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72 गांव ओडीएफ घोषित, पर धरातल पर नहीं दिख रहा असर
Updated Sun, 16 Dec 2018 10:11 PM IST
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घोसी। ब्लॉक की सभी 72 ग्राम सभाओं को दो अक्तूबर को कागजों पर ओडीएफ घोषित कर दिया। लेकिन ब्लॉक के गांवों की तस्वीर पहले जैसी ही है। लोग खुले में ही शौच के लिए जा रहे हैं। जो स्थिति पांच साल पहले वह आज भी वही है। उतनी ही गंदगी अब भी दिख जाती है। वैसे भी विभाग ने 12752 के सापेक्ष अभी मात्र 12 हजार शौचालय बनवाने का दावा किया है। लेकिन जो शौचालय बने भी हैं वह उपयोग में नहीं लाए जा रहे हैं।
स्वच्छता अभियान के तहत ब्लाक के सभी 72 ग्राम पंचायतों में 12752 शौचालय बनवाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।12752 परिवारों का चयन भी कर लिया गया था। ग्राम पंचायत विभाग के अनुसार अब तक केवल 12 हजार शौचालय बनवाए जा सके हैं। हालांकि बेस लाइन सर्वे 2012 के अनुसार सात हजार नए परिवार ऐसे मिले हैं। इन लोगों ने भी शौचालयों के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है। इसके बाद एसडीएम, बीडीओ, तहसीलदार, प्रधान के साथ लोगों ने कई दिनों तक गांव में चिह्नित स्थानों पर मॉर्निंग फालोअप किया गया। फिर भी लोग खुले में शौच से बाज नहीं आ रहे हैं। ब्लाक के माछिल जमीन माछिल, सेमरी जमालपुर, लखनी मुबारकपुर, माउरबोझ, मिश्रौली, मदापुर, पिड़वल, अकोल्ही आदि गांवों से गुजरने वाली नहरों और सड़कों के किनारे लोगों के खुले में शौच करने से भीषण गंदगी देखी जा सकती है।
प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष विवेकानंद यादव कहते हैं कि पहले जहां 30 प्रतिशत जागरूकता थी। अब बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई है। खुले में शौचमुक्त के लिए लोगों में सोच में परिवर्तन की आवश्यकता है। आरटीईआई कार्यकर्ता अरविंद मूर्ति कहते हैं कि गांव के लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है। वैसे भी विभागीय कवायद दिखावा अधिक धरातल पर कम होती है।
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कोट
ग्राम प्रधानों और सेक्रेटरियों , सफाई कर्मियों को गांव वासियों को जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई है। मार्निंग फालोअप के माध्यम से गांव के लोगों में जागरूकता करके शौचालयों के उपयोग पर बल दिया है। लोग जागरूक हो रहे हैं। हृदयेश पांडेय, एडीओ पंचायत
स्वच्छता अभियान के तहत ब्लाक के सभी 72 ग्राम पंचायतों में 12752 शौचालय बनवाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।12752 परिवारों का चयन भी कर लिया गया था। ग्राम पंचायत विभाग के अनुसार अब तक केवल 12 हजार शौचालय बनवाए जा सके हैं। हालांकि बेस लाइन सर्वे 2012 के अनुसार सात हजार नए परिवार ऐसे मिले हैं। इन लोगों ने भी शौचालयों के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है। इसके बाद एसडीएम, बीडीओ, तहसीलदार, प्रधान के साथ लोगों ने कई दिनों तक गांव में चिह्नित स्थानों पर मॉर्निंग फालोअप किया गया। फिर भी लोग खुले में शौच से बाज नहीं आ रहे हैं। ब्लाक के माछिल जमीन माछिल, सेमरी जमालपुर, लखनी मुबारकपुर, माउरबोझ, मिश्रौली, मदापुर, पिड़वल, अकोल्ही आदि गांवों से गुजरने वाली नहरों और सड़कों के किनारे लोगों के खुले में शौच करने से भीषण गंदगी देखी जा सकती है।
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प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष विवेकानंद यादव कहते हैं कि पहले जहां 30 प्रतिशत जागरूकता थी। अब बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई है। खुले में शौचमुक्त के लिए लोगों में सोच में परिवर्तन की आवश्यकता है। आरटीईआई कार्यकर्ता अरविंद मूर्ति कहते हैं कि गांव के लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है। वैसे भी विभागीय कवायद दिखावा अधिक धरातल पर कम होती है।
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ग्राम प्रधानों और सेक्रेटरियों , सफाई कर्मियों को गांव वासियों को जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई है। मार्निंग फालोअप के माध्यम से गांव के लोगों में जागरूकता करके शौचालयों के उपयोग पर बल दिया है। लोग जागरूक हो रहे हैं। हृदयेश पांडेय, एडीओ पंचायत