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Mau News: जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स 186 के पार, अस्पतालों में बढ़े सांस के मरीज
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मऊ। वायु प्रदूषण को लेकर इन दिनों बड़े महानगरों को लेकर खूब चर्चा हो रही है, लेकिन जिला भी कई महानगरों से ज्यादा प्रदूषित हो चुका है। जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स 186 के पार हो चुका है। इसका असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है।
सुबह को मौसम तो साफ रहता है, लेकिन शाम ढ़लते ही धुंध की चादर वायुमंडल को अपने आगोश में ले ले रही है। वायु प्रदूषण के खराब होने से जिले में कुछ दिनों से तापमान भी बढ़ा है। सांस के रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। अभी यह हाल उस समय है जब जिले में अभी धान की कटाई के बाद अभी धान की पराली नहीं जल रही है। प्रशासन की तरफ से इसे लेकर मुस्तैदी बरती गई है। सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ने और कूड़े के ढेर से उठने वाले धुआं के कारण जिले की वायु गुणवत्ता दिनों दिन खराब होती जा रही है।
जिला अस्पताल में रोजाना आ रहे तीस सांस के मरीज
मऊ। जिला टीबी आरके सिंह ने बताया कि टीबी क्लिनिक में पहले की तुलना में मरीजों की संख्या बढ़ी है। हालांकि टीबी क्लिनिक में चिकित्सक के नहीं होने से मरीजों का परेशानी हो रही है।
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जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता चेस्ट फिजिशियन डा. धनंजय कुमार बताते है कि अस्पताल की ओपीडी में इस समय रोजाना सांस के 30 मरीज आ रहे है। कुछ मरीजों की जांच के बाद तत्काल उपचार दिया जा रहा है। वही कुछ केस ऐसे भी आए है जिनको रेफर किया गया। बताया कि ऐसे मरीजों को सांस लेने में परेशानी के साथ आंखों में जलन और ब्रोंकाइटिस की समस्या हो रही है। सलाह दी कि घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाकर निकले और परेशानी होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
कितना वायु प्रदूषण है घातक
मऊ। वायु गुणवत्ता सूचकांक शून्य से 50 के बीच अच्छा माना जाता है, इसके अलावा 51 से 100 के बीच संतोषजनक तो 101 से 200 के बीच मध्यम व 201 से 300 के बीच का खराब माना जाता है। वहीं 301 से 400 के बीच का बहुत खराब माना जाता है।
बाजार में नेबुलाइजर की बढ़ी मांग
मऊ। जिले की वायु गुणवत्ता खराब होने मरीजों की संख्या में इजाफा होने के साथ बाजार में नेबुलाइजर की भी मांग बढ़ी है। जिला अस्पताल के सामने राय सर्जिकल के प्रोपराइटर नमन कुमार राय बताते हैं कि बीते कुछ दिनों से नेबुलाइजर की मांग में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। नेबुलाइजर खरीदने वालों में हर आयु वर्ग के लोग है।
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सुबह को मौसम तो साफ रहता है, लेकिन शाम ढ़लते ही धुंध की चादर वायुमंडल को अपने आगोश में ले ले रही है। वायु प्रदूषण के खराब होने से जिले में कुछ दिनों से तापमान भी बढ़ा है। सांस के रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। अभी यह हाल उस समय है जब जिले में अभी धान की कटाई के बाद अभी धान की पराली नहीं जल रही है। प्रशासन की तरफ से इसे लेकर मुस्तैदी बरती गई है। सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ने और कूड़े के ढेर से उठने वाले धुआं के कारण जिले की वायु गुणवत्ता दिनों दिन खराब होती जा रही है।
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जिला अस्पताल में रोजाना आ रहे तीस सांस के मरीज
मऊ। जिला टीबी आरके सिंह ने बताया कि टीबी क्लिनिक में पहले की तुलना में मरीजों की संख्या बढ़ी है। हालांकि टीबी क्लिनिक में चिकित्सक के नहीं होने से मरीजों का परेशानी हो रही है।
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जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता चेस्ट फिजिशियन डा. धनंजय कुमार बताते है कि अस्पताल की ओपीडी में इस समय रोजाना सांस के 30 मरीज आ रहे है। कुछ मरीजों की जांच के बाद तत्काल उपचार दिया जा रहा है। वही कुछ केस ऐसे भी आए है जिनको रेफर किया गया। बताया कि ऐसे मरीजों को सांस लेने में परेशानी के साथ आंखों में जलन और ब्रोंकाइटिस की समस्या हो रही है। सलाह दी कि घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाकर निकले और परेशानी होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
कितना वायु प्रदूषण है घातक
मऊ। वायु गुणवत्ता सूचकांक शून्य से 50 के बीच अच्छा माना जाता है, इसके अलावा 51 से 100 के बीच संतोषजनक तो 101 से 200 के बीच मध्यम व 201 से 300 के बीच का खराब माना जाता है। वहीं 301 से 400 के बीच का बहुत खराब माना जाता है।
बाजार में नेबुलाइजर की बढ़ी मांग
मऊ। जिले की वायु गुणवत्ता खराब होने मरीजों की संख्या में इजाफा होने के साथ बाजार में नेबुलाइजर की भी मांग बढ़ी है। जिला अस्पताल के सामने राय सर्जिकल के प्रोपराइटर नमन कुमार राय बताते हैं कि बीते कुछ दिनों से नेबुलाइजर की मांग में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। नेबुलाइजर खरीदने वालों में हर आयु वर्ग के लोग है।