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गैरइरादतन हत्या के मामले में पांच आरोपी दोषमुक्त
Updated Sun, 17 Sep 2017 12:27 AM IST
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मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर तीन लालचंद गुप्ता ने गैरइरादतन हत्या के मामले में पांच आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। मामला कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र का है।
मामले के अनुसार मीरपुर रहीमाबाद गांव निवासी दिनेश यादव पुत्र विध्यांचल की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें गांव के ही सुजीत तिवारी पुत्र राजेंद्र तिवारी, मनोज तिवारी और नितेश तिवारी पुत्र अरविंद तिवारी, शैलेंद्र पुत्र शिवपूजन, कृष्णमणि तिवारी पुत्र हरिशंकर और आलोक तिवारी पुत्र त्रिपुरारी तिवारी को आरोपी बनाया। वादी का आरोप है कि 16 फरवरी 2007 की रात में दस बजे आरोपीगण लाठी डंडा से वीरेंद्र यादव को मारपीट कर चोटें पहुंचाया। इलाज के दौरान वीरेंद्र यादव की मौत हो गई। वादी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने 18 फरवरी 2007 को रिपोर्ट दर्ज कर बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी हरिनरायन विश्वकर्मा ने वादी सहित कुल तीन गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से पैरवी करते हुए अधिवक्ता सूर्यनाथ यादव और विनोद कुमार सिंह ने तर्क दिया कि आरोपियों को रंजिशन झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण सुजीत तिवारी, नितेश तिवारी, शैलेंद्र, कृष्णमणि तिवारी और आलोक तिवारी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।आरोपी मनोज तिवारी की मौत हो गई थी। उनकी पत्रावली पहले ही अलग कर दी गई थी।
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मामले के अनुसार मीरपुर रहीमाबाद गांव निवासी दिनेश यादव पुत्र विध्यांचल की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें गांव के ही सुजीत तिवारी पुत्र राजेंद्र तिवारी, मनोज तिवारी और नितेश तिवारी पुत्र अरविंद तिवारी, शैलेंद्र पुत्र शिवपूजन, कृष्णमणि तिवारी पुत्र हरिशंकर और आलोक तिवारी पुत्र त्रिपुरारी तिवारी को आरोपी बनाया। वादी का आरोप है कि 16 फरवरी 2007 की रात में दस बजे आरोपीगण लाठी डंडा से वीरेंद्र यादव को मारपीट कर चोटें पहुंचाया। इलाज के दौरान वीरेंद्र यादव की मौत हो गई। वादी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने 18 फरवरी 2007 को रिपोर्ट दर्ज कर बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी हरिनरायन विश्वकर्मा ने वादी सहित कुल तीन गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से पैरवी करते हुए अधिवक्ता सूर्यनाथ यादव और विनोद कुमार सिंह ने तर्क दिया कि आरोपियों को रंजिशन झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण सुजीत तिवारी, नितेश तिवारी, शैलेंद्र, कृष्णमणि तिवारी और आलोक तिवारी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।आरोपी मनोज तिवारी की मौत हो गई थी। उनकी पत्रावली पहले ही अलग कर दी गई थी।
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