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सज्जाद व अली असगर की शान में बच्चों ने की शब्बेदारी
Updated Wed, 18 Oct 2017 11:10 PM IST
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घोसी। नगर के बड़ा गांव शिया मोहल्ला स्थित जाफरी सहन के सामने से मंगलवार की रात आठ बजे के करीब इमामे सैय्यदे सज्जाद और अली असगर की शान में बच्चों ने शब्बेदारी की।
मौलाना रहबर रजा ने बताया कि अली असगर वह बच्चा है जो कर्बला से चला तो मात्र 18 दिन का था, कर्बला में 10 मोहर्रम को यह बच्चा 6 महीने का हो गया था, यजीदी आतंकवादियों ने इस 6 माह के बच्चे को तीन भाले के तीर से मारा उस जमाने में तीन भाले तीर का प्रयोग ऊंट मारने के लिए प्रयोग में लाया जाता था। इमामे हुसैन की शहादत के बाद उनके घरवालों को कैदी बना लिया गया। जिसमें सैय्यदे सज्जाद के गले में खारदार तोक, कमर में लंगर, हाथों में हथकड़ी, पैरों में बेड़ी पहना कर दर-दर घुमाया। इसी याद को लेकर यह बच्चे रातों में जग कर रसूल अल्लाह की बेटी फतीमा के लाल का पुरसा देते है। जुलूस के दरमियान लगभग 11:00 बजे इमामे सैय्यदे सज्जाद और छह महीने के बच्चे अली असगर के ताबूत की ज्यारत कराई गई । जिसमें कोपागंज की अंजुमन तिफलने हुसैनी और घोसी की अंजुमन असीराने कर्बला और अजादारे हुसैनी और सज्जादिया ने नौहा मातम किया। जिसे सुन कर लोगों की आंखें नम हुई। यह शब्बेदारी अपने परंपरागत रास्ते मदरसा हुसैनियां औरगुमती नगर से होते हुए दरगाहे मौला अब्बास पर देर रात लगभग 12:00 बजे समाप्त हुई। इस अवसर पर कमेटी तिफलने बनी हाशिम के बच्चे व मोमनीन बड़ा गांव के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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मौलाना रहबर रजा ने बताया कि अली असगर वह बच्चा है जो कर्बला से चला तो मात्र 18 दिन का था, कर्बला में 10 मोहर्रम को यह बच्चा 6 महीने का हो गया था, यजीदी आतंकवादियों ने इस 6 माह के बच्चे को तीन भाले के तीर से मारा उस जमाने में तीन भाले तीर का प्रयोग ऊंट मारने के लिए प्रयोग में लाया जाता था। इमामे हुसैन की शहादत के बाद उनके घरवालों को कैदी बना लिया गया। जिसमें सैय्यदे सज्जाद के गले में खारदार तोक, कमर में लंगर, हाथों में हथकड़ी, पैरों में बेड़ी पहना कर दर-दर घुमाया। इसी याद को लेकर यह बच्चे रातों में जग कर रसूल अल्लाह की बेटी फतीमा के लाल का पुरसा देते है। जुलूस के दरमियान लगभग 11:00 बजे इमामे सैय्यदे सज्जाद और छह महीने के बच्चे अली असगर के ताबूत की ज्यारत कराई गई । जिसमें कोपागंज की अंजुमन तिफलने हुसैनी और घोसी की अंजुमन असीराने कर्बला और अजादारे हुसैनी और सज्जादिया ने नौहा मातम किया। जिसे सुन कर लोगों की आंखें नम हुई। यह शब्बेदारी अपने परंपरागत रास्ते मदरसा हुसैनियां औरगुमती नगर से होते हुए दरगाहे मौला अब्बास पर देर रात लगभग 12:00 बजे समाप्त हुई। इस अवसर पर कमेटी तिफलने बनी हाशिम के बच्चे व मोमनीन बड़ा गांव के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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