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जातिवादी व्यवस्था से नहीं की जा सकती रामराज की कल्पना

Sun, 27 May 2018 12:52 AM IST
Updated Sun, 27 May 2018 12:52 AM IST
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जातिवादी व्यवस्था से नहीं की जा सकती रामराज की कल्पना
कोपागंज (मऊ)। जब तक समाज में जोड़ने की प्रक्रिया नहीं होगी, तब तक रामराज की कल्पना बेमानी होगी। जब भगवान श्रीराम वन की ओर चले तो निषादराज गूह, केवट, संतों, दलित शबरी से तथा राक्षसराज विभीषण और बंदर सुग्रीव से मिले। वह सभी को साथ जोड़े और तभी रामराज का निर्माण हो पाया। आज जब हम रामराज का सपना देख रहे हैं तो यह तभी संभव है जब हम पूरे समाज को जोड़कर चलें। जातिवाद से रामराज का निर्माण नहीं हो सकता। उक्त बातें शक्रवार की रात ग्रामसभा माफी लाड़नपुर के चेराराम का पूरा गांव में आयोजित सतचंडी महायज्ञ में चौथे दिन के प्रवचन में गाजीपुर से पधारे कथा वाचक नीरज शास्त्री ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा। नीरज शास्त्री ने कहा की भगवान श्रीराम क्षत्रिय समाज में जन्म लेने के बाद किसी क्षत्रिय से नहीं मिले, लेकिन अन्य जातियों के लोगों से जरूर मिले। इसलिए जरूरी है कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में ही समाज, व्यक्ति और देश का कल्याण हो सकता है। श्रीराम कथा कलियुग में कामधेनु के समान है। अगर कोई श्रद्धा से कथा का श्रवण करे तो उसके लिए कोई चीज दुर्लभ नहीं है। रामकथा सज्जन लोगों के लिए संजीवनी का काम करती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के कार्यों का जीवन पर सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। केवट संवाद का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि जब भगवान कहते हैं कि केवट तुम बताओ की नाव में बैठाओगे या नहीं, क्योंकि हमें देर हो रही है और हमें जाना है। केवट कहते हैं प्रभु तुम्हारे चरण कमलों की धूल के लिए सब लोग कहते हैं कि वह मनुष्य बना देने वाली कोई जड़ी बूटी है। जिसमें छूते ही पत्थर की शिला अहिल्या स्त्री बन गई। मेरी नाव तो लकड़ी की है और काठ पत्थर से ज्यादा कठोर तो होता नहीं। मेरी नाव भी मुनि की स्त्री हो जाएगी या उड़ जाएगी और मैं लुट जाऊंगा। मैं तो इसी नाव के सहारे परिवार का पालन पोषण करता हूं। केवट ने कहा जौं प्रभू पार अवसिगा चहहूं। मोहि पद पखारन कहहू। अर्थात प्रभु! यदि तुम अवश्य ही पार जाना चाहते हो तो मुझे पहले अपने चरण कमल पखारने के लिए कह दो। रामचंद्र जी केवट से मुस्कुराकर बोले भाई तू वही कर जिससे तेरी नाव में कोई नुकसान न हो। अंत में केवट कहता है हे प्रभु मैं तुम्हें पार लगाता हूं। तुम मुझे पार लगाना। केवट और भगवान राम के संबाद सुन श्रद्धालु भावविभोर हो गए। इस दौरान कार्यक्रम के आयोजक जवाहर तिवारी, विनोद तिवारी, राजेश राय, पियूष राय, नरेंद्र राय, धर्मेंद्र तिवारी, अजीत पांडेय, समीर तिवारी, नवीन सिंह, अमित आदि लोग उपस्थिति रहे।
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