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सगे भाईयों सहित पांच को उम्रकैद
Updated Mon, 10 Dec 2018 10:15 PM IST
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर दो सुरेश कुमार गुप्ता ने हत्या और गैरइरादतन हत्या का प्रयास के क्रास केस के अलग-अलग मामलों में नामजद 12 आरोपियों में सगे भाईयों सहित एक पक्ष के पांच लोगों को हत्या का दोषी पाते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई। साथ ही 26-26 हजार रुपया अर्थदंड लगाया। वहीं दूसरे पक्ष के दो लोगों को गैर इरादतन हत्या का प्रयास के मामले में दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष की सजा के साथ आठ-आठ हजार रूपया अर्थदंड निर्धारित किया। मामला मधुबन थाना क्षेत्र के परसिया जयराम गिरी गांव का है।
अभियोजन के अनुसार, एक पक्ष के बाबूराम यादव की तहरीर पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें रामचंद्र यादव, धर्मनाथ यादव, चंद्रशेखर यादव और रणधीर यादव पुत्रगण गिरजाशंकर यादव, बेचन यादव और राम अशीष यादव पुत्रगण बालेश्वर यादव, भरत यादव तथा रामवृज उर्फ रामवृक्ष यादव को नामजद किया गया। वहीं दूसरे पक्ष के रणधीर की तहरीर पर गैरइरादतन हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हुआ। इसमें सीताराम यादव और बाबूराम यादव पुत्रगण रत्तन यादव, शेषनाथ यादव तथा कल्पनाथ यादव को आरोपी बनाया गया। दोनों मामलों में पक्षों की ओर से कहा गया कि गन्ने के खेत में जानवर चले जाने की बात को लेकर 20 मई 2000 को दोनों पक्षों में मारपीट हुई। जिसमें एक पक्ष के बाबूराम, शेषनाथ यादव और परशुराम को चोटे आईं। चोट लगने से परशुराम की मौके पर ही मौत हो गई। दूसरे पक्ष के चंद्रशेखर और रामचंद्र यादव को चोटे आई। पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा पंजीकृत कर बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी ने एक पक्ष से बाबूराम यादव सहित कुल आठ तथा दूसरे पक्ष से रणधीर सहित कुल छह गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव में एक दूसरे की क्रस केस का हवाला देते हुए झूठे फंसाए जाने का कथन किया गया। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद एक पक्ष के रामचंद्र यादव ,धर्मनाथ यादव, बेचन यादव, राम अशीष यादव और भरत यादव को बल्वा, हत्या, मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाने का दोषी पाया। अभियुक्त रामवृज उर्फ रामबृक्ष को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया। दूसरे पक्ष के बाबूराम यादव और शेषनाथ यादव को मारपीट और गैरइरादतन हत्या का प्रयास का दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष की सजा के साथ ही कुल आठ-आठ हजार रूपया अर्थदंड निर्धारित किया। दौरान विचारण चंद्रशेखर यादव, सीताराम की मौत हो गई। वहीं रणधीर यादव और कल्पनाथ यादव के नाबालिक होने के चलते उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड गई ।
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अभियोजन के अनुसार, एक पक्ष के बाबूराम यादव की तहरीर पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें रामचंद्र यादव, धर्मनाथ यादव, चंद्रशेखर यादव और रणधीर यादव पुत्रगण गिरजाशंकर यादव, बेचन यादव और राम अशीष यादव पुत्रगण बालेश्वर यादव, भरत यादव तथा रामवृज उर्फ रामवृक्ष यादव को नामजद किया गया। वहीं दूसरे पक्ष के रणधीर की तहरीर पर गैरइरादतन हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हुआ। इसमें सीताराम यादव और बाबूराम यादव पुत्रगण रत्तन यादव, शेषनाथ यादव तथा कल्पनाथ यादव को आरोपी बनाया गया। दोनों मामलों में पक्षों की ओर से कहा गया कि गन्ने के खेत में जानवर चले जाने की बात को लेकर 20 मई 2000 को दोनों पक्षों में मारपीट हुई। जिसमें एक पक्ष के बाबूराम, शेषनाथ यादव और परशुराम को चोटे आईं। चोट लगने से परशुराम की मौके पर ही मौत हो गई। दूसरे पक्ष के चंद्रशेखर और रामचंद्र यादव को चोटे आई। पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा पंजीकृत कर बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी ने एक पक्ष से बाबूराम यादव सहित कुल आठ तथा दूसरे पक्ष से रणधीर सहित कुल छह गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव में एक दूसरे की क्रस केस का हवाला देते हुए झूठे फंसाए जाने का कथन किया गया। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद एक पक्ष के रामचंद्र यादव ,धर्मनाथ यादव, बेचन यादव, राम अशीष यादव और भरत यादव को बल्वा, हत्या, मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाने का दोषी पाया। अभियुक्त रामवृज उर्फ रामबृक्ष को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया। दूसरे पक्ष के बाबूराम यादव और शेषनाथ यादव को मारपीट और गैरइरादतन हत्या का प्रयास का दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष की सजा के साथ ही कुल आठ-आठ हजार रूपया अर्थदंड निर्धारित किया। दौरान विचारण चंद्रशेखर यादव, सीताराम की मौत हो गई। वहीं रणधीर यादव और कल्पनाथ यादव के नाबालिक होने के चलते उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड गई ।
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