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एंबुलेंस चालक हड़ताल पर, मरीज परेशान
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कोपागंज थाना क्षेत्र के बापू इंटर कालेज के मैदान पर हड़ताल के बाद प्रदर्शन करते 102 और 108 एंबुलेंस क?
- फोटो : MAU
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मऊ। प्रत्येक वर्ष एंबुलेंस चालकों के वेतन में 12 फीसदी इंक्रीमेंट देने और निकाले गए चालकों को वापस लेने सहित विभिन्न मांगों के पूरा न होने से नाराज जिले के सैकड़ों चालक व सह चालक सोमवार से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इनके हड़ताल पर चले जाने से जनपद की सभी 102 एवं 108 नंबर की एंबुलेंस की सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। इसके चलते गंभीर मरीजों को इलाज के लिए निजी साधनों का सहारा लेना पड़ा। इस अधिकांश मरीज व तीमारदार परेशान नजर आए।
बता दें कि लखनऊ में प्रदेश नेतृत्व और अफसरों के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रहा। इस पर उप्र एंबुलेंस चालक संघ के प्रांतीय नेतृत्व ने सोमवार से प्रदेश के सभी एंबुलेंस चालक एवं सह चालकों से अनिश्चितकालीन हड़ताल करने का निर्देश दिया है। इसी के निमित्त एंबुलेंस चालक संघ के बैनर तले मऊ में एंबुलेंस चालकों ने हड़ताल किया। इस दौरान जिले के 102 एंबुलेंस के 27 और 108 एंबुलेंस के 23 और तीन एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस के 200 से ज्यादा चालक और सह चालकों ने पहले जिला अस्पताल में विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद सभी एबुलेंस को कोपागंज ब्लॉक के बापू इंटर कॉलेज के मैदान में खड़ाकर अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए। चालकों का आरोप था कि 2015 में नियुक्ती के समय कंपनी द्वारा हमसे कहा गया कि हर साल वेतन में 12 प्रतिशत इंक्रीमेंट लगेगा, लेकिन इंक्रीमेंट तो दूर की बात है। तीन महीने से वेतन तक नहीं मिला। बोले कि भले ही हम 8 से 10 घंटे क्यों न हम गाड़ी में मौजूद रहे उसका कोई मोल नहीं। चालकों ने मांग कि कंपनी द्वारा शुरू पायलट प्रोजेक्ट को बंद किया जाए, साथ ही चालकों का मानदेय में बढ़ोत्तरी के साथ लंबित मानदेय का भुगतान किया जाए। इसके साथ निकाले गए चालक को वापस लेने की मांग की। वहीं चालकों की नियुक्ति ठेकेदारी प्रथा से हटाकर सीधे स्वास्थ्य विभाग से जोड़ दिया जाए। जिससे उनका शोषण बंद हो। इसके साथ ही अन्य कर्मियों की भांति एंबुलेंस चालकों को भी राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और 18 हजार मानदेय दिया जाए। कहा कि कर्मचारियों की भांति आठ घंटे की ड्यूटी ली जाए। इसके साथ मानदेय भी कम है। समान कार्य का समान वेतन दिया जाए। उधर, एंबुलेंस चालकों के हड़ताल के चलते मरीजों को काफी दिक्कतें हुईं। यहां तक की गर्भवती महिलाओं को लाने वाले एंबुलेंस 102 पर फोन करने के बाद भी कई जगहों पर एंबुलेंस नहीं पहुंची तो लोगों ने प्राईवेट वाहनों का सहारा लिया।
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बता दें कि लखनऊ में प्रदेश नेतृत्व और अफसरों के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रहा। इस पर उप्र एंबुलेंस चालक संघ के प्रांतीय नेतृत्व ने सोमवार से प्रदेश के सभी एंबुलेंस चालक एवं सह चालकों से अनिश्चितकालीन हड़ताल करने का निर्देश दिया है। इसी के निमित्त एंबुलेंस चालक संघ के बैनर तले मऊ में एंबुलेंस चालकों ने हड़ताल किया। इस दौरान जिले के 102 एंबुलेंस के 27 और 108 एंबुलेंस के 23 और तीन एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस के 200 से ज्यादा चालक और सह चालकों ने पहले जिला अस्पताल में विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद सभी एबुलेंस को कोपागंज ब्लॉक के बापू इंटर कॉलेज के मैदान में खड़ाकर अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए। चालकों का आरोप था कि 2015 में नियुक्ती के समय कंपनी द्वारा हमसे कहा गया कि हर साल वेतन में 12 प्रतिशत इंक्रीमेंट लगेगा, लेकिन इंक्रीमेंट तो दूर की बात है। तीन महीने से वेतन तक नहीं मिला। बोले कि भले ही हम 8 से 10 घंटे क्यों न हम गाड़ी में मौजूद रहे उसका कोई मोल नहीं। चालकों ने मांग कि कंपनी द्वारा शुरू पायलट प्रोजेक्ट को बंद किया जाए, साथ ही चालकों का मानदेय में बढ़ोत्तरी के साथ लंबित मानदेय का भुगतान किया जाए। इसके साथ निकाले गए चालक को वापस लेने की मांग की। वहीं चालकों की नियुक्ति ठेकेदारी प्रथा से हटाकर सीधे स्वास्थ्य विभाग से जोड़ दिया जाए। जिससे उनका शोषण बंद हो। इसके साथ ही अन्य कर्मियों की भांति एंबुलेंस चालकों को भी राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और 18 हजार मानदेय दिया जाए। कहा कि कर्मचारियों की भांति आठ घंटे की ड्यूटी ली जाए। इसके साथ मानदेय भी कम है। समान कार्य का समान वेतन दिया जाए। उधर, एंबुलेंस चालकों के हड़ताल के चलते मरीजों को काफी दिक्कतें हुईं। यहां तक की गर्भवती महिलाओं को लाने वाले एंबुलेंस 102 पर फोन करने के बाद भी कई जगहों पर एंबुलेंस नहीं पहुंची तो लोगों ने प्राईवेट वाहनों का सहारा लिया।
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