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Mau News: डंपिंग ग्राउंड का निर्माण अधूरा, खुले में फेंका जा रहा कचरा
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मऊ। स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 शुरू होने में महज अब तीन दिन हैं, बावजूद नगर पालिका द्वारा अब तक डपिंग ग्राउंड का कार्य पूरा नहीं कराया जा सका है। जबकि यह कार्य दो वर्ष से अधिक समय से चल रहा है। ऐसे में नगर पालिका की रेटिंग के प्रभावित होने में यह एक अहम कारण हो सकता है।
बीते 2016 से नगर पालिका डपिंग ग्राउंड न होने के चलते हर बार प्रदेश के टापटेन सूची में शामिल होने से बेहद कम अंकों के चलते चूक टूट है, लेकिन दो साल पहले जमीन चिहिन्त होने के बाद 2024 में स्वच्छता सर्वेक्षण में टापटेन में आने की उम्मीद थी, लेकिन यह उम्मीद टूट गई। वहीं इस साल भी नगर पालिका के टापटेन में आने की संभावना पर संशय बना है। वहीं दूसरे ओर नगर पालिका द्वारा अधूरा डपिंग ग्राउंड होने के चलते खुले में कचरा डंप किया जा रहा है।
नगर पालिका द्वारा जून 2021 में नगर से पांच किमी से ज्यादा दूर रैनी में आठ बीघे जमीन डपिंग ग्राउंड के लिए चिह्रित किया गया था। पिछले वर्ष 2022 में इसके लिए 14 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ था। जहां नगर पालिका द्वारा बकायदा टेंडर कर कार्यदायी संस्था सीएनडीएस के खाते में अग्रिम राशि तीन करोड़ रुपयेे भेजी गई थी।
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एक साल के अंदर बनने वाला डपिंग ग्राउंड दो साल से अधिक समय बीतने के बाद भी अब पूरा नहीं हुआ है। जबकि ऐसे में नगर पालिका के जिम्मेदार शहरवासियों को स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं, लेकिन उनके द्वारा खुद में खुले में कचरा डंप कराया जा रहा है।
बीते कई दिनों से नगर से निकलने वाला कचरा नगर के बाहर बने रोजगार्डन के बाहर किनारे गड्ढों को भरने में प्रयोग किया जा रहा था। जिम्मेदारों का इस पर तर्क था कि गड्ढों को पहले कचरे से भरा जाएगा उसके बाद उसके ऊपर से मिट्टी का भराव कार्य किया जाएगा। यहीं स्थिति नगर के भीटी पुल के नीचे निकले मार्ग पर है, यहां भी सड़क किनारे नगर पालिका द्वारा कचरा डंप किया जा रहा है।
यह स्थिति उस समय है जब 2024 का स्वच्छता सर्वेक्षण 15 फरवरी से शुरू होने वाला है। इसको लेकर नगर पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल ने बताया कि बड़ा प्रोजेक्ट है, इसलिए इसमें समय लग रहा है। कार्यदायी संस्था द्वारा टीनशेड और भवन निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया, जल्द ही सात करोड़ की लागत से डपिंग ग्राउंड के लिए मशीनों का खरीदा जाएगा।
वहीं कार्यदायी संस्था के सीएनडीएस के अवर अभियंता कमलेश चौहान ने बताया कि रैनी में आठ बीघे जमीन डंपिंग ग्राउंड बन रहा है। इसमें अब तक संस्था द्वारा चार शेड और दो बड़े हॉल बनकर तैयार हैं। अभी केवल मिट्टी भराई और समतल करके नगर पालिका को मार्च तक हैंडओवर करना है। लेकिन पर्याप्त मिट्टी नहीं मिल पाने से देरी हो रही है। इसके लिए पूर्व में तीन करोड़ रुपये का बजट मिला था, लेकिन समय के साथ बजट अधिक लग गया है, अब तक केवल सिविल कार्यों के लिए छह करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। तीन करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है।
हर साल गिरती जा रही है रेटिंग
मऊ। रेटिंग के आंकड़ों पर गौर करें तो पहली बार स्वच्छता सर्वेक्षण 2016 में हुआ था। जिसमें मऊ नपा की स्थिति बदतर थी। 2017 के सर्वे में 370 वां स्थान पाया था, वहीं 2018 में प्रदेश में 14वां जबकि 2019 में केवल डंपिंग ग्राउंड न होने से 300 नंबर कटने के चलते प्रदेश में मऊ नगर पालिका की 11वीं रेटिंग आई थी। इसके बाद हर साल नगर पालिका की रेटिंग गिरते ही जा रही है। इसके चलते 2020 में प्रदेश में 17वें स्थान पर रही। जबकि स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में रेटिंग 28वीं थी तो 2022 में यह रैंकिंग 36 वीं तो 2023 में यह रेटिंग 42 वीं रही।
