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मंजूरी मिली पर फायर स्टेशन नहीं बन सके
Fri, 29 Mar 2019 12:19 AM IST
पवन सिंह
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Published by: पवन सिंह
Updated Fri, 29 Mar 2019 12:19 AM IST
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आग
- फोटो : अमर उजाला
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गर्मी का मौसम आते ही अगलजी की घटनाओं को लेकर किसानों की चिंता बढ़ जाती है। तहसीलों में फायर स्टेशन न होने से आग पर काबू पाना मुश्किल होता है। हालांकि प्रशासन ने घोसी और मधुबन तहसालों में फायर स्टेशन स्थापना की स्वीकृति दे दी। चुनाव बाद इस पर अमल शुरू होगा। फिलहाल यहां फायर यूनिट की स्थापना कर आग पर काबू के प्रयास किए जाएंगे। अगलगी सीजन एक मार्च से शुरू हो गया है। विभाग की तरफ से व्यापक पैमाने पर जागरुकता कार्यक्रम शुरू न होने से लोगों को बचाव की प्राथमिक जानकारी का अभाव है। विभागीय अधिकारियों ने 70 जागरुकता कार्यक्रम आयोजित होने का दावा किया है।
गेहूं की फसल अंतिम स्टेज में पहुंच गई है। कुछ ही दिन में कटाई शुरू हो जाएगी। अगलगी की घटनाएं शुरू हो गई हैं, लेकिन इनसे बचाव के लिए विभाग की तरफ से ठोस कार्ययोजना तक तैयार नहीं की जा सकी है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो प्रत्येक तहसील में फायर यूनिट की तैनाती की गई है। प्रति यूनिट में सात कर्मचारियों की तैनाती है। शासन की तरफ से घोसी तथा मधुबन में फायर स्टेशन बनाए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसी बीच चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते प्रक्रिया ठंडे बस्ते में है।
अगलगी की घटनाओं पर नजर डाला जाए तो वर्ष 2017 में 183, वर्ष 2018 में 149 अगलगी की घटनाएं हुई थी। गत वर्ष शार्ट सर्किट से लाखों रुपये की गेहूं की फसल तथा संपत्ति जलकर स्वाहा गई थी। गत वर्ष जिले की चारों तहसीलों में हुई अगलगी घटनाओं में 191 लोगों को 871664 रुपये का मुआवजा प्रदान किया गया था।
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अगलगी की घटनाओं के मद्देनजर विभाग की तरफ से अभी तक ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई जा सकी है।
घर-घर पावरलूम के कारोबार के चलते नगर में अत्यधिक घनी बस्तियां हैं। यहां सैकड़ों की संख्या में कपड़ा उद्योग से संबंधित छोटे-बड़े कारखाने चलते हैं। प्रशासन की तरफ से इन घनी बस्तियों में आग से सुरक्षा के लिए 12 हाईडेंट बनाए गए। अधिकांश खराब पड़े हैं। इसके चलते पानी का फ्लो नहीं बन पाता।
किसान नेता देवप्रकाश राय, देवेंद्र सिंह, रणधीर सिंह, रामकेर यादव, महेंद्र सिंह का कहना है कि प्रतिवर्ष शार्ट सर्किट तथा अगलगी की घटनाओं से करोड़ों रुपये मूल्य की फसल तथा संपत्ति स्वाहा हो जाती है, लेकिन मुआवजा नहीं मिल पाता है।
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गेहूं की फसल अंतिम स्टेज में पहुंच गई है। कुछ ही दिन में कटाई शुरू हो जाएगी। अगलगी की घटनाएं शुरू हो गई हैं, लेकिन इनसे बचाव के लिए विभाग की तरफ से ठोस कार्ययोजना तक तैयार नहीं की जा सकी है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो प्रत्येक तहसील में फायर यूनिट की तैनाती की गई है। प्रति यूनिट में सात कर्मचारियों की तैनाती है। शासन की तरफ से घोसी तथा मधुबन में फायर स्टेशन बनाए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसी बीच चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते प्रक्रिया ठंडे बस्ते में है।
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अगलगी की घटनाओं पर नजर डाला जाए तो वर्ष 2017 में 183, वर्ष 2018 में 149 अगलगी की घटनाएं हुई थी। गत वर्ष शार्ट सर्किट से लाखों रुपये की गेहूं की फसल तथा संपत्ति जलकर स्वाहा गई थी। गत वर्ष जिले की चारों तहसीलों में हुई अगलगी घटनाओं में 191 लोगों को 871664 रुपये का मुआवजा प्रदान किया गया था।
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अगलगी की घटनाओं के मद्देनजर विभाग की तरफ से अभी तक ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई जा सकी है।
घर-घर पावरलूम के कारोबार के चलते नगर में अत्यधिक घनी बस्तियां हैं। यहां सैकड़ों की संख्या में कपड़ा उद्योग से संबंधित छोटे-बड़े कारखाने चलते हैं। प्रशासन की तरफ से इन घनी बस्तियों में आग से सुरक्षा के लिए 12 हाईडेंट बनाए गए। अधिकांश खराब पड़े हैं। इसके चलते पानी का फ्लो नहीं बन पाता।
किसान नेता देवप्रकाश राय, देवेंद्र सिंह, रणधीर सिंह, रामकेर यादव, महेंद्र सिंह का कहना है कि प्रतिवर्ष शार्ट सर्किट तथा अगलगी की घटनाओं से करोड़ों रुपये मूल्य की फसल तथा संपत्ति स्वाहा हो जाती है, लेकिन मुआवजा नहीं मिल पाता है।