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हर शायरी पर शायरों को मिली तालियां
BEARU, AMAR UJALA, MAU
Updated Mon, 18 Apr 2016 11:47 PM IST
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माइनारिटी स्टूडेंटस फोरम मऊ और नगर पालिका परिषद के तत्वाधान में नगर के मुहल्ला छित्तनपुरा नई ईदगाह के पास सहन में रविवार की रात मुशायरे का आयोजन हुआ।
रात ज्यों ज्यों चढ़ती गई, शायरों की महफिल की रंगत खिलती गई। हर शायरी पर लोगों की तालियां शायरों को मिलीं। मुशायरा में देश के विभिन्न शहरों के जाने माने शायरों ने भाग लिया। मुशायरे का आगाज तराना हिंदी ‘सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ से किया गया।
मुशायरे के आगाज में ही सबसे पहले बाराबंकी से आए कवि विकास बौखल ने अपनी हास्य एवं व्यंग्य की रचनाएं सुनाकर लोगों को हंसते हंसते लोटपोट दिया। उसके बाद शायर नदीम अब्बासी ने सुनाया कि जो हाल उसका है उसपर नदीम क्या लिखूं, किसी जमाने में देवदास मैं भी था।
देवबंद से आए नदीम शाद ने कहा कि नई नस्लों में जिससे एक नई उम्मीद पैदा हो। मेरे मौला कुछ ऐसा काम करना चाहता हूं। यूएई से आए अतीक अंजर नेे कहा कि कभी किसी के फरेब-ए वफा में मत आना।
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वहीं, मशहूर शायर अज्म शाकरी ने जीवन की कठिनाइयों को उजागर करते हुए कहा कि अब न रोएंगे खुशी के लिए। गम ही काफी है जिंदगी के लिए। प्रसिद्ध कवि डॉ. सुनील कुमार तंग ने आजादी-ए हुकूमत का देखिये नजारा। रहने को घर नहीं सारा जहां हमारा सुनाया।
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रात ज्यों ज्यों चढ़ती गई, शायरों की महफिल की रंगत खिलती गई। हर शायरी पर लोगों की तालियां शायरों को मिलीं। मुशायरा में देश के विभिन्न शहरों के जाने माने शायरों ने भाग लिया। मुशायरे का आगाज तराना हिंदी ‘सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ से किया गया।
मुशायरे के आगाज में ही सबसे पहले बाराबंकी से आए कवि विकास बौखल ने अपनी हास्य एवं व्यंग्य की रचनाएं सुनाकर लोगों को हंसते हंसते लोटपोट दिया। उसके बाद शायर नदीम अब्बासी ने सुनाया कि जो हाल उसका है उसपर नदीम क्या लिखूं, किसी जमाने में देवदास मैं भी था।
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देवबंद से आए नदीम शाद ने कहा कि नई नस्लों में जिससे एक नई उम्मीद पैदा हो। मेरे मौला कुछ ऐसा काम करना चाहता हूं। यूएई से आए अतीक अंजर नेे कहा कि कभी किसी के फरेब-ए वफा में मत आना।
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वहीं, मशहूर शायर अज्म शाकरी ने जीवन की कठिनाइयों को उजागर करते हुए कहा कि अब न रोएंगे खुशी के लिए। गम ही काफी है जिंदगी के लिए। प्रसिद्ध कवि डॉ. सुनील कुमार तंग ने आजादी-ए हुकूमत का देखिये नजारा। रहने को घर नहीं सारा जहां हमारा सुनाया।