मऊ। सर्दी बीतने को है। लेकिन जिले के बेसिक शिक्षा विभाग से संबद्ध सरकारी विद्यालयों में 18 हजार 395 छात्र-छात्राओं को यूनिफार्म नहीं मिल सके हैं। कारण अभिभावकों के खातों में धनराशि का न आना बताया जा रहा है। जबकि विभागीय अधिकारी संक्रमण के चलते विद्यालयों के बंद रहने तथा चुनावी ड्यूटी बताकर मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं। हालांकि विभाग ने हफ्ते भर में प्रक्रियाएं पूरी करने का फरमान जारी किया है। जिले के परिषदीय, सहायता प्राप्त, मदरसा, समाज कल्याण सहित 1600 विद्यालयों में एक लाख 84 हजार 895 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। सरकार ने इस बार छात्रों को ड्रेस, स्वेटर, जूते, मौजे देने के बजाय उनके अभिभावकों के खातों में 1100 रुपये देने का निर्णय लिया। जिले में अक्तूबर माह से खातों में पैसा डालने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन फरवरी बीतने को है। अभी तक 1,66,500 बच्चों के अभिभावकों के खातों में पैसा पहुंच पाया है। अधिकारियों की मानें तो संक्रमण के चलते 13 फरवरी तक विद्यालयों के बंद रहने तथा शिक्षकों तथा अधिकारियों की चुनाव में ड्यूटी लगने के चलते सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। अब विद्यालयों के खुल जाने से सत्यापन प्रक्रिया तेज हो गई है। जिन अभिभावकों के खाते में पैसा ट्रांसफर नहीं हो पाया है। वह विद्यालयों तथा बैंकों में चक्कर लगा रहे हैं। ब्लाकवार मिले आंकड़ों के आधार पर 9855 विद्यालय स्तर, 434 खंड शिक्षा अधिकारी स्तर पर पेंडिंग चल रहा है। निदेशालय ने 2272 बच्चों का डाटा सस्पेक्टेड किया है। 5834 बच्चों का पैसा अभिभावकों के खाते में भेज दिया गया है। लेकिन संबंधित बैक में तकनीकी खामी की वजह से पैसा ट्रांसफर नहीं हो सका है। बीएसए डॉ. संतोष कुमार सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते विद्यालयों के बंद रहने तथा चुनाव ड्यूटी के चलते व्यवहारिक दिक्कते आई हैं। एक हफ्ते के अंदर प्रक्रिया पूरी करने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर दिया गया है।