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तीन महिलाओं के साथ सामूहिक दुराचार में पांच को दस वर्ष का कठोर कारावास
Updated Thu, 22 Mar 2018 12:52 AM IST
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मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर दो वीरनायक सिंह ने गैंग रेप के मामले में आरोपी बने पांच लोगों को सुनवाई के बाद दोषी पाया। इस दौरान सामूहिक दुराचार के मामले में पांचों को दस-दस वर्ष कारावास के साथ तीन-तीन हजार रुपया अर्थ दंड निर्धारित की। 20 वर्ष पूर्व पांचों आरोपियों ने तीन महिलाओं के साथ सामुहिक दुराचार की घटना को अंजाम दिया था। कोर्ट ने आदेश में बताया कि अर्थदंड न देने की दशा पर आरोपियों को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामला रानीपुर थाना क्षेत्र का है। मामले के अनुसार तीन महिलाओं को 27 मार्च 1998 की रात्रि में उठाकर ले जाकर उनके साथ सामूहिक दुराचार किया गया। पीड़िताओं की तहरीर पर रानीपुर थाना क्षेत्र के नई बाजार दरौरा गांव निवासी फरीद, शमसाबाद गांव निवासी देवी शरण गोड़ , नई बाजार दरौरा गांव निवासी नंदू पासी, सिराजुद्दीन और सोचन पासी को आरोपी बनाया गया। मामले में जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज हुई और विवेचना की जिम्मेदारी सीबीसीआईडी को सौपी गई। सीबीसीआईडी ने विवेचना के बाद आरोपियों के विरुद्व आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी नंदलाल और अभियोजन अधिकारी ने कुल 12 गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण फरीद, देवीशरण, नंदू पासी, सिराजुद्दीन और सोचन को गैरगरेप के मामले में मंगलवार को दोषी पाया था। बुधवार को सजा के प्रश्न पर सुनवाई के बाद सभी को दस-दस वर्ष का कठोर कारावास के साथ ही तीन-तीन हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। विनोद कुमार सिंह
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