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मातृ शिशु कल्याण् उपकेंद्र बदहाल
Updated Mon, 30 Apr 2018 11:44 PM IST
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स़्थानीय ब्लाक के अंतर्गत ग्राम पंचायत भेलाबांध में स्थित मातु शिशु कल्याण केंद्र खंडहर में बदल गया है। रात में जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को मरीजों को लेकर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है।
कोपागंज ब्लाक के ग्राम पंचायत में लाखों की लागत से बना मातु शिशु कल्याण केंद्र जर्जर हो खंडहर बन गया है। ग्रामीणों की माने तो इस उपकेंद्र पर दो कर्मचारियों की तैनाती है लेकिन हफ्ते में दो ही दिन यहां पर टीकाकरण के समय ही यह दिखते हैं। गांव की गुड़िया, सरस्वती, गुलावी, सुमित्रा गीता आदि का कहना है कि केंद्र जर्जर होने से कर्मचारी नहीं रहते जिससे ग्रामीणों को रात के समय मंहगे अस्पतालो में जाना पड़ता है । कई बार ग्रामीणों द्वारा इसकी शिकायत कोपागंज सीएचसी से लेकर जिला मुख्यालय तक की गयी लेकिन इस पर ध्यान नही दिया जाता। ग्राम प्रधान राम प्रवेश ने कहा कि गत वर्ष उक्त केंद्र की मरमत के लिए शासन द्वारा खाते में 75 हजार रूपये आकर पड़े है । इसकी लिखित जानकारी व मरमत हेतु कोपागंज चिकित्साधीक्षक को दे दिया गया । लेकिन विभाग मरमत की हामी ही नही भर रहा ।
चिकित्सा अधीक्षक डा. आरके झा का कहना है कि उपकेंद्र अब रात में रहने योग्य नहीं रह गए हैं। टीकाकरण के दिन को छोड़कर अन्य चार दिनों में इन कर्मचारियों को क्षेत्र के गांवों में जाना होता है। फिर भी नियत दिनों में उपकेंद्र पर न रहने की यदि कोई शिकायत मिलती है तो संबंधित कर्मचारियों से जवाब तलब कर कार्रवाई की जाएगी।
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कोपागंज ब्लाक के ग्राम पंचायत में लाखों की लागत से बना मातु शिशु कल्याण केंद्र जर्जर हो खंडहर बन गया है। ग्रामीणों की माने तो इस उपकेंद्र पर दो कर्मचारियों की तैनाती है लेकिन हफ्ते में दो ही दिन यहां पर टीकाकरण के समय ही यह दिखते हैं। गांव की गुड़िया, सरस्वती, गुलावी, सुमित्रा गीता आदि का कहना है कि केंद्र जर्जर होने से कर्मचारी नहीं रहते जिससे ग्रामीणों को रात के समय मंहगे अस्पतालो में जाना पड़ता है । कई बार ग्रामीणों द्वारा इसकी शिकायत कोपागंज सीएचसी से लेकर जिला मुख्यालय तक की गयी लेकिन इस पर ध्यान नही दिया जाता। ग्राम प्रधान राम प्रवेश ने कहा कि गत वर्ष उक्त केंद्र की मरमत के लिए शासन द्वारा खाते में 75 हजार रूपये आकर पड़े है । इसकी लिखित जानकारी व मरमत हेतु कोपागंज चिकित्साधीक्षक को दे दिया गया । लेकिन विभाग मरमत की हामी ही नही भर रहा ।
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चिकित्सा अधीक्षक डा. आरके झा का कहना है कि उपकेंद्र अब रात में रहने योग्य नहीं रह गए हैं। टीकाकरण के दिन को छोड़कर अन्य चार दिनों में इन कर्मचारियों को क्षेत्र के गांवों में जाना होता है। फिर भी नियत दिनों में उपकेंद्र पर न रहने की यदि कोई शिकायत मिलती है तो संबंधित कर्मचारियों से जवाब तलब कर कार्रवाई की जाएगी।
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