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छह राजस्व गांवों में जगी विकास की उम्मीद
Updated Mon, 19 Feb 2018 10:12 PM IST
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मधुबन। पिछले एक साल से उपेक्षित पड़े छह राजस्व गांवों में अब फिर विकास की उम्मीद जगी है। शासन ने इन राजस्व गांवों को ग्राम सभा कटघरा शंकर में शामिल कर दिया है।इससे लोगों में खुशी का माहौल है।
विकास खंड फतेहपुर मंडाव अंतर्गत ग्रामसभा सुल्तानपुर बारहगांवा के अलावा ग्रामसभा छपरा भंगी, उफरौली और ककराडीह गांव को मिलाकर नगर पंचायत बनाया गया था। लेकिन इनके छह राजस्व गांव न तो नगर पंचायत में शामिल हुए और न ही इन्हें अब तक किसी गांव से जोड़ा जा सका था। जिससे इन गांवों में विकास कार्य ठप हो गया था। जिसमें ग्रामसभा छपरा भंगी का कमरौली, मनौली और नहिला तथा उफरौली का चक गोपाल, तिवारी चक और आराजी जजौली आदि राजस्व गांव नगर पंचायत में नहीं जोड़े जाने से लावारिश पड़ा था। जिसमें वर्षो से कोई विकास कार्य नहीं हो पा रहा था। लेकिन अब इन लावारिस गांवों को अपनी एक ग्राम सभा मिल गई है। इन सभी राजस्व गांवों को ग्रामसभा कटघरा शंकर से जोड़ने का निर्देश शासन से आया है। इसकी पुष्टि एडीओ पंचायत गुलाब चंद गुप्त ने भी किया है।
बता दें कि लगभग दो वर्ष पूर्व सपा सरकार में सुल्तानपुर बारह गांवा, छपरा भंगी, उफरौली और नवसृजित ग्रामसभा ककराडीह को मिलाकर मधुबन को नगर पंचायत का दर्जा मिला था। लेकिन उफरौली और छपरा भंगी के छह पुरवे एक तरह से लावारिश हो गए थे। क्योंकि इन ग्रामसभाओं के अधिकांश हिस्से नगर पंचायत में शामिल हो जाने से गांव के प्रधानों का पद तो चला ही गया इन राजस्व गांवों में विकास के लिए पैसा आना भी ठप हो गया था। अब शासन के इस कदम से इन गांवों में भी विकास की उम्मीद एक बार फिर जग गई है। इस संबंध में एडीओ पंचायत गुलाब चंद गुप्ता का कहना है कि इन सभी राजस्व गांवों को ग्रामसभा कटघराशंकर से जोड़ने का निर्देश शासन से आ गया है।
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विकास खंड फतेहपुर मंडाव अंतर्गत ग्रामसभा सुल्तानपुर बारहगांवा के अलावा ग्रामसभा छपरा भंगी, उफरौली और ककराडीह गांव को मिलाकर नगर पंचायत बनाया गया था। लेकिन इनके छह राजस्व गांव न तो नगर पंचायत में शामिल हुए और न ही इन्हें अब तक किसी गांव से जोड़ा जा सका था। जिससे इन गांवों में विकास कार्य ठप हो गया था। जिसमें ग्रामसभा छपरा भंगी का कमरौली, मनौली और नहिला तथा उफरौली का चक गोपाल, तिवारी चक और आराजी जजौली आदि राजस्व गांव नगर पंचायत में नहीं जोड़े जाने से लावारिश पड़ा था। जिसमें वर्षो से कोई विकास कार्य नहीं हो पा रहा था। लेकिन अब इन लावारिस गांवों को अपनी एक ग्राम सभा मिल गई है। इन सभी राजस्व गांवों को ग्रामसभा कटघरा शंकर से जोड़ने का निर्देश शासन से आया है। इसकी पुष्टि एडीओ पंचायत गुलाब चंद गुप्त ने भी किया है।
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बता दें कि लगभग दो वर्ष पूर्व सपा सरकार में सुल्तानपुर बारह गांवा, छपरा भंगी, उफरौली और नवसृजित ग्रामसभा ककराडीह को मिलाकर मधुबन को नगर पंचायत का दर्जा मिला था। लेकिन उफरौली और छपरा भंगी के छह पुरवे एक तरह से लावारिश हो गए थे। क्योंकि इन ग्रामसभाओं के अधिकांश हिस्से नगर पंचायत में शामिल हो जाने से गांव के प्रधानों का पद तो चला ही गया इन राजस्व गांवों में विकास के लिए पैसा आना भी ठप हो गया था। अब शासन के इस कदम से इन गांवों में भी विकास की उम्मीद एक बार फिर जग गई है। इस संबंध में एडीओ पंचायत गुलाब चंद गुप्ता का कहना है कि इन सभी राजस्व गांवों को ग्रामसभा कटघराशंकर से जोड़ने का निर्देश शासन से आ गया है।
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