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जागरुकता के नाम पर खानापूर्ति कर रहा अग्निशमन विभाग
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हर वर्ष अग्निशमन विभाग 14 अप्रैल से 20 अप्रैल तक लोगों को आग से बचाव के लिए अभियान चलाकर जागरूक करता है। लेकिन जागरूकता अभियान का असर कहीं दिख नहीं रहा है। अप्रैल माह में आगलगी की घटनाएं रोजाना हो रही हैं। इन घटनाओं में जानमाल की क्षति भी अधिक हो रही है।
अग्निशमन विभाग आग से बचाव के लिए 14 अप्रैल से एक सप्ताह तक विशेष अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करता है। इस दौरान लोगों को आग से बचाव की जानकारी देने वाले पोस्टर हैंड बिल वगैरह वितरित किया जाता है। माकड्रिल करके लोगों को आग पर काबू पाने के तरीके बताया जाता है। इन जागरूकता अभियानों के बाद भी अप्रैल और मई का महीने में इस वर्ष शार्ट सर्किट और अन्य कारणों से आगलगी की छोटी बड़ी113 घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं में हुई क्षति का लेखा जोखा भी विभाग के पास नहीं है। क्योंकि सभी स्थानों पर विभागीय कर्मचारी नहीं पहुंच पाते हैं। राजस्व विभाग के कर्मचारी भी आग से हुई क्षति का आंकलन करने में काफी सुस्ती बरतते हैं। काछी कला गांव के शिवनारायण राय कहते हैं कि यदि अग्निशमन विभाग पूरी संजीदगी से लोगों को जागरूक करें तो आगलगी की घटनाओं पर काफी अंकुश लग सकता है। कसारा के पूर्व प्रधान लेखराज कहते हैं कि मैने कभी भी अग्निशमन विभाग को बचाव के लिए लोगों को जागरूक करते नहीं देखा। इसी प्रकार सियरही बरजला के चंद्रजीत यादव कहते हैं कि विभाग अगर ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता तो आगलगी की घटनाओं में निश्चित कमी होती।
इनसेट
शहर में कई ऐसे शापिंग माल हैं जिनमें आग लग जाए तो जन धन की काफी क्षति हो जाएगी लेकिन इनमें आग से बचाव के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। इसके अलावा शहर के अंदर कई ऐसे शादी घर बनाए गए हैं तो प्लास्टर के कपडों से बने हैं। इन शादी घरों से निकलने के लिए केवल एक ही रास्ते हैं। आगलगी अथवा अन्य कोई घटना होने पर ये शादी घर लाक्षागृह साबित हो सकते हैं। इसी प्रकार कुछ बड़े स्कूल हैं जिनमें आग से बचाव के कोई उपाय नहीं हैं।
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समय समय पर शिविर लगाकर लोगों को आग से बचाव के प्रति जागरूक किया जाता है। स्कूलों में बच्चों और अभिभावकों को भी जागरूक किया जाता है। स्कूलों का निरीक्षण कर उन्हें गाइड लाइन के अनुरूप सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा जाता है। गाइड लाइन का अनुपालन न करने वालों को नोटिस भेजा जाता है। सुभाष कुमार, मुख्य अग्नि शमन अधिकारी, मऊ।
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अग्निशमन विभाग आग से बचाव के लिए 14 अप्रैल से एक सप्ताह तक विशेष अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करता है। इस दौरान लोगों को आग से बचाव की जानकारी देने वाले पोस्टर हैंड बिल वगैरह वितरित किया जाता है। माकड्रिल करके लोगों को आग पर काबू पाने के तरीके बताया जाता है। इन जागरूकता अभियानों के बाद भी अप्रैल और मई का महीने में इस वर्ष शार्ट सर्किट और अन्य कारणों से आगलगी की छोटी बड़ी113 घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं में हुई क्षति का लेखा जोखा भी विभाग के पास नहीं है। क्योंकि सभी स्थानों पर विभागीय कर्मचारी नहीं पहुंच पाते हैं। राजस्व विभाग के कर्मचारी भी आग से हुई क्षति का आंकलन करने में काफी सुस्ती बरतते हैं। काछी कला गांव के शिवनारायण राय कहते हैं कि यदि अग्निशमन विभाग पूरी संजीदगी से लोगों को जागरूक करें तो आगलगी की घटनाओं पर काफी अंकुश लग सकता है। कसारा के पूर्व प्रधान लेखराज कहते हैं कि मैने कभी भी अग्निशमन विभाग को बचाव के लिए लोगों को जागरूक करते नहीं देखा। इसी प्रकार सियरही बरजला के चंद्रजीत यादव कहते हैं कि विभाग अगर ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता तो आगलगी की घटनाओं में निश्चित कमी होती।
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शहर में कई ऐसे शापिंग माल हैं जिनमें आग लग जाए तो जन धन की काफी क्षति हो जाएगी लेकिन इनमें आग से बचाव के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। इसके अलावा शहर के अंदर कई ऐसे शादी घर बनाए गए हैं तो प्लास्टर के कपडों से बने हैं। इन शादी घरों से निकलने के लिए केवल एक ही रास्ते हैं। आगलगी अथवा अन्य कोई घटना होने पर ये शादी घर लाक्षागृह साबित हो सकते हैं। इसी प्रकार कुछ बड़े स्कूल हैं जिनमें आग से बचाव के कोई उपाय नहीं हैं।
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समय समय पर शिविर लगाकर लोगों को आग से बचाव के प्रति जागरूक किया जाता है। स्कूलों में बच्चों और अभिभावकों को भी जागरूक किया जाता है। स्कूलों का निरीक्षण कर उन्हें गाइड लाइन के अनुरूप सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा जाता है। गाइड लाइन का अनुपालन न करने वालों को नोटिस भेजा जाता है। सुभाष कुमार, मुख्य अग्नि शमन अधिकारी, मऊ।