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रेलवे के लिंक रोड निर्माण कार्य में वन विभाग का अड़ंगा
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मऊ। रेलवे की तरफ से समपारों (फाटक विहीन रेलवे क्रासिंग )को बंद करने के बाद आवागमन को बहाल करने के लिए छह माह पूर्व 11.17 करोड़ की लागत से 10.200 किमी लंबी लिंक रोड निर्माण कार्य शुरू किया गया। रेलवे द्वारा पत्र जारी करने पर वन विभाग ने रेलवे को पेड़ लगने का हवाला दिया। इससे निर्माण कार्य ठप हो गया है। जबकि जमीन रेलवे की है, जिसे वन विभाग को लीज पर रेलवे ने दिया है।
मऊ-बलिया मार्ग, इंदारा-दोहरीघाट मार्ग पर रेल मार्ग पर रेलवे की तरफ से 12 समपार को बंद कर दिया गया। इसके चलते लगभग 20 गांव के लोगों को काफी घूमकर आना जाना पड़ता है। कृषि कार्य के लिए लोगों को जान जोखिम में डालकर रेल लाइन पार करनी पड़ रही है। ग्रामीणों की मांग पर रेलवे ने छह माह पूर्व रसूलपुर गड़िया, कराबाद, चकरा रोड, रतनपुरा, बड़ागांव, अमिला, अहिरानी, केलाराम का पुरा, टड़ियांव सहित 20 गांवों से होते हुए 11.17 करोड़ की लागत से 10.200 किमी लंबी लिंक रोड निर्माण कार्य शुरू किया तो ग्रामीणों में विकास की आस जगी, लेकिन वन विभाग की तरफ से पेड़ का हवाला देकर कार्य रोक देने के चलते लोगों के सपने पर ग्रहण लग गया है। निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए रेलवे ने तमाम पत्र वन विभाग को लिखा, लेकिन वन विभाग के अधिकारी तकनीकी पेंच लगा दे रहे हैं। हालत यह है कि निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो सका है। सड़क निर्माण कार्य रुक जाने से विकास गति थम सी गई है। जबकि रेलवे ने अपनी जमीन को वन विभाग को लीज पर दिया है। रेलवे के अधिकारियों की मानें तो लिंक रोड निर्माण में पड़ने वाले पेड़ों को कटवाने के लिए वन विभाग को सर्वे करने के लिए कई पत्र भेजा गया। लेकिन आज तक पेड़ों को कटवाना तो दूर सर्वे तक नहीं किया जा सका है।
अविलंब शुरू किया जाए लिंक रोड निर्माण कार्य
मऊ। रेलवे की तरफ से समपारों को बंद करने के बाद आवागमन को बहाल करने के लिए रेलवे की तरफ से बनाए जा रहे लिंक रोड निर्माण कार्य में वन विभाग के अड़ंगा डाले जाने से ग्रामीणों में आक्रोश पनप रहा है। इस संबंध में डॉ. हंसराज सिंह, डॉ. एचएन सिंह पटेल, लालचंद सिंह, संतोष यादव का कहना है कि समपारों को बंद होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे द्वारा लिंक रोड निर्माण कार्य शुरू तो किया गया लेकिन वन विभाग द्वारा रोक दिए जाने से करोड़ों का प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में है। प्रोजेक्ट को अविलंब शुरू किया जाए।
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क्या कहते हैं अधिकारी
सहायक मंडल इंजीनियर पश्चिम एके श्रीवास्तव का कहना है कि लिंक रोड निर्माण के दौरान पड़ने वाले पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग को कई पत्र भेजा जा चुका है।
वर्जन
डीएफओ संजय विश्वाल का कहना है कि 11.17 करोड़ की लागत से 10.200 किमी लंबी लिंक रोड निर्माण कार्य के मामले में रेलवे की जमीन पर वन विभाग की तरफ से पेड़ लगाए गए हैं। रेलवे की तरफ से मांगी गई एनओसी शासन को भेजा गया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही रेलवे को एनओसी दे दी जाएगी।
मऊ-बलिया मार्ग, इंदारा-दोहरीघाट मार्ग पर रेल मार्ग पर रेलवे की तरफ से 12 समपार को बंद कर दिया गया। इसके चलते लगभग 20 गांव के लोगों को काफी घूमकर आना जाना पड़ता है। कृषि कार्य के लिए लोगों को जान जोखिम में डालकर रेल लाइन पार करनी पड़ रही है। ग्रामीणों की मांग पर रेलवे ने छह माह पूर्व रसूलपुर गड़िया, कराबाद, चकरा रोड, रतनपुरा, बड़ागांव, अमिला, अहिरानी, केलाराम का पुरा, टड़ियांव सहित 20 गांवों से होते हुए 11.17 करोड़ की लागत से 10.200 किमी लंबी लिंक रोड निर्माण कार्य शुरू किया तो ग्रामीणों में विकास की आस जगी, लेकिन वन विभाग की तरफ से पेड़ का हवाला देकर कार्य रोक देने के चलते लोगों के सपने पर ग्रहण लग गया है। निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए रेलवे ने तमाम पत्र वन विभाग को लिखा, लेकिन वन विभाग के अधिकारी तकनीकी पेंच लगा दे रहे हैं। हालत यह है कि निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो सका है। सड़क निर्माण कार्य रुक जाने से विकास गति थम सी गई है। जबकि रेलवे ने अपनी जमीन को वन विभाग को लीज पर दिया है। रेलवे के अधिकारियों की मानें तो लिंक रोड निर्माण में पड़ने वाले पेड़ों को कटवाने के लिए वन विभाग को सर्वे करने के लिए कई पत्र भेजा गया। लेकिन आज तक पेड़ों को कटवाना तो दूर सर्वे तक नहीं किया जा सका है।
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अविलंब शुरू किया जाए लिंक रोड निर्माण कार्य
मऊ। रेलवे की तरफ से समपारों को बंद करने के बाद आवागमन को बहाल करने के लिए रेलवे की तरफ से बनाए जा रहे लिंक रोड निर्माण कार्य में वन विभाग के अड़ंगा डाले जाने से ग्रामीणों में आक्रोश पनप रहा है। इस संबंध में डॉ. हंसराज सिंह, डॉ. एचएन सिंह पटेल, लालचंद सिंह, संतोष यादव का कहना है कि समपारों को बंद होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे द्वारा लिंक रोड निर्माण कार्य शुरू तो किया गया लेकिन वन विभाग द्वारा रोक दिए जाने से करोड़ों का प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में है। प्रोजेक्ट को अविलंब शुरू किया जाए।
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क्या कहते हैं अधिकारी
सहायक मंडल इंजीनियर पश्चिम एके श्रीवास्तव का कहना है कि लिंक रोड निर्माण के दौरान पड़ने वाले पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग को कई पत्र भेजा जा चुका है।
वर्जन
डीएफओ संजय विश्वाल का कहना है कि 11.17 करोड़ की लागत से 10.200 किमी लंबी लिंक रोड निर्माण कार्य के मामले में रेलवे की जमीन पर वन विभाग की तरफ से पेड़ लगाए गए हैं। रेलवे की तरफ से मांगी गई एनओसी शासन को भेजा गया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही रेलवे को एनओसी दे दी जाएगी।