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बायोमेट्रिक सिस्टम लगाने से कतरा रहा स्वास्थ्य विभाग
Updated Fri, 17 Nov 2017 11:38 PM IST
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मधुबन।शासन स्तर से अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति पर भले ही नई व्यवस्था (बायोमेट्रिक उपस्थिति) बनाई गई हो, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में यह सिस्टम कोई मायने नहीं रखता। स्थिति यह है कि आलाधिकारियों के स्तर से मुख्यालय समेत अन्य अस्पतालों में बायोमेट्रिक प्रणाली को नहीं लगाया गया है। ऐसे में बायोमेट्रिक प्रणाली नहीं लागू होने से डॉक्टरों एवं कर्मचारियों के स्तर से समय के अनुपालन का जमकर माखौल उड़ाया जा रहा है।
जबकि वहीं कुछ संस्थानों में इस प्रणाली के लग जाने से लोग समय से अपनी ड्यूटी निभा रहे है। लोगों का मानना है कि अगर सभी विभागों में बायोमेट्रिक प्रणाली लग जाती तो विभागों से लेटलतीफी और भ्रष्टाचारियों पर अंकुश लगाने में काफी मदद मिलती। सनद रहे कि शासन द्वारा सरकारी संस्थानों और प्रतिष्ठानों में बायोमेट्रिक प्रणाली लगाने के लिए बार-बार निर्देशित किया गया है। जिससे सरकारी महकमों में कार्य को समय पर पूर्ण किया जा सके और अधीनस्थ पर समय पर उपस्थित हो सके। लेकिन इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग का रवैया ठीक नहीं है। बायोमेट्रिक प्रणाली नहीं लगने से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर मंडाव, प्राथमिक चिकित्सालय मधुबन, दुबारी,सुग्गिचौरी, तिघरा, नेमडाड़ आदि अस्पतालों पर अधिकांश कर्मचारी के स्तर से लेटलतीफी जारी है। सुग्गिचौरी का अस्पताल अधिकांशत: फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित है। मधुबन में संविदा के डॉक्टर के अलावा अधीक्षक की तैनाती है। जबकि अधीक्षक का पद सीएचसी पर होता है और उनके लिए फतेहपुर मंडाव में आवास भी उपलब्ध है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक यहां के अधीक्षक फतेहपुर स्थित आवास में नहीं निवास करते है और मऊ मुख्यालय से ही आवागमन करते हैं। अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत और भी खराब है। वहीं शिक्षा विभाग पर नजर डाले तो इंटर कॉलेजों में लगभग अधिकांश जगहों पर बायोमेट्रिक प्रणाली लागू होने से सभी कर्मचारी समयानुसार अपनीे सेवा में हाजिर रहते है।
इनसेट
सीएमओ ने कहा कि बायोमेट्रिक सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कुछेक स्वास्थ्य केंद्रों पर लगा दिया गया है। अन्य स्वास्थ्य केंद्रों व अस्पतालों में जल्द ही लग दिया जायेगा।
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डॉ. सतीश सिंह, सीएमओ, मऊ।
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जबकि वहीं कुछ संस्थानों में इस प्रणाली के लग जाने से लोग समय से अपनी ड्यूटी निभा रहे है। लोगों का मानना है कि अगर सभी विभागों में बायोमेट्रिक प्रणाली लग जाती तो विभागों से लेटलतीफी और भ्रष्टाचारियों पर अंकुश लगाने में काफी मदद मिलती। सनद रहे कि शासन द्वारा सरकारी संस्थानों और प्रतिष्ठानों में बायोमेट्रिक प्रणाली लगाने के लिए बार-बार निर्देशित किया गया है। जिससे सरकारी महकमों में कार्य को समय पर पूर्ण किया जा सके और अधीनस्थ पर समय पर उपस्थित हो सके। लेकिन इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग का रवैया ठीक नहीं है। बायोमेट्रिक प्रणाली नहीं लगने से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर मंडाव, प्राथमिक चिकित्सालय मधुबन, दुबारी,सुग्गिचौरी, तिघरा, नेमडाड़ आदि अस्पतालों पर अधिकांश कर्मचारी के स्तर से लेटलतीफी जारी है। सुग्गिचौरी का अस्पताल अधिकांशत: फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित है। मधुबन में संविदा के डॉक्टर के अलावा अधीक्षक की तैनाती है। जबकि अधीक्षक का पद सीएचसी पर होता है और उनके लिए फतेहपुर मंडाव में आवास भी उपलब्ध है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक यहां के अधीक्षक फतेहपुर स्थित आवास में नहीं निवास करते है और मऊ मुख्यालय से ही आवागमन करते हैं। अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत और भी खराब है। वहीं शिक्षा विभाग पर नजर डाले तो इंटर कॉलेजों में लगभग अधिकांश जगहों पर बायोमेट्रिक प्रणाली लागू होने से सभी कर्मचारी समयानुसार अपनीे सेवा में हाजिर रहते है।
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सीएमओ ने कहा कि बायोमेट्रिक सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कुछेक स्वास्थ्य केंद्रों पर लगा दिया गया है। अन्य स्वास्थ्य केंद्रों व अस्पतालों में जल्द ही लग दिया जायेगा।
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डॉ. सतीश सिंह, सीएमओ, मऊ।