{"_id":"5c2f8f4ebdec22571a17cebd","slug":"81546620750-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्जी आधार पर जिले में हो रहा राशन का उठान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फर्जी आधार पर जिले में हो रहा राशन का उठान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ। ई-पाश मशीन लगने के बाद पता चला कि मऊ के साथ पूरे प्रदेश में फर्जी आधार के जरिए सरकारी खाद्यान्नों का उठान किया जा रहा था। विभाग के द्वारा मॉनिटरिंग करने पर यह तथ्य सामने आया है, इस गोलमाल से मऊ जिला अछूता नहीं है। विभाग की दलील है कि वर्ष 2014 में लापरवाही से हुई आधार फीडिंग के दौरान यह गड़बड़ी हुई है, शिकायतों के आधार पर इस गड़बड़ी को सीड प्रक्रिया के जरिए सुधारा जा रहा है। जल्द ही गड़बड़ी दूर होगी।
विभाग से मिले आंकड़े के अनुसार मऊ जिले में पात्र गृहस्थी के कुल 397690 कार्ड धारक हैं। इन कार्डों के आधार पर जिले में सोलह लाख 31 हजार 458 यूनिट राशन पात्र गृहस्थी का उठान होता है। लेकिन ई-पाश मशीन के लिए की गई फीडिंग में कोटेदारों ने खेल किया। इसका परिणाम है कि विभागीय मिलीभगत से गलत आधार नंबर लगाकर जिले में 116751 फर्जी कार्ड तैयार किए गए। मॉनिटरिंग और जांच के दौरान खाद्य रसद विभाग के मुुख्यालय से इस गड़बड़ी को पकड़ा गया। इन फर्जी कार्डोँ के जरिए प्रतिमाह कुल यूनिट का 7.16 यूनिट खाद्यान का उठान किया जा रहा है।
जिला पूर्ति अधिकारी नरेंद्र तिवारी ने माना कि फीडिंग के दौरान यह गड़बड़ी हुई है, गड़बड़ी को सुधारने के लिए सीड प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जल्द ही गड़बड़ी दूर होगी। नरेंद्र तिवारी की मानें तो नाम का ही आधार कार्ड फर्जी है, दरअसल राम के आधार का नंबर श्याम के नाम के सामने चढ़ गया है। इस तरह से राशन का वितरण सही तरीके से उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा है। बोले सीड के जरिए शिकायत मिलने पर उस पात्र गृहस्थ के कार्ड को निलंबित कर दिया जा रहा है। जब राशन नहीं मिल रहा तो कार्ड धारक सीधे उनके कार्यालय या फिर तहसील पर मौजूद पूर्ति निरीक्षक से मिल रहा है। इस दौरान उससे सत्यापित आधार कार्ड लेकर नाम फीड किया जा रहा है।
विज्ञापन
बोले 28 दिसंबर को यह जिला इस मामले में 75वें पायदान पर था, लेकिन सुधार होने पर आज 50 वें पायदान पर पहुंच गया है। जल्द ही पूरी समस्या का निराकरण हो जाएगा। जबकि विभागीय सूत्रों की मानें तो जब ई-पाश मशीन लगाने की कवायद शुुरू हुई तो कोटेदारों ने विभाग से मिलकर खेल किया। इस दौरान कोटेदार खुद से उपभोक्ताओं के आधार कार्ड को संकलित कर उसे ऑन लाइन कराए। इससे यूनिट भी बढ़ गई और लूट पहले की तरह जारी रही। सब कुछ विभाग की मिलीभगत से किया गया।
विज्ञापन
विभाग से मिले आंकड़े के अनुसार मऊ जिले में पात्र गृहस्थी के कुल 397690 कार्ड धारक हैं। इन कार्डों के आधार पर जिले में सोलह लाख 31 हजार 458 यूनिट राशन पात्र गृहस्थी का उठान होता है। लेकिन ई-पाश मशीन के लिए की गई फीडिंग में कोटेदारों ने खेल किया। इसका परिणाम है कि विभागीय मिलीभगत से गलत आधार नंबर लगाकर जिले में 116751 फर्जी कार्ड तैयार किए गए। मॉनिटरिंग और जांच के दौरान खाद्य रसद विभाग के मुुख्यालय से इस गड़बड़ी को पकड़ा गया। इन फर्जी कार्डोँ के जरिए प्रतिमाह कुल यूनिट का 7.16 यूनिट खाद्यान का उठान किया जा रहा है।
विज्ञापन
जिला पूर्ति अधिकारी नरेंद्र तिवारी ने माना कि फीडिंग के दौरान यह गड़बड़ी हुई है, गड़बड़ी को सुधारने के लिए सीड प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जल्द ही गड़बड़ी दूर होगी। नरेंद्र तिवारी की मानें तो नाम का ही आधार कार्ड फर्जी है, दरअसल राम के आधार का नंबर श्याम के नाम के सामने चढ़ गया है। इस तरह से राशन का वितरण सही तरीके से उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा है। बोले सीड के जरिए शिकायत मिलने पर उस पात्र गृहस्थ के कार्ड को निलंबित कर दिया जा रहा है। जब राशन नहीं मिल रहा तो कार्ड धारक सीधे उनके कार्यालय या फिर तहसील पर मौजूद पूर्ति निरीक्षक से मिल रहा है। इस दौरान उससे सत्यापित आधार कार्ड लेकर नाम फीड किया जा रहा है।
विज्ञापन
बोले 28 दिसंबर को यह जिला इस मामले में 75वें पायदान पर था, लेकिन सुधार होने पर आज 50 वें पायदान पर पहुंच गया है। जल्द ही पूरी समस्या का निराकरण हो जाएगा। जबकि विभागीय सूत्रों की मानें तो जब ई-पाश मशीन लगाने की कवायद शुुरू हुई तो कोटेदारों ने विभाग से मिलकर खेल किया। इस दौरान कोटेदार खुद से उपभोक्ताओं के आधार कार्ड को संकलित कर उसे ऑन लाइन कराए। इससे यूनिट भी बढ़ गई और लूट पहले की तरह जारी रही। सब कुछ विभाग की मिलीभगत से किया गया।