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Mau News: ट्रेनिंग के लिए भेजे गए 12 अभ्यर्थी, वर्तनी में गलती होने से आठ की हुई छंटनी

Tue, 13 Aug 2024 12:19 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 13 Aug 2024 12:19 AM IST
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12 candidates were sent for training, eight were rejected due to spelling mistakes
मऊ डिपो की रोडेवेज बसों को चलाने के लिए ड्राइवरों की कमी पूरी नहीं हो पा रही है। परिवहन निगम के अधिकारियों ने जून और जुलाई में ड्राइवरों की भर्ती के लिए बड़े स्तर पर वैकेंसी निकाली थी। इसके तहत अलग-अलग स्थानों पर कैंप भी लगाया जाना था, लेकिन कहीं कैंप नहीं लगाया गया था। किसी तरह 12 आवेदन आए, टेस्ट लेने के बाद अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग के लिए कानपुर भेजा गया। लेकिन प्रमाणपत्रों में उनके नाम, माता पिता के नाम की वर्तनी में एक गलती पाए जाने पर आठ को वापस भेज दिया गया था। अब सभी गलतियों को ठीक करके उन्हें दोबारा भेजा गया है।
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मऊ डिपो के बेड़े में 63 बसें हैं। इनमें से 53 रोडवेज की और 10 अनुबंधित हैं। रोडवेज की 53 बसों को चलाने के लिए वर्तमान में 80 ड्राइवरों की तैनाती है। नियम के अनुसार अनुबंधित बसों के मालिक को अपनी खुद का ड्राइवर देना होता है। उस बस में केवल कंडक्टर परिवहन निगम द्वारा नियुक्त होता है। इसके बावजूद रोडवेज की 53 बसों को चलाने के लिए 80 ड्राइवर पर्याप्त नहीं हैं। इनमें से कुछ स्वास्थ्य खराब होने तो कोई किसी अन्य कारण से छुट्टी पर रहता है। जिसके चलते सभी बसों के संचालन में समस्या खड़ी हो जाती है। लंबे रूट की बसों का संचलन तो जैसे तैसे हो जा रहा है, लेकिन लोकल रूट की बसों को अमूमन एक चक्कर ही चलाया जा रहा है। ड्राइवरों की कमी की वजह से शाम पांच बजे के बाद डिपो से लोकल रूटों पर बसें नहीं मिलती हैं। विवश होकर यात्रियों को प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है
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ड्राइवरों की कमी से खड़ी रहती हैं 10 से अधिक बसें

ड्राइवरों की कमी से रोजाना मऊ डिपो की 10 से अधिक रोडवेज बसें वर्कशॉप में खड़ी रहती हैं। ये संख्या कभी कभी 15 से भी अधिक हो जाती हैं। मऊ डिपो की बसों से रोजाना आठ हजार से अधिक लोग सफर करते हैं। यदि सभी बसें रोजाना अपनी अपनी रूटों पर चलती तो रोडवेज को अधिक राजस्व मिलता।
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ड्राइवरों की कमी को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। आवेदन आने पर तत्काल उन्हें कानपुर भेजा जा रहा है। कुछ बसें खड़ी रहती हैं, लेकिन रोडवेज के राजस्व पर इसका असर नहीं पड़ रहा है। - हरिशंकर पांडेय, एआरएम, मऊ
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