फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   ‘पढ़े भारत बढ़े भारत’ योजना चढ़ी अनियमितता की भेंट

‘पढ़े भारत बढ़े भारत’ योजना चढ़ी अनियमितता की भेंट

Thu, 17 Jan 2019 10:14 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 17 Jan 2019 10:14 PM IST
विज्ञापन
‘पढ़े भारत बढ़े भारत’ योजना चढ़ी अनियमितता की भेंट
सर्व शिक्षा अभियान पर करोड़ों रुपया पानी की तरह बहाने के बाद भी बच्चों को योजना का लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है। सरकार की योजना ‘पढ़े भारत बढ़े भारत’ के तहत अब तक 200 विद्यालयों का चयन तो किया गया। लेकिन सही क्रियान्वयन न होने से योजना का लाभ अधिकांश विद्यालयों के बच्चों को नहीं मिल पा रहा। गोलमाल का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले की सामाजिक संस्था ‘भारत पुनरोत्थान अभियान’ के अध्यक्ष द्वारा की गई शिकायत पर शासन से मामले की जांच का आदेश एडी बेसिक को सौंपा गया है।
विज्ञापन

सरकार की तरफ से वर्ष 2017-18 में पढ़े भारत बढ़े भारत योजना लागू किया गया है, पहले वर्ष सौ विद्यालयों को इस योजना के तहत चयनित किया गया था। इस दौरान योजना को फलीभूत करने के लिए शासन से 16 हजार आठ सौ रुपया अवमुक्त किया गया था। इस दौरान धनराशि कम होने के कारण योजना पर कमोवेश काम हुुआ। लेकिन इस वर्ष इस योजना के लिए 19 हजार रुपया शासन से अवमुक्त किया गया। इस बार भी जिले के सौ विद्यालय चयनित किए गए। चयनित विद्यालयों के विद्यालय प्रबंध समितियों के खाते में यह राशि भेजी गई। लेकिन योजना के क्रियान्वयन में व्यापक पैमाने पर अनियमितता बरती गई है। इसका परिणाम है कि योजना के बाद भी जिले के अधिकांश विद्यालयों में लाइब्रेरी की रुपरेखा तैयार नहीं की जा सकी है। इसके चलते बच्चों को पढ़ने के लिए पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पा रही।
विज्ञापन

विभागीय सूत्रों की मानें तो लखनऊ के एक फर्म को पांच हजार रुपये की दर से सौ विद्यालयों पर किताब सप्लाई करने का जिम्मा विभाग की तरफ से दिया गया है। संस्था ने अभी पूरी आपूर्ति नहीं की है। इसके अलावा आठ हजार रुपये में किताबों को रखने के लिए आलमारी मंगानी है। शेष धनराशि से लर्निंग और रीडिंग कार्नर बनाया जाना है, लेकिन इन्हें भी अभी तक नहीं बनाया जा सका है। बताते चले जिले में 1060 प्राथमिक विद्यालय तथा पांच कस्तूरबा गांधी विद्यालय मौजूद हैं। प्रत्येक ब्लाक से विद्यालयों का चयन किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन



केस नंबर एक
वलीदपुर। मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र के पलिगढ़ स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में पुस्तकें क्रय कर ली गई है, लेकिन आलमारी की खरीद नहीं हुई है। रीडिंग कार्नर की सुविधा नहीं है। वार्डेन रीता देवी का कहना है कि बीआरसी से किताबें आई गई है, लेकिन आलमारी के बारे में लेखाकार ही बता सकते हैं।


केस नंबर दो
वलीदपुर। मुहम्मदाबादगोहना तहसील क्षेत्र के पीरुआ स्थित प्राथमिक विद्यालय में किताबें खरीद ली गई हैं, लेकिन रीडिंग कार्डर के लिए डेस्क बेंच आदि की खरीद नहीं हुई है। प्रधानाध्यापक राजमनिराम का कहना है कि बीआरसी से किताबें मिल गई हैं, लेकिन आलमारी सहित अन्य सामानों की खरीद नहीं की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed