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सदी शुरू होते ही जिले में बढ़ी स्मॉग की समस्या
Updated Mon, 29 Oct 2018 10:12 PM IST
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सर्दी शुरू होते ही स्मॉग की समस्या बढ़ने लगी है। बढ़ रहे वायु प्रदूषण सेहत के लिए खतरनाक साबित हो रहा। हवा में सूक्ष्म विषाक्त कणों की भारी मात्रा सांस एवं दिल के मरीजों के लिए आफत बन रही। वायु प्रदूषण 96 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पहुंच गया है। जबकि मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है।
जिले में तेजी से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। जनपद में फोर लेन तथा पूर्वांचल एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए 10 हजार पेड़ काटे गए, लेकिन आज तक उसकी भरपाई नहीं की जा सकी है। यही नहीं नगर के तमसा तट ग्रीन बेल्ट में कूड़ा डंप किया जा रहा है। कूड़ा जलाने से बेहद जहरीली गैस हवा की निचली परत में जम रही है। चिकित्सकों की मानें तो पॉलीथिन समेत तमाम रसायनिक पदार्थो के जलने से ग्रीन हाउस गैसें निकलती हैं। यही नहीं पुराने जनरेटर, बीस साल से ज्यादा पुराने वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिले में कंबाइन मशीनों से धान की फसल कटाई का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। किसान पराली भी जलाने लगे हैं। हालत यह है कि वायु प्रदूषण 96 माइक्रो ग्राम इस्क्वायर प्रति मीटर एस्क्वायर पहुंच गया है। जबकि मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है।
जीवनरेखा हास्पिटल के चेयरमैन डॉ. एसएन खत्री, जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार का कहना है कि स्मॉग में छिपे केमिकल के कण अस्थमा के अटैक की आशंका को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। स्मॉग से फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली ट्यूब में रुकावट, सूजन, रूखापन या कफ आदि के कारण भी समस्या होती है। बचाव के उपाय किए जाए तो समस्या से निजात मिल सकती है।
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बचाव के चिकित्सकों के टिप्स
-मॉर्निंग वॉक पर सुबह आठ बजे के बाद जाएं।
- हर घंटे कम से कम दो गिलास पानी जरूर पिएं।
- घर से बाहर निकलें तो मास्क लगाकर निकलें।
-कूड़े कचरे को न जलाएं, धुएं से होगी समस्या
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जिले में तेजी से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। जनपद में फोर लेन तथा पूर्वांचल एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए 10 हजार पेड़ काटे गए, लेकिन आज तक उसकी भरपाई नहीं की जा सकी है। यही नहीं नगर के तमसा तट ग्रीन बेल्ट में कूड़ा डंप किया जा रहा है। कूड़ा जलाने से बेहद जहरीली गैस हवा की निचली परत में जम रही है। चिकित्सकों की मानें तो पॉलीथिन समेत तमाम रसायनिक पदार्थो के जलने से ग्रीन हाउस गैसें निकलती हैं। यही नहीं पुराने जनरेटर, बीस साल से ज्यादा पुराने वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिले में कंबाइन मशीनों से धान की फसल कटाई का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। किसान पराली भी जलाने लगे हैं। हालत यह है कि वायु प्रदूषण 96 माइक्रो ग्राम इस्क्वायर प्रति मीटर एस्क्वायर पहुंच गया है। जबकि मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है।
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जीवनरेखा हास्पिटल के चेयरमैन डॉ. एसएन खत्री, जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार का कहना है कि स्मॉग में छिपे केमिकल के कण अस्थमा के अटैक की आशंका को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। स्मॉग से फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली ट्यूब में रुकावट, सूजन, रूखापन या कफ आदि के कारण भी समस्या होती है। बचाव के उपाय किए जाए तो समस्या से निजात मिल सकती है।
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बचाव के चिकित्सकों के टिप्स
-मॉर्निंग वॉक पर सुबह आठ बजे के बाद जाएं।
- हर घंटे कम से कम दो गिलास पानी जरूर पिएं।
- घर से बाहर निकलें तो मास्क लगाकर निकलें।
-कूड़े कचरे को न जलाएं, धुएं से होगी समस्या