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बीते 2016 से नगर पालिका डपिंग ग्राउंड न होने के चलते हर बार प्रदेश के टापटेन सूची में शामिल होने से बेहद कम अंकों के चलते चूक टूट है, लेकिन दो साल पहले जमीन चिहिन्त होने के बाद 2024 में स्वच्छता सर्वेक्षण में टापटेन में आने की उम्मीद थी, लेकिन यह उम्मीद टूट गई। वहीं इस साल भी नगर पालिका के टापटेन में आने की संभावना पर संशय बना है। वहीं दूसरे ओर नगर पालिका द्वारा अधूरा डपिंग ग्राउंड होने के चलते खुले में कचरा डंप किया जा रहा है।
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नगर पालिका द्वारा जून 2021 में नगर से पांच किमी से ज्यादा दूर रैनी में आठ बीघे जमीन डपिंग ग्राउंड के लिए चिह्रित किया गया था। पिछले वर्ष 2022 में इसके लिए 14 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ था। जहां नगर पालिका द्वारा बकायदा टेंडर कर कार्यदायी संस्था सीएनडीएस के खाते में अग्रिम राशि तीन करोड़ रुपयेे भेजी गई थी।
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एक साल के अंदर बनने वाला डपिंग ग्राउंड दो साल से अधिक समय बीतने के बाद भी अब पूरा नहीं हुआ है। जबकि ऐसे में नगर पालिका के जिम्मेदार शहरवासियों को स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं, लेकिन उनके द्वारा खुद में खुले में कचरा डंप कराया जा रहा है।
बीते कई दिनों से नगर से निकलने वाला कचरा नगर के बाहर बने रोजगार्डन के बाहर किनारे गड्ढों को भरने में प्रयोग किया जा रहा था। जिम्मेदारों का इस पर तर्क था कि गड्ढों को पहले कचरे से भरा जाएगा उसके बाद उसके ऊपर से मिट्टी का भराव कार्य किया जाएगा। यहीं स्थिति नगर के भीटी पुल के नीचे निकले मार्ग पर है, यहां भी सड़क किनारे नगर पालिका द्वारा कचरा डंप किया जा रहा है।
यह स्थिति उस समय है जब 2024 का स्वच्छता सर्वेक्षण 15 फरवरी से शुरू होने वाला है। इसको लेकर नगर पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल ने बताया कि बड़ा प्रोजेक्ट है, इसलिए इसमें समय लग रहा है। कार्यदायी संस्था द्वारा टीनशेड और भवन निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया, जल्द ही सात करोड़ की लागत से डपिंग ग्राउंड के लिए मशीनों का खरीदा जाएगा।
वहीं कार्यदायी संस्था के सीएनडीएस के अवर अभियंता कमलेश चौहान ने बताया कि रैनी में आठ बीघे जमीन डंपिंग ग्राउंड बन रहा है। इसमें अब तक संस्था द्वारा चार शेड और दो बड़े हॉल बनकर तैयार हैं। अभी केवल मिट्टी भराई और समतल करके नगर पालिका को मार्च तक हैंडओवर करना है। लेकिन पर्याप्त मिट्टी नहीं मिल पाने से देरी हो रही है। इसके लिए पूर्व में तीन करोड़ रुपये का बजट मिला था, लेकिन समय के साथ बजट अधिक लग गया है, अब तक केवल सिविल कार्यों के लिए छह करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। तीन करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है।
हर साल गिरती जा रही है रेटिंग
मऊ। रेटिंग के आंकड़ों पर गौर करें तो पहली बार स्वच्छता सर्वेक्षण 2016 में हुआ था। जिसमें मऊ नपा की स्थिति बदतर थी। 2017 के सर्वे में 370 वां स्थान पाया था, वहीं 2018 में प्रदेश में 14वां जबकि 2019 में केवल डंपिंग ग्राउंड न होने से 300 नंबर कटने के चलते प्रदेश में मऊ नगर पालिका की 11वीं रेटिंग आई थी। इसके बाद हर साल नगर पालिका की रेटिंग गिरते ही जा रही है। इसके चलते 2020 में प्रदेश में 17वें स्थान पर रही। जबकि स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में रेटिंग 28वीं थी तो 2022 में यह रैंकिंग 36 वीं तो 2023 में यह रेटिंग 42 वीं रही।