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ब्रह्म की प्राप्ति के लिए सर्वस्व समर्पण जरुरी
Updated Fri, 08 Jun 2018 12:24 AM IST
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अमिला नगर पंचायत में प्राथमिक विद्यालय (डीह बाबा) पर चल रहे पांच दिवसीय रामचरित सम्मेलन के चौथे दिन अयोध्या के मानस मर्मज्ञ रमेश दास रामायणी ने कहा कि ब्रह्म या परमात्मा की प्राप्ति के लिए सर्वस्व समर्पण होना चाहिए। बिना समर्पण भाव भक्ति के ईश्वर का मिलन असंभव है।
कहा कि विश्वामित्र द्वारा राजा दशरथ के दो पुत्रों को मांगना ब्रह्म की प्राप्ति के उद्देश्य से था। उन्होंने ब्रह्म की खोज में याचना की थी, न कि यज्ञ रक्षा के लिए या किसी अन्य उद्देश्य के लिए। स्वयं विश्वामित्र स्वयं यज्ञ रक्षा में समर्थ थे किंतु ब्रहम की प्राप्ति के लिए अपने धर्म के विपरीत जाकर राजा दशरथ से याचक बनने का कार्य किया। अंतत: उन्होंने अपना समस्त ज्ञान ब्रहम को समर्पित कर दिया। अयोध्या के मधुसूदन शास्त्री ने भक्त और भक्ति के बीच संबंधों की उत्तम व्याख्या करते हुए जीव को परमात्मा की प्राप्ति कैसे संभव होगा इस पर प्रकाश डाला। इस दौरान राम प्रसाद कुशवाहा, अखिलेश्वर शुक्ल, शिवनाथ साहू, अशोक कुमार ओझा आदि उपस्थित रहे ।
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कहा कि विश्वामित्र द्वारा राजा दशरथ के दो पुत्रों को मांगना ब्रह्म की प्राप्ति के उद्देश्य से था। उन्होंने ब्रह्म की खोज में याचना की थी, न कि यज्ञ रक्षा के लिए या किसी अन्य उद्देश्य के लिए। स्वयं विश्वामित्र स्वयं यज्ञ रक्षा में समर्थ थे किंतु ब्रहम की प्राप्ति के लिए अपने धर्म के विपरीत जाकर राजा दशरथ से याचक बनने का कार्य किया। अंतत: उन्होंने अपना समस्त ज्ञान ब्रहम को समर्पित कर दिया। अयोध्या के मधुसूदन शास्त्री ने भक्त और भक्ति के बीच संबंधों की उत्तम व्याख्या करते हुए जीव को परमात्मा की प्राप्ति कैसे संभव होगा इस पर प्रकाश डाला। इस दौरान राम प्रसाद कुशवाहा, अखिलेश्वर शुक्ल, शिवनाथ साहू, अशोक कुमार ओझा आदि उपस्थित रहे ।
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