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मक्के की खेती से दोहरा फायदा उठा रहे किसान
Updated Wed, 27 Jun 2018 12:13 AM IST
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गेहूं की फसल कटने के बाद खाली पड़े खेतों में मक्का की खेती से किसान दोहरा फायदा उठा रहे हैं। मई माह में बोई गई मक्के की फसल अब तैयार हो चुकी है। किसान बाजारों में फसल को बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। अच्छी फसल से किसान फूले समा नहीं रहे हैं।
परदहां विकास खंड क्षेत्र के पिपरीडीह, भार, उस्मानपुर, रैकवारेडीह, सरेजा, कहिनौर, कुशमौर, पहाड़पुर, सुवराबोझ, पतिला अहिलाद, खरगजेपुर,सिंहाव सहित क्षेत्र के विभिन्न गांवों के किसान गेहूं की फसल कटने के बाद मक्का की खेती कर दोहरा लाभ लेते हैं।इसकी खेती से किसानों को अच्छी आमदनी होती है।मई माह में बोई गई मक्के की फसल जून के अंतिम सप्ताह में तैयार हो चुकी है। क्षेत्र के किसान फसल को अब बाजारो में बेच रहे है। शेष बचे अवशेष को हरे चारे के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र मऊ के कृषि वैज्ञानिक डॉ. पी एस पांडेय ने बताया कि गर्मी के सीजन में मक्के की खेती बहुत ही उपयोगी है।इसके कई फायदे किसानों को मिल रहे है। इस समय हरा भुट्टा बेहतर दाम में बिक रहा है।मक्के का पौधा हरा चारा के रूप में पशुओं को खिलाने के काम में आ रहा है।पशु आहार के रूप में भी मक्के के पौधे की उपयोगिता से ग्रामीण इलाको में चारा की कमी भी संबंधित किसान दूर कर ले रहे है।मक्के की फसल खेत की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।कृषि बिशेषज्ञ ओपी सिंह का कहना है कि मक्का महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। इसका उपयोग पशु चारे के रूप में किया जाता है। इसके उत्पादन का लगभग 26 प्रतिशत मनुष्य आहार, 11 प्रतिशत पशुओं के आहार, 48 प्रतिशत मुर्गी के आहार, 12 प्रतिशत औद्योगिक उत्पादन एवं शेष स्टार्च एवं बीज के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। इसके अलावा मक्का का प्रयोग कार्न फ्लेक्स, तेल निकालने में स्टार्च के लिए, पाप कॉर्न, बनाने आदि के रूप में भी किया जाता है।
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परदहां विकास खंड क्षेत्र के पिपरीडीह, भार, उस्मानपुर, रैकवारेडीह, सरेजा, कहिनौर, कुशमौर, पहाड़पुर, सुवराबोझ, पतिला अहिलाद, खरगजेपुर,सिंहाव सहित क्षेत्र के विभिन्न गांवों के किसान गेहूं की फसल कटने के बाद मक्का की खेती कर दोहरा लाभ लेते हैं।इसकी खेती से किसानों को अच्छी आमदनी होती है।मई माह में बोई गई मक्के की फसल जून के अंतिम सप्ताह में तैयार हो चुकी है। क्षेत्र के किसान फसल को अब बाजारो में बेच रहे है। शेष बचे अवशेष को हरे चारे के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र मऊ के कृषि वैज्ञानिक डॉ. पी एस पांडेय ने बताया कि गर्मी के सीजन में मक्के की खेती बहुत ही उपयोगी है।इसके कई फायदे किसानों को मिल रहे है। इस समय हरा भुट्टा बेहतर दाम में बिक रहा है।मक्के का पौधा हरा चारा के रूप में पशुओं को खिलाने के काम में आ रहा है।पशु आहार के रूप में भी मक्के के पौधे की उपयोगिता से ग्रामीण इलाको में चारा की कमी भी संबंधित किसान दूर कर ले रहे है।मक्के की फसल खेत की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।कृषि बिशेषज्ञ ओपी सिंह का कहना है कि मक्का महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। इसका उपयोग पशु चारे के रूप में किया जाता है। इसके उत्पादन का लगभग 26 प्रतिशत मनुष्य आहार, 11 प्रतिशत पशुओं के आहार, 48 प्रतिशत मुर्गी के आहार, 12 प्रतिशत औद्योगिक उत्पादन एवं शेष स्टार्च एवं बीज के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। इसके अलावा मक्का का प्रयोग कार्न फ्लेक्स, तेल निकालने में स्टार्च के लिए, पाप कॉर्न, बनाने आदि के रूप में भी किया जाता है।
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