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आंगनबाड़ी के बच्चों को भी मिलेगा एमडीएम
mau
Updated Sun, 29 Jul 2018 11:12 PM IST
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एमडीएम
- फोटो : अमर उजाला
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आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन से छह साल तक के बच्चों को दिए जाने वाले हॉट कुक्ड फूड को मिड-डे मील योजना से जोड़ा जाएगा। बेसिक शिक्षा और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की सहमति से इस योजना को जिले में संचालित करने की कवायद शुरू हो गई है। योजना के शुरु होने से सरकारी स्कूलों के बच्चों के साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को पुष्टाहार के साथ ताजा खाना मिल सकेगा।
जिले में 2581 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों में दो लाख 65 हजार बच्चे पढ़ते हैं। अब तक की व्यवस्था के मुताबिक आंगनबाड़ी वर्करों को तीन से छह साल तक के बच्चों के लिए ताजा खाना पकाकर लाना होता था, लेकिन उनके खाना पकाने के लिए कोई जगह नहीं थी। ऐसे में विभाग के पास तमाम शिकायतें थीं कि वर्कर खाना पकाकर ही नहीं लाईं और न ही यह बंटा। इस दिक्कत को दूर करने के लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग और बेसिक शिक्षा विभाग ने साथ मिलकर चलने का रास्ता तैयार किया है। 80 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्र प्राथमिक विद्यालयों में ही चलते हैं और स्कूली बच्चों को मिड-डे मील दिया जाता है। दोनों विभागों ने आंगनबाड़ी केंद्रों के तीन से छह साल तक के बच्चों को मिड-डे मील योजना से जोड़ने का रास्ता तैयार किया है।
विभागीय अधिकारी के अनुसार योजना का संचालन सितंबर से शुरू किया जा सकता है। योजना शुरू होने पर स्कूलों के किचन, गैस और राशन का इस्तेमाल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तीन से छह साल के बच्चों को दिए जाने वाले भोजन को बनाने में करेंगी। राशन और गैस आदि का भुगतान बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग बेसिक शिक्षा विभाग को करेगा। इसके लिए विभाग द्वारा सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का खाता खोला जा रहा है। अभी तक 1200 आंनगबाड़ी कार्यकर्ताओं के खाते खोले जा चुके हैं।
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जिले में 2581 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों में दो लाख 65 हजार बच्चे पढ़ते हैं। अब तक की व्यवस्था के मुताबिक आंगनबाड़ी वर्करों को तीन से छह साल तक के बच्चों के लिए ताजा खाना पकाकर लाना होता था, लेकिन उनके खाना पकाने के लिए कोई जगह नहीं थी। ऐसे में विभाग के पास तमाम शिकायतें थीं कि वर्कर खाना पकाकर ही नहीं लाईं और न ही यह बंटा। इस दिक्कत को दूर करने के लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग और बेसिक शिक्षा विभाग ने साथ मिलकर चलने का रास्ता तैयार किया है। 80 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्र प्राथमिक विद्यालयों में ही चलते हैं और स्कूली बच्चों को मिड-डे मील दिया जाता है। दोनों विभागों ने आंगनबाड़ी केंद्रों के तीन से छह साल तक के बच्चों को मिड-डे मील योजना से जोड़ने का रास्ता तैयार किया है।
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विभागीय अधिकारी के अनुसार योजना का संचालन सितंबर से शुरू किया जा सकता है। योजना शुरू होने पर स्कूलों के किचन, गैस और राशन का इस्तेमाल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तीन से छह साल के बच्चों को दिए जाने वाले भोजन को बनाने में करेंगी। राशन और गैस आदि का भुगतान बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग बेसिक शिक्षा विभाग को करेगा। इसके लिए विभाग द्वारा सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का खाता खोला जा रहा है। अभी तक 1200 आंनगबाड़ी कार्यकर्ताओं के खाते खोले जा चुके हैं।
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