समय खेत की सिंचाई करनी पड़ रही है। शीत लहर की परेशानी झेल रहे किसान दिन में ही पर्याप्त विद्युत आपूर्ति की मांग कर रहे हैं।
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भीषण ठंड के चलते बाजारों में भी चहल पहल कम रही। शीतलहर को देखते हुए शासन ने 29 दिसंबर से 12वीं तक जिले के सभी सरकारी, सहायता, मान्यता प्राप्त तथा कान्वेंट स्कूलों को पूर्वाह्न 10 बजे से अपराह्न दो बजे तक खोले जाने का फरमान जारी किया है।
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भीषण ठंड के बाद भी जिले के सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं है। मौसम में प्रतिदिन बदलाव होने से लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है।
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शनिवार की सुबह कोहरा से राहत तो मिली, लेकिन शीतलहर का दौर शुरू हो गया। उत्तराखंड में हुई बर्फबारी से पारा लुढ़क गया। सर्द हवाओं के चलने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
इसकेचलते कोचिंग जाने वाले छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर तक धूप न निकलने से लोग कांपते देखे गए। अपराह्न भगवान भाष्कर का दर्शन हुआ, लेकिन लेकिन ठंड और गलन के चलते धूप बेअसर हो रही थी।
सुबह लगभग छह बजे तक प्रमुख मार्गो पर इक्के दुक्के वाहन ही चलते देखे गए। भीषण ठंड के बाद भी जिले के विभिन्न इलाके के सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाए ही नहीं जा सके हैं।
रिक्शे, टैंपो, जीप तथा बसों का इंतजार करने वाले लोग कांपते देखे गए। रेलवे तथा बस स्टेशन पर प्रतीक्षा करने वाले यात्रियों का बुरा हाल रहा। जबकि शासन की ओर से सभी तहसीलों को 50-50 हजार रुपये जारी कर दिए गए हैं।
शीतलहर को देखते हुए शासन की ओर से 12वीं के सभी सरकारी, मान्यता प्राप्त तथा कांवेंट स्कूलों को 29 दिसंबर से पूर्वाह्न 10 बजे से अपराह्न दो बजे तक स्कूलों के संचालन का समय निर्धारित कर दिया गया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक वृजेश कुमार का कहना है कि शीतलहर को देखते हुए स्कूलों का समय पूर्वाह्न 10 बजे से अपराह्न दो बजे तक निर्धारित किया गया है।
उधर दिन रात का शेड्यूल लागू होने से किसानाें का सिरदर्द बढ़ता ही जा रही है। गेहूं की सिंचाई जोरों पर चल रही है। ऐसे में दिन में कम बिजली मिल रही है।
किसानों को शीतलहर में रात के समय खेत की सिंचाई करनी पड़ रही है। शीत लहर की परेशानी झेल रहे किसान दिन में ही पर्याप्त विद्युत आपूर्ति की मांग कर रहे हैं।