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संशोधित भूमि अधिग्रहण विधेयक की प्रतियां फूंकी
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Tue, 07 Apr 2015 12:05 AM IST
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एआईपीएफ और उसके घटक दल भाकपा माले ने सोमवार को केंद्र सरकार द्वारा लाए गए संशोधित भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के विरोध में प्रदर्शन किया। अध्यादेश की प्रतियां फूंकी। नगर से कलेक्ट्रेट तक प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा।
ज्ञापन सौंपने से पूर्व मौजूद कार्यकर्ताओं और जनसमूह को संबोधित करते हुए माले के राज्य स्थाई समिति के सदस्य ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि केंद्र में जब से मोदी की सरकार आई है देश में संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की मुहिम चल रही है।
जन सामान्य के हितों की अनदेखी करते हुए बड़े औद्योगिक घरानों और पूंजीपतियों के हितों के पोषण के लिए जनाकांक्षाओं को दरकिनार करते हुए अध्यादेश लाए जा रहे हैं। कहा कि पहले से ही कर्ज में डूबे देश के किसान प्राकृतिक आपदाओं की मार से कराहते हुए आत्महत्याएं करने को विवश हैं।
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उनका तर्क था कि किसानों को झूठे सब्ज बाग दिखाकर मोदी ने केंद्र में बहुमत वाली सरकार तरो बना ली लेकिन किसानों को उबारने का समय आया तो उनकी विरोधी बन गई। एआईपीएफ के बसंत कुमार ने कहा कि मार्च और अप्रैल महीनों में हुई बेमौसम बरसात ने किसानों
को बरबादी के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। नेताओं ने कहा कि वे किसान विरोधी इस अध्यादेश को वापस लेने के लिए निर्णायक संघर्ष करेंगे।
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ज्ञापन सौंपने से पूर्व मौजूद कार्यकर्ताओं और जनसमूह को संबोधित करते हुए माले के राज्य स्थाई समिति के सदस्य ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि केंद्र में जब से मोदी की सरकार आई है देश में संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की मुहिम चल रही है।
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जन सामान्य के हितों की अनदेखी करते हुए बड़े औद्योगिक घरानों और पूंजीपतियों के हितों के पोषण के लिए जनाकांक्षाओं को दरकिनार करते हुए अध्यादेश लाए जा रहे हैं। कहा कि पहले से ही कर्ज में डूबे देश के किसान प्राकृतिक आपदाओं की मार से कराहते हुए आत्महत्याएं करने को विवश हैं।
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उनका तर्क था कि किसानों को झूठे सब्ज बाग दिखाकर मोदी ने केंद्र में बहुमत वाली सरकार तरो बना ली लेकिन किसानों को उबारने का समय आया तो उनकी विरोधी बन गई। एआईपीएफ के बसंत कुमार ने कहा कि मार्च और अप्रैल महीनों में हुई बेमौसम बरसात ने किसानों
को बरबादी के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। नेताओं ने कहा कि वे किसान विरोधी इस अध्यादेश को वापस लेने के लिए निर्णायक संघर्ष करेंगे